भंवरकुंआ पुलिस का शर्मनाक चेहरा: भाभी की मौत के कागज बनाने देवर को कागज लाने बाजार भेजने वाला SI सस्पेंड, नाइट कर्फ्यू के कारण डेढ़ KM दूर से 25 रु. के कागज खरीदकर लाया था

भंवरकुंआ पुलिस का शर्मनाक चेहरा: भाभी की मौत के कागज बनाने देवर को कागज लाने बाजार भेजने वाला SI सस्पेंड, नाइट कर्फ्यू के कारण डेढ़ KM दूर से 25 रु. के कागज खरीदकर लाया था


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इंदौर6 मिनट पहले

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बेटे को बचाने के लिए ही मां ट्रक की चपेट में आई।

  • शाम 6 बजे हुई महिला की मौत, एक घंटे बाद शव उठाया, रात 8.30 बजे लिखी रिपोर्ट, अगली दोपहर 1 बजे बाद परिवार को मिला शव

भाभी की मौत के बाद मर्ग कायम करने के लिए थाने पर कागज नहीं होने का कहते हुए पीड़ित को कागज लाने भेजने वाले सब इंस्पेक्टर को एसपी महेश चंद जैन ने शनिवार को निलंबित कर दिया। एसपी ने पुलिसकर्मी सुरेश चंद्र अवस्थी द्वारा काम में लापरवाही बरतने और पुलिस की छवि के विपरीत काम करने का कृत्य सही पाए जाने पर कार्रवाई करते हुए लाइन भेज दिया है। पुलिसकर्मी ने रात में मर्ग कायम करने के लिए थाने पर सफेद कागज नहीं होने पर पीड़ित को कहा कि कागज लेने चले जाओ। फरियादी बाहर निकला तो नाइट कर्फ्यू लग चुका था। आखिरकार पैदल खोजता हुआ डेढ़ किलोमीटर से सफेद कागज लाकर दिए, तब पुलिस ने केस बनाया। अगले दिन भी परिजन को दोपहर 1 बजे बाद शव मिला।

जिला अस्पताल में भी जगदीश सुबह से दोपहर तक पुलिस का इंतजार करता रहा। डायरी 1 बजे आई।

जिला अस्पताल में भी जगदीश सुबह से दोपहर तक पुलिस का इंतजार करता रहा। डायरी 1 बजे आई।

यह है मामला

  • भंवरकुआं थाना क्षेत्र में गुरुवार शाम 6 बड़े सड़क हादसे में 16 साल के बेटे के साथ पैदल जा रही 50 साल की कालीबाई को ट्रक ने टक्कर मार दी थी। मौके पर उसकी मौत हो गई। अगले दिन पोस्टमॉर्टम करवाने पहुंचे परिजन ने पुलिस की करतूत खोली। वह सच बताया जिसे सुनकर लोग भी चौंक जाएंगे। बकौल जगदीश आर्ने मैं पीपल्याहाना कांकड़ में रहता हूं। कल साढे़ 5 बजे मेरी भाभी खरगोन से इंदौर आई। उनके साथ बेटा भी था। वे रोड क्राॅस कर रही थी, तभी अंधाधुंध गति से आए एक ट्रक ने टक्कर मार दी। उनकी मौके पर ही मौत हो गई। मेरे भतीजे ने काफी समय बाद फोन लगाया। कहा कि काका तीन इमली चौराहे पर मां की मौत हो गई है। मैं तत्काल वहां पहुंचा। मैंने देखा कि शव वहीं पड़ा है। फिर मैंने सौ नंबर और 108 नंबर डायल किया। कोई नहीं आया। फिर मैंने लोडिंग में ही भाभी का शव रखवाया और जिला अस्पताल पहुंचाया। करीब एक से डेढ़ घंटे तक शव वहीं पड़ा रहा। यह पुलिस और प्रशासन की लापरवाही है। वहां मौजूद लोग यह सब देख रहे थे।
  • फिर हम रात 8- 8.30 बजे थाने पहुंचे। वहां पुलिस के दो स्टार थानेदार साहब थे। उन्होंने कहा कि हमने रिपोर्ट तो लिख ली है, लेकिन वो कम्प्यूटर पर ही है। उसका प्रिंट नहीं निकलेगा, क्योंकि थाने पर सफेद कोरे ताव (कागज) नहीं है। मैंने कहा कि साहब इतना बड़ा भंवरकुआं थाना है, क्या एक भी ताव नहीं मिलेगा, तो उन्होंने मना कर दिया। फिर मैंने पूछा कहां मिलेंगे। वो बोले कि थाने के सामने चले जाओ, दो-तीन दुकानों पर खोज लो। मैं खोजने लगा तो लॉकडाउन के कारण रात 9 बजे दुकानें ही बंद हो गई थीं। फिर मैं क्या करता।
  • मैं एक-डेढ़ किलोमीटर आगे तक गया। तब कहीं जाकर मुझे टॉवर चौराहे के आगे एक दुकान खुली दिखी। मैं वहां पहुंचा। वहां से 25 रुपए के कोरे कागज खरीदे। फिर थाने पहुंचकर सौंपे। तब कहीं जाकर मेरी एफआईआर दर्ज हुई है। शुक्रवार को भी दोपहर का 1 बज चुका है। मैं और मेरा परिवार यहीं जिला अस्पताल में बैठा रहा। साहब हम गरीब जरूर हैं, मानवता क्या होती है समझते हैं। ऐसे समय तो पुलिस और प्रशासन को कार्रवाई जल्दी करवा देना चाहिए। हमें पता है कि हमारी पहुंच नहीं है, इसलिए सब हो रहा है। वरना कोई बड़ा आदमी मरता तो पुलिस दौड़-दौड़कर काम करती।

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