भास्कर पड़ताल: बेरिकेडिंग के आगे जाना घातक, 3 से सीधे 6 फीट गहरा, एक कदम आगे बढ़े तो डूब जाओगे

भास्कर पड़ताल: बेरिकेडिंग के आगे जाना घातक, 3 से सीधे 6 फीट गहरा, एक कदम आगे बढ़े तो डूब जाओगे


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उज्जैन3 घंटे पहलेलेखक: ओमप्रकाश सोनोवणे

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शिप्रा घाट पर ऐसा क्या है जो स्नान करने वाले अचानक डूबने लगते हैं।

  • दत्त अखाड़ा घाट पर प्लेटफाॅर्म है ही नहीं

रामघाट पर शिप्रा में राणोजी की छतरी के सामने वाले हिस्से में घाट से 10 फीट दूर तक 3 फीट पानी का लेवल है। इसलिए वहां तक निश्चिंत तरीके से डुबकी लगाएं। लेकिन यदि इससे एक कदम भी आगे बढ़ गए तो 6 फीट गहराई में डूब जाएंगे।

आरती द्वार के पास तो कई जगह सीढ़ी के बाद 3 फीट तक ही प्लेटफाॅर्म है। दत्त अखाड़ा घाट पर तो यह प्लेटफाॅर्म है ही नहीं। इसलिए शिप्रा में स्नान यात्रियों के लिए हमेशा खतरे की घंटी है। यहां न तो नदी में स्थायी बेरिकेड्स लगे हैं और न ही सूचना बोर्ड ताकि यात्री हद में रहकर सुरक्षित तरीके से स्नान कर सकें।

यात्रियों के साथ होने वाले हादसे तो रूटीन जैसी बात हो गई है। बुधवार को तब तहलका मचा, जब निजी युवा तैराक पंकज चावड़ा दो यात्रियों को बचाने के बाद तीसरी महिला को निकालते समय स्वयं जान गवां बैठे। इस हादसे के दूसरे दिन भास्कर ने इस तरह के हादसे के पीछे के कारणों और बचाव के तरीकों की पड़ताल की। भास्कर ने 5.6 फीट के तैराक तेजा को नदी में उतारकर वह सारे पाइंट तलाशे, जिनके कारण हादसे होते हैं। इस दौरान डूब की घटना का नाट्य रूपांतरण भी किया गया।

भास्कर प्लान : स्नान घाट तय हो और सुरक्षा के स्थायी इंतजाम किए जाएं

  • सामान्य दिनों के लिए स्नान घाट घोषित करें- जैसे रामघाट और दत्त अखाड़ा घाट। अन्य घाटों पर स्नान पर रोक लगाएं।
  • घाट पर नदी तल में बने प्लेटफार्म की अंतिम पर स्थायी बेरिकेड्स लगाएं ताकि लोग उसके आगे नहीं जा सकें। इससे हादसे रूकेंगे।
  • घाट पर लाइफ जैकेट और लाइफ रिंग रखवाएं ताकि यात्री उन्हें लेकर नदी में उतरें।
  • लगातार एनाउंसमेंट की व्यवस्था करें, उस पर यात्रियों को सुरक्षा की हिदायतें दी जाएं।
  • ऑटो, मैजिक वालों को पाबंद करें कि वे यात्रियों को केवल रामघाट व दत्त अखाड़ा घाट पर ही छोड़ें। इससे अन्य घाटों पर यात्री नहीं पहुंचेंगे।
  • घाट पर प्रकाश व सफाई व्यवस्था तय की जाए।
  • डिजास्टर फोर्स के जवानों की ड्यूटी लगाई जाए।
  • डायल 100 या एंबुलेंस तैनात हो।
  • प्राथमिक उपचार व ऑक्सीजन की व्यवस्था करें।
  • निजी तैराकों को मानदेय, प्रशिक्षण आदि की व्यवस्था करें ताकि वे कुशलता से काम कर सकें।

यह है सुरक्षा बंदोबस्त

  • महाकाल थाने से 2 जवान तैनात, जिनकी जिम्मेदारी यात्रियों को सुरक्षा देना।
  • होमगार्ड से 3 शिफ्ट में 12 तैराक जवान तैनात, जिनकी जिम्मेदारी डूबते यात्रियों को बचाना।
  • दो नाव ताकि नदी में घूम पर यात्रियों की निगरानी की जा सके।
  • ताजा स्थिति- दोपहर 3 बजे, चौकी में एक जवान मौजूद। होमगार्ड तैराकों का पता नहीं। बाद में एक तैराक आया।

