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रतलाम5 मिनट पहले
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- अधिकांश मजदूर बाहर के होने से दिन भर इधर-उधर भटकते रहे
कोरोना के बढ़ते मरीजों को देखते हुए शहर में शनिवार और रविवार दो दिन की लॉकडाउन घोषित कर दिया है। इसकी जानकारी बाहर से आने वाले श्रमिकों नहीं लग पाई, इस कारण काम की तलाश में श्रमिक शहर पहुंच गए। जो अपने वाहन से आए वे तो पुन: लौट गए, लेिकन जो ट्रेन से आए वे इधर-उधर भटकते हुए शाम को ट्रेन से रवाना हुए।
मजदूरी के इंतजार में बड़ी संख्या में मजदूर शनिवार सुबह दो बत्ती चौराहे पर पहुंच गए। लॉकडाउन होने के कारण उन्हें मजदूरी नहीं मिली। इस दौरान दो-तीन बाइक व एक चार पहिया वाहन वाला आकर रूका तो श्रमिकों को लगा की मजदूरी पर ले जाने के लिए आए तो सभी दौड़ कर उनके पास पहुंच गए। सुबह 9.45 बजे तक वे मजदूरी के लिए इंतजार करते रहे। कुछ देर बाद प्रशासनिक वाहन आने पर उन्हें वहां से बैठने से मना किया इसके बाद सभी मजदूर वहां से चले गए। लॉकडाउन लगने के कारण मजदूर वर्ग काफी परेशान हो गया है। कई मजदूर तो ऐसे भी हैं जो परिवार को छोड़ कर यहां मजदूरी कर पैसे उनके घर तक भिजवा रहे हैं और दुकान व अन्य स्थानों पर रात गुजार रहे हैं।
बेरोजगारी का डर : मजदूरों ने काम मिलने की आस में अपनी दिहाड़ी भी कम की
^पिछले 10 दिनों से शहर में रहकर मजदूरी कर रहा हूं। लॉकडाउन के कारण मजदूरी नहीं मिली। परिवार के सभी सदस्य घर पर हैं। हमारे क्षेत्र में मजदूरी नहीं मिलने के कारण यहां आया हूं। रात में दुकानों के बाहर सो जाता हूं।
रमेश मालवीय, चौमहला (राज.)
^मजदूरी की तलाश में साथी के साथ बाइक से आया था। लॉकडाउन लगने के कारण मजदूरी नहीं मिली। इंतजार कर रहा हूं कि कोई आए ओर मुझे मजदूरी पर ले जाए। इस लॉकडाउन के कारण हम जैसों का मरण हो रहा है।
राहुल, भीलड़ी (रावटी)
^जिस दिन मजदूरी नहीं मिलती है उस दिन घर खर्च में काफी परेशानी होती है। प्रति मजदूर को 350 रुपए मिल रहे हैं। लॉकडाउन के कारण 300 रुपए में भी जाने को तैयार हो गए, लेकिन कोई नहीं आया।
भोला, मांगरोल
^लॉकडाउन लगने की जानकारी नहीं थी। क्षेत्र से लगभग 50 मजदूर आए हैं। दिन भर इधर-उधर भटकने के बाद शाम को फिर गांव लौटेंगे। मनरेगा के तहत भी काम नहीं मिल रहा है।
गोपाल वसुनिया, बामनिया