मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) में कांग्रेस (Congress) की राजनीति में नए क्षत्रपों का उदय ना होने के कारण आज कांग्रेस अपने भूले-बिसरे चेहरों की ताजपोशी कर रही है. लेकिन सवाल यही है कि क्या ये नए चेहरे कांग्रेस के संकट (crisis) को दूरकर पाएंगे.
Source: News18Hindi
Last updated on: December 24, 2020, 11:37 PM IST
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने मध्यप्रदेश के लिए जो अनुशासन समिति बनाई है, उसमें ऐसे चेहरे हैं, जिनका योगदान कांग्रेस की नई पीढ़ी नहीं जानती है. सबसे ज्यादा चौंकाने वाला नाम रिटायर्ड आईएएस अधिकारी अजिता वाजपेयी पांडे का है. श्रीमती पांडे अगस्त 2015 में रिटायर हुईं थीं. वर्ष 2018 के विधानसभा के आम चुनाव से पहले कांग्रेस की राजनीति में सक्रिय हुई थीं.
जाति-धर्म के आधार पर बनी आठ सदस्यीय समिति
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने मध्यप्रदेश के लिए जो अनुशासन समिति बनाई है, उसमें जाति-धर्म और क्षेत्र को साधने का फार्मूला लागू किया है. समिति में अल्पसंख्यक वर्ग साजिद अली को रखा गया है. वे पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह के करीबी हैं. जनजाति वर्ग के नन्हेलाल धुर्वे को रखा गया है. धुर्वे भी सक्रिय राजनीति में नजर नहीं आते. वे महाकौशल के आदिवासी अंचल से हैं, जबकि अनुसूचित जाति वर्ग से पूर्व सांसद बाबूलाल सोलंकी हैं. ग्वालियर-चंबल अंचल से हैं. सोलंकी 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए लोकसभा चुनाव में मुरैना से सांसद चुने गए थे.
ब्राहण वर्ग से पूर्व विधायक विनय दुबे को समिति में जगह मिली है. दुबे लोकसेवा आयोग के अध्यक्ष रह चुके हैं, लेकिन सक्रिय राजनीति से दूर हैं. पूर्व मंत्री रामेश्वर पटेल पिछड़ा वर्ग से हैं. वे मालवा क्षेत्र से हैं. प्रदेश कांग्रेस कमेटी में संगठन का कामकाज देख रहे उपाध्यक्ष चंद्रप्रभाष शेखर को समिति में भी उपाध्यक्ष बनाया गया है. वे कमलनाथ के भरोसेमंद हैं. भारत सिंह की उम्र को देखकर यह कहा जा सकता है कि अनुशासन समिति का काम अप्रत्यक्ष तौर चंद्र प्रभाष शेखर ही देखेंगे. विनय दुबे और साजिद अली पिछली अनुशासन समिति में भी सदस्य रह चुके हैं.
भारत सिंह के जरिए पुराने समर्थकोंं को सक्रिय करने की रणनीति
समिति का अध्यक्ष पूर्व अध्यक्ष भारत सिंह को बनाया गया है. भारत सिंह का जन्म 1945 का है, उन्होंने विधानसभा का आखिरी चुनाव 1998 में लड़ा था. चुनाव जीते भी थे. 2003 के आम चुनाव के बाद से ही उनकी गतिविधियां भी सीमित हो गईं. भारत सिंह राजपूत हैं. रतलाम जिले के जावरा तहसील के निवासी हैं. सिंधिया राजघराने का प्रभाव क्षेत्र भी यहां माना जाता रहा है. सिंधिया के करीबी स्वर्गीय महेन्द्र सिंह कालूखेड़ा का प्रभाव क्षेत्र भी रहा है. माना जाता है कि भारत सिंह को महत्व देकर दिग्विजय सिंह इस अंचल में अपने समर्थकों को फिर से खड़ा करना चाहते हैं.व्यापमं कांड में आरोपी हैं रिटायर्ड आईएएस के पति
अनुशासन समिति में सबसे चौंकाने वाला नाम रिटायर्ड आईएएस अधिकारी अजिता वाजपेयी पांडे का है. पांडे के पति अमित पांडे व्यापमं मामले में गिरफ्तार हो चुके हैं. उनका नाम शिक्षक वर्ग तीन की नियुक्ति को लेकर आरोपी के तौर पर सामने आया था. उनकी गिरफ्तारी भी हुई और जेल भी गए.
अजिता वाजपेयी 1981 में आईएएस में आने से पहले युवक कांग्रेस की राजनीति में सक्रिय रही थीं. रिटायरमेंट के बाद कांग्रेस की राजनीति में वापस लौट आई है. विधानसभा चुनाव के दौरान वाजपेयी ने कांग्रेस का वचन पत्र बनाने में कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ की मदद की थी.
क्यों महत्वपूर्ण हो गई अनुशासन समिति
समान्यत: अनुशासन समिति में उम्रदराज नेताओं को ही जगह दी जाती रही है. पिछली समिति के अध्यक्ष हजारीलाल रघुवंशी थे, उनका निधन हो गया है. नई अनुशासन समिति राजनीतिक तौर पर बेहद महत्वपूर्ण है. मध्यप्रदेश में हाल ही में 28 विधानसभा सीटों पर उप चुनाव हुए हैं. उप चुनाव ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनके समर्थक विधायकों द्वारा भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने के कारण हुए. उप चुनाव में कांग्रेस ने सिंधिया के प्रभाव क्षेत्र ग्वालियर-चंबल की लगभग सभी सीटों पर कड़ी चुनौती दी. कुछ सीटें कांग्रेस बचाने में सफल रही. कुछ सीटें भारतीय जनता पार्टी के खाते में चली गईं. जो सीटें भाजपा ने जीती हैं, उन पर कांग्रेस के पराजित उम्मीदवार अपनी ही पार्टी के नेताओं पर भितरघात का आरोप लगा रहे हैं.
भिंड जिले की मेहगांव सीट भी भाजपा ने जीती है. भिंड जिला कांग्रेस कमेटी ने पूर्व मंत्री और लहार के विधायक डॉ. गोविंद सिंह के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित किया है. जिला अध्यक्ष श्री राम बघेल ने कई आरोप भी डॉ. गोविंद सिंह पर लगाए. मेहगांव से कांग्रेस उम्मीदवार हेमंत कटारे ने भी हार का ठीकरा डॉ. गोविंद सिंह के सिर फोडा है. डॉ. सिंह,दिग्विजय सिंह समर्थक हैं. नेता प्रतिपक्ष पद के दावेदार भी हैं. अनुशासन समिति के समक्ष यह मामला रखा जाना है. ग्वालियर-चंबल के अन्य नेताओं पर पर भी भितरघात का आरोप है.
दिनेश गुप्ता
लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं. सामाजिक, राजनीतिक और समसामयिक मुद्दों पर लिखते रहते हैं. देश के तमाम बड़े संस्थानों के साथ आपका जुड़ाव रहा है.
First published: December 24, 2020, 11:29 PM IST