सुझाव लागू नहीं हुए: घाट पर अस्थायी बेरिकेड्स हैं, जो कुछ जगह नदी में गिर गए हैं और कुछ जगह है ही नहीं। अनाउंसमेंट सिस्टम अब भी खराब पड़ा है। दूर तक आवाज नहीं जाती। कुछ जगह घाटों पर अंधेरा रहता है। काई की सफाई पर्व-त्योहार पर ही होती है। नृसिंहघाट व सिद्धाश्रम के पास स्नान पर रोक नहीं लगी। निजी तैराकों को जोड़ने के लिए कोई योजना नहीं।

अभी यह हालात

  • सीढ़ियों पर काई जमी है जिससे फिसलन हो रही है।
  • चौकी के सामने बेरिकेड्स नदी में गिरे पड़े हैं।
  • आरती द्वार के सामने बेरिकेड्स नहीं है, यहां प्लेटफाॅर्म भी 3 फीट तक ही है।
  • बारिश में बहकर आए पेड़ नदी में पड़े हैं।
  • एक नाव खराब है और दो का उपयोग नहीं हो रहा।
  • घाटों पर सूचना बोर्ड नहीं लगे हैं।

(जैसा पुरोहित आनंद गुरु और दुकानदार सोनू सेन ने बताया।)

रोज 5-10 को बचाते हैं

तैराक तेजा और उनके साथी बताते हैं कि दिनभर में 5-10 लोगों को बचाया जाता है लेकिन निजी तैराकों के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। उनके पास न सुरक्षा के संसाधन हैं और न ही प्रशासन का सपोर्ट। वे लोग केवल सेवा के भाव से काम करते हैं।

हादसे: 3 साल में 42 डूबे

42 यात्रियों की डूबने से मौत हुई 2018, 2019, 2020 में रामघाट क्षेत्र में महाकाल थाना के अनुसार

2019: होमगार्ड सर्वे के सुझाव

  • घाट पर प्लेटफार्म के किनारे स्थायी रेलिंग लगाएं।
  • अनाउंसमेंट की लगातार व्यवस्था करें।
  • अनाउंसमेंट सिस्टम प्रत्येक घाट पर हो, लगातार चले।
  • घाटों पर समुचित प्रकाश व्यवस्था करें।
  • सीढ़ियों से लगातार काई साफ की जाए।
  • नृसिंह घाट, सिद्धाश्रम के पास के घाटों पर स्नान प्रतिबंधित करें।
  • निजी तैराकों को मानदेय, परिचय पत्र दिए जाएं।

(जैसा प्लाटून कमांडेंट रूबी यादव ने बताया)​​​​​​​

2017 तक मिलता था मानदेय: प्लाटून कमांडर यादव के अनुसार 2017 तक निजी तैराकों के लिए मानदेय आता था। इससे सिविलियंस तैराकों को मदद मिल जाती थी। इसके बाद से यह बंद हो गया। शिप्रा तैराक दल और अन्य तैराक नि:शुल्क सेवा दे रहे हैं।

होमगार्ड कमांडेंट संतोष जाट से भास्कर के सवाल​​​​​​​

होमगार्ड को सुरक्षा की जिम्मेदारी है?

-तीन शिफ्ट में 12 तैराक तैनात हैं।

होमगार्ड तैनात हैं फिर भी हादसे क्यों हो रहे?

-कई लाेगों की जान बचाई है। बुधवार को भी एक को बचाया।

पहले सर्वे हुआ था?

– पता कर उसे लागू कराने के लिए प्रशासन को पत्र लिखेंगे।

सुरक्षा व निगरानी के लिए क्या कर रहे?

-5-5 दिन के लिए पर्यवेक्षक अधिकारी तैनात कर रहे हैं।

और क्या कदम उठा रहे हैं?

-6 होमगार्ड और 6 डिजास्टर रिस्पांस फोर्स के जवानों को पुणे में प्रशिक्षण के लिए भेज रहे हैं।

शिप्रा शुद्धिकरण न्यास को सक्रिय करना चाहिए

शिप्रा शुद्धिकरण न्यास का गठन ही रामघाट पर यात्रियों की सहायता और घाट के रखरखाव के लिए किया गया था। लेकिन इसके उद्देश्य पूरे नहीं हो सके। संभागायुक्त और निगमायुक्त न्यास को सक्रिय करें ताकि घाट पर शहर के नागरिकों की सहभागिता शुरू हो सके। न्यास के माध्यम से कई व्यवस्थाएं की जा सकती हैं।

-सुरेंद्रसिंह अरोरा, सदस्य

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