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होशंगाबाद3 मिनट पहले
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- सर्दी, खांसी जुकाम, बुखार होने पर अस्पताल स्टाफ मरीजों को लौटा रहा
कोरोना वायरस संक्रमण से डरे लोग अस्पताल में सामान्य बुखार, खांसी और जुकाम होने पर भी कोरोना जांच के लिए आ रहे हैं। इसके कारण अस्पताल में भीड़ हाे रही है। अस्पताल में केवल उन्हीं लोगों की कोरोना जांच की जा रही है, जिनके शरीर में ऑक्सीजन का लेवल 90 से कम अा रहा है। जिन लोगों का आक्सीजन लेवल 90 के ऊपर आता है, अस्पताल स्टाफ द्वारा उनका कोराना जांच करने से मना कर रहा है, इससे कई बार विवाद की स्थिति बन रही है और इससे लोगों में आक्रोश बढ़ रहा है। लोग नेताओं तक से सिफारिश करवा रहे हैं। शासकीय अस्पताल रोजाना 200 के आस-पास लाेग कोरोना संक्रमण की जांच कराने के लिए आ रहे हैं।
फीवर क्लीनिक के सामने लोगों की दो लाइन लग रही हैं। कुछ दिन पहले एक दिन में अधिकतम 60 लोगों की कोरोना जांच की जा रही थी, लेकिन अब जांच की संख्या बढ़ा दी गई है। अस्पताल आने वाले उन लोगों की जांच की जा रही है, जिनमें सर्दी-जुखाम, बुखार, हाथ-पैर में दर्द के साथ-साथ शरीर में ऑक्सीजन का लेवल 90 के नीचे है। बाकी लोगों की कोरोना जांच नहीं की जा रही है।
अस्पताल में दोनों प्रकार की कोरोना जांच की जा रही है। गंभीर समझ में आने वाले मरीजों की तत्काल जांच होती है इसमें एक से डेढ़ घंटे के अंदर जांच रिपोर्ट मिल जाती है। सरकारी अस्पताल स्टाफ का कहना है कि कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या बढ़ी है, लेकिन इतनी भी नहीं बढ़ी जितने लोग जांच कराने के लिए अस्पताल आ रहे हैं।
90 से ऊपर ऑक्सीजन लेवल वालों की जांच नहीं होने की बात पर अस्पताल स्टाफ बोलने को तैयार नहीं है। मंगलवार को एक व्यक्ति ने अस्पताल में कोराेना जांच के लिए आया। उसका आक्सीजन लेवल 95 था, लेकिन बुखार होने पर वह कोरोना जांच कराना चाहता था। उसने कहा स्वाद, सूंघने के शक्ति नहीं रही। कमजोरी है इसलिए जांच होना चाहिए। काफी देर हंगामे के बाद भी उसकी कोरोना जांच नहीं की गई।
5 दिन बाद भी नहीं मिल रही कोरोना जांच रिपोर्ट
कोरोना के बढ़ते संक्रमण को रोकने में प्रशासन उदासीन दिख रहा है। प्रशासन न तो कोविड केयर सेंटर प्रारंभ कर सका और न ही कंटेनमेंट जोन बनाने के रुचि रख रहा है, वहीं न तो समय पर कोरोना सैंपलों की रिपोर्ट मिल रही और न ही सैंपल किट की व्यवस्था हो रही है। जबकि क्षेत्र में कोरोना संक्रमितों को संख्या 100 के पार हो चुकी है। स्थिति यह कि कोरोना संक्रमित के घर को एक सप्ताह बाद भी कंटेनमेंट जोन के पर्चा चस्पा नहीं हो पाए हैं। कुछ तो ऐसे भी संक्रमित है जो लगभग स्वास्थ्य हो गए। इसके अलावा संक्रमित के लिए कोविड केयर सेंटर का अभाव है। हालांकि आदिवासी बालक आश्रम में 30 बिस्तरों की व्यवस्था की है, लेकिन मरीज भर्ती नहींं किया गया। आरटी-पीसीआर सैंपल की रिपोर्ट आने में पांच दिन से भी अधिक समय लग रहा है।
डॉ. रमाकांत मिश्रा ने बताया मंगलवार को आरटी-पीसीआर सैंपल के 12 और एंटीजन से 4 लोगों पॉजिटिव हुए है। जबकि आरटी पीसीआर के 30 और एंटीजन से 20 सैंपल लिए गए। एक्टिव केस की संख्या बढ़कर 101 और लंबित सैंपल 207 हैं। वहीं कोविड केयर सेंटर में सुविधा मुहैया कराने के लिए पत्र प्रेषित किया है। इसमें दो मेडिकल ऑफिसर, 6 स्टाफ नर्स और 2 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की मांग रखी है।
स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्था को लेकर सांसद राव उदयप्रताप सिंह दौरा किया। जांच उपकरण, वैक्सीनेशन आदि सुविधाओं का जायजा लिया। तहसीलदार राजीव कहार ने बताया कि हमने कोविड केयर सेंटर तैयार कर लिया है। तहसील में कंट्रोल रूम बनाकर संक्रमितों की जानकारी ले रहे हैं। कंटेनमेंट जोन के लिए हम नगर परिषद को सूची भेजते हैं। गड़बड़ी हो रही है तो व्यवस्था दुरुस्त करता हूं।