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शाजापुर16 घंटे पहले
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नेट पर जमा हो गए थे नींबू आकार के ओले, नीचे गिराए।
- तीन साल बाद फिर बरसी आफत, विशेषज्ञ का पूर्वानुमान शाजापुर में आज खुलेगा मौसम, आगर क्षेत्र में रहेगा असर
पूर्वी पश्चिमी हवा के टकराव से बिगड़े मौसम ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया। तीन साल बाद एक बार फिर आसमान से शुक्रवार को आफत बरसती नजर आई। खासताैर पर जिले के मोहन बड़ाेदिया से शाजापुर सुनेरा तक के 35 वर्ग किमी क्षेत्र में बारिश के साथ ओलावृष्टि हुई। कई ग्रामीण क्षेत्रों में तो 20-100 ग्राम तक के ओले गिरे, इससे खेतों में खड़ी फसलें आड़ी होने के साथ उनके दाने खिर गए।
दिनभर की पांच घंटे में 5 मिली बारिश दर्ज की गई। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार मौसम के इस बदलाव से सबसे ज्यादा असर चने की फसल पर पड़ेगा। साथ ही खेतों में कटी पड़ी फसलों पर भी 5-7 प्रतिशत नुकसान का अनुमान है, लेकिन किसानों ने इसे आपदा बताते हुए कहा कि बारिश के पानी से गिली हुई फसलें सूखने पर ज्यादा प्रभावित होगी। उल्लेखनीय है कि तीन साल पहले भी ऐसी ही बारश के कारण स्थिति बनी थी।
शुक्रवार सुबह से ही बादल छाए हुए थे, लेकिन दोपहर 12 बजे बाद हवा की रफ्तार तेज होने लगी और देखते ही देखते बारिश का सिलसिला शुरू हो गया। अभी बारिश ने जोर पकड़ा ही था कि अचानक से ओलावृष्टि शुरू हो गई। यह नजारा देख खेतों पर खड़े किसानों के मुंह से बस यही निकलता रहा कि काल अइगयो। अब फसलां के बरबाद होने से कोई नी रोकी सके।
इधर, कलेक्टर दिनेश जैन ने भी स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राजस्व और कृषि विभाग के अमले को मैदानी जानकारी जुटाने के लिए रवाना कर दिया। कृषि विभाग के डीडीए आरएस नायक ने बताया कि शाम 5 बजे तक मोहन बड़ाेदिया से लेकर सुनेरा क्षेत्र के गांवों से बारिश और ओलावृष्टि की खबरें सामने आई है। नुकसान का आकलन भी निकाला जा रहा है।
मुरादपुरा रोड पर किसान लक्ष्मीनारायण की फसलें तेज बारिश के कारण इस तरह हो गई आड़ी। फोटो : अवनीश त्रिवेदी
इन गांवों में तूफान जैसा असर दिखाई दिया, आलू-प्याज भी प्रभावित
शहर से लगे ग्राम जाइहेड़ा-बज्जाहेड़ा, बाहिड़ा, बमोरी, लखमनखेड़ी, गोपीपुर, भरड़ आदि में बदले मौसम ने तूफान का रूप ले लिया। मुरादपुरा रोड क्षेत्र के किसान लक्ष्मीनारायण के खेत पर लहलहाती फसलें पूरी तरह आड़ी हाे गई। किसान ने बताया मौसम में आया बदलाव फसलों के लिए काल बनकर आया। वहीं किसान आजम खान ने बताया कि मौसम ने संभलने का मौका ही नहीं दिया। फसलों में बड़ा नुकसान हुआ है। ग्राम अभयपुर के किसान महेश पाटीदार ने बताया गेहूं-चना के साथ आलू, प्याज, लहसुन को भी नुकसान है।
कृषि वैज्ञानिक बोले- चने की फसल सबसे ज्यादा नुकसान
कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक एस.एस. धाकड़ ने बताया शुक्रवार काे हुई बारिश से सबसे ज्यादा नुकसान चने की फसल को होगा। खेतों मे खड़ी व कटी फसलों के दाने खिर जाएंगे। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार 5-7 प्रतिशत का नुकसान हो सकता है। किसान संघ के तहसील अध्यक्ष मुकेश पाटीदार ने बताया कि बारिश से गिली हो चुकी फसलों के सूखने पर ज्यादा असर दिखाई देगा, क्योंकि अब गर्मी के कारण फसलों से दाने गिरने लगेंगे। भारतीय किसान संघ ने मांग की है कि जल्द से जल्द सर्वे कर मुआवजा दिया जाए।
रात को फिर शुरू हुआ बारिश का दौर, 18-19 को फिर मावठे की संभावना
दिन में रुक-रुक कर होती रही बारिश का सिलसिला रात को एक बार फिर शुरू हो गया। पूरे दिन में 5 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई। इधर, मौसम विभाग के अनुसार दिन का अधिकतम तापमान 2 डिग्री गिरकर 33.2 डिग्री पर रहा। वहीं न्यूनतम पारा 20.5 डिग्री दर्ज किया गया। मौसम विशेषज्ञ सत्येंद्र धनाेतिया के अनुसार आगामी दिनों में मौसम तो साफ हो जाएगा, लेकिन 18-19 मार्च को एक बार फिर क्षेत्र के लोगों को मावठे की बारिश का सामना करना पड़ सकता है।