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भोपाल3 घंटे पहलेलेखक: वंदना श्रोती
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एक साल में औसतन तीन हजार बच्चे ही गोद दिए जाते हैं।
- हर साल तकरीबन 25 हजार दंपती गोद लेने के लिए करते हैं आवेदन, इनमें विदेशी दंपती भी शामिल
गोद लेने के इच्छुक दंपती के आवेदन करने के ट्रेंड में चार साल में अंतर सामने आ रहा है। रजिस्ट्रेशन कराते समय जहां पहले 62 प्रतिशत दंपती की पहली पसंद लड़का होती थी। अब 78 प्रतिशत दंपती लड़कियों को गोद लेने के इच्छुक है।
यह परिवर्तन महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा चार साल के एक विश्लेषण में सामने आया है। हालांकि कुछ ऐसे दंपती हैं जिन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि उन्हें मैच मेकिंग के समय लड़का दिखाया जाएगा या लड़की।
केंद्रीय दत्तक ग्रहण प्राधिकरण (कारा) के मुताबिक कि हर साल औसतन करीब 25 हजार दंपती गोद लेने के लिए आवेदन करते हैं। इसमें विदेशी भी शामिल हैं। वैसे देशभर में शिशु गृहों में बच्चों की संख्या सीमित होने से एक साल में औसतन तीन हजार बच्चे ही गोद दिए जाते हैं।
शिशु गृह के संचालकों का कहना है कि अब लोगों की मानसिकता में अंतर आ रहा है। काउंसलिंग के दौरान दंपतियों का कहना होता है कि लड़कियां भले ही शादी करके दूसरे घर चली जाए लेकिन वे माता-पिता का ख्याल रखती हैं। जिनके अपने लड़के होते हैं वह माता-पिता को बेघर कर देते हैं।
लड़के के लिए इंतजार को तैयार नहीं दंपती
महिला एवं बाल विकास विभाग के संयुक्त संचालक डॉ. विशाल नाडकर्णी ने बताया कि गोद लेने वाले दंपतियों की मानसिकता में अंतर आ रहा है। अब लड़कियों को गोद लेने के लिए आवेदन ज्यादा पहुंच रहे हैं। शिशुगृह संचालकों का कहना है कि शिशु गृहों में लड़की की संख्या अधिक और लड़कों की कम है। इससे भी दंपती की प्राथमिकता बदल रही है।