खंडवा कोविड अस्पताल का मैनेजमेंट फेल: कत्लखाना, भूलभुलैया जैसे नामकरण के बाद भी नहीं सुधरा सिस्टम; फिर अफसरों ने सुनी खरी-खोटी, 15 से ज्यादा मौतें, मीडिया कवरेज पर रोक

खंडवा कोविड अस्पताल का मैनेजमेंट फेल: कत्लखाना, भूलभुलैया जैसे नामकरण के बाद भी नहीं सुधरा सिस्टम; फिर अफसरों ने सुनी खरी-खोटी, 15 से ज्यादा मौतें, मीडिया कवरेज पर रोक


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खंडवाएक घंटा पहले

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यह पांच मंजिला इमारत खंडवा के कोविड अस्पताल की हैं।

कोरोना संक्रमण के दूसरे चरण में कत्लखाना, भूलभुलैया जैसे नाम पाने वाले खंडवा के कोविड अस्पताल में मौतों का सिलसिला जारी हैं। व्यवस्थाएं सुधरना तो दूर की बात अस्पताल का फेल मैंनेजमेंट खुद की लापरवाही से हुई मौतों के आंकड़े छुपा रहा हैं। दूसरी तरफ श्मशानों में चिताएं नहीं बुझ पा रही हैं। शुक्रवार को 33 लाशें कोविड अस्पताल से श्मशानों व कब्रिस्तान में पहुंची थी, शनिवार भी यह आंकड़ा 15 से ज्यादा का रहा हैं। वहीं खास बात यह है कि अस्पताल प्रबंधन ने अब सच्चाई सामने ला रहे मीडियाकर्मियों का प्रवेश भी प्रतिबंधित कर दिया है।

जानिए; हत्या, कत्लखाना, भूलभुलैया जैसे नामकरण इसलिए…

– केस 1 : मृतक के परिजन ने सुनाई खरी-खोटी
राशन दुकान संचालक राजू परदेसी निवासी कुंडेश्वर वार्ड की शनिवार सुबह कोरोना वार्ड में मौत हो गई। उन्हें कल ही भर्ती किया था रिपोर्ट भी नेगेटिव थी। मौत की खबर मिलते ही परिजन अस्पताल पहुंचे तो उनके शव तक परिजन को जाने नहीं दिया। छोटे भाई मनीष परदेसी, बेटी मुस्कान और पत्नी की सिर्फ यह मांग थी कि एक बार चेहरा देख लेने दो। आखिर में सीएसपी व एसडीएम को खरी-खोटी सुननी पड़ी।
– केस 2 : मां को भर्ती करने के 2 घंटे बाद मौत
शनिवार को दोपहर 2 बजे घबराहट होने पर मां को अस्पताल लाया, भर्ती किया था कि दो घंटे बाद मौत की सूचना आ गई। अच्छा होता कि इस कत्लखानें की बजाय किसी निजी अस्पताल में ले जाता। छनेरा-हरसूद निवासी युवक ने बताया कि मां बसुबाई (48) की दो घंटे बाद 4 बजे डेथ हो गई। ऐसे अस्पताल को कत्लखाना नहीं कहें तो क्या कहें।
– केस 3 : 2 घंटे तक नहीं ढूंढ़ पाए महिला का शव
भूलभुलैया अस्पताल की कहानी बयां करता यह मामला ऐसा कि अपने रिश्तेदार की मौत की खबर मिलने के अस्पताल पहुंचे परिजन को 2 घंटे तक शव का पता नहीं चल पाया। सिंधी कॉलोनी निवासी आकाश कोटवानी ने बताया उनकी बुआ रेखा खुराना (65) निवासी हैदराबाद पिछने 6 दिन से भर्ती थी। शनिवार को उनकी मौत हो गई। 2 घंटे अस्पताल वाले शव नहीं ढूंढ़ पाएं।
हमारी व्यवस्थाओं में परेशानी आ रही थी
मीडिया के दखल से अस्पताल परिसर में न्यूसेंस जैसी स्थिति बन गई थी। ऐसी स्थिति में हमारी व्यवस्थाओं में परेशानी आ रही थी। उच्च अधिकारियों के निर्देश पर मीडियाकर्मियों को रोका गया है। – अनंत पंवार, डीन, मेडिकल कॉलेज खंडवा

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