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इंदौर28 मिनट पहले
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- गुरुवार को चेन्नई से डॉक्टरों की टीम इंदौर पहुंची थी
- आगर-मालवा जिला अस्पताल में पदस्थ हैं डॉ. मुकेश जैन
कोरोना संक्रमण भले ही कम हो गया हो लेकिन कोरोना वॉरियर्स पर अब भी खतरा बना हुआ है। ऐसे ही एक योद्धा डॉ. मुकेश जैन हैं, जो इंदौर में जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं। डॉ. मुकेश जैन का एक्स्ट्रा कॉर्पाेरियल में ब्रेन ऑक्सीजनेशन यानी इकमो करने के लिए गुरुवार को चेन्नई से डॉक्टरों की टीम दाेपहर में इंदौर पहुंची। शुक्रवार को मरीज काे इंदौर से चेन्नई एयर लिफ्ट किया गया।
आगर-मालवा जिला अस्पताल में पैथोलॉजिस्ट डाॅ. जैन का इंदौर के निजी अस्पताल में पांच-छह दिन से इलाज चल रहा था। आगर-मालवा जिला अस्पताल में पदस्थ डॉ. जैन पैथोलॉजिस्ट हैं। फिलहाल उनका इलाज इंदौर के एक निजी अस्पताल में चल रहा था। परिवार के सदस्यों ने बताया कि चार-पांच दिन पहले ही वे संक्रमण की चपेट में आए थे, लेकिन तबीयत बिगड़ती चली गई। फिलहाल उन्हें वेंटीलेटर पर रखा गया था। फिलहाल डॉ. जैन के इकमो प्रोसिजर के लिए इंतजार किया जा रहा है। उनके लंग्स की डायलिसिस होगी, जिसके बाद शिफ्ट करने का निर्णय लिया गया।

क्या हाेता है इकमो-ह्रदय रोग विशेषज्ञ डॉ. पंकज तिवारी ने बताया कि इकमो यानी एक्स्ट्रा कॉर्पाेरियल में ब्रेन ऑक्सीजनेशन वह प्रक्रिया है, जिसमें मरीज के ब्लड को ऑक्सीजनेट कर दोबारा शरीर में भेजा जाता है। वेंटीलेटर एक सीमा तक ही ऑक्सीजन शरीर में मेंटेन कर सकता है। इकमो वेंटीलेटर की तुलना में एडवांस है। मशीन शरीर से ब्लड को निकालकर उसे ऑक्सीजनेट करती है। ब्लड से कार्बन डाई ऑक्साइड निकालती है। इससे क्षतिग्रस्त अंग की गति ठीक हो जाती है।