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- The Hospital Has To Send The Request For Remeddivir, But They Are Handing Over The Form To The Patients
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भोपालकुछ ही क्षण पहलेलेखक: भीम सिंह मीणा
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संतोष रघुवंशी।
- व्यवस्था बदलने के बाद भी अस्पताल नहीं कर रहे पालन, नतीजा…परिजन हो रहे परेशान
निजी अस्पताल में भर्ती 42 वर्षीय संतोष रघुवंशी के बेटे राम रघुवंशी दो दिन से रेमडेसिविर के लिए भटक रहे हैं। प्रशासन को रिक्वेस्ट भेजने की बजाय अस्पताल प्रबंधन ने इन्हें पर्चा थमा दिया है। संतोष जैसे अनेक मरीज हैं, जिनके परिजन ऐसी परेशानियां झेल रहे हैं। राम का कहना है कि वे कलेक्टोरेट से लेकर सीएमएचओ दफ्तर तक चक्कर लगा चुके हैं, लेकिन उन्हें यह पता नहीं चल रहा है कि रेमडेसिविर मिलेगा कहां?
अफसर कहते हैं कि व्यवस्था बदल चुकी है। अब मरीजों को रेमडेसिविर के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। अस्पताल अपने यहां एडमिट मरीजों की सूची तय फाॅर्मेट में भरकर भेजेंगे। समस्या इसलिए भी है कि भोपाल में अस्पतालों की तरफ से भेजी जाने वाली लिस्ट और उन्हें सप्लाई किए जाने वाले इंजेक्शनों की संख्या गोपनीय रखी जा रही है। इंदौर में रेमडेसििवर के आवेदन और बांटे जाने वाले इंजेक्शन की सूची जनता के बीच शेयर की जाती है।
यह हाल है भोपाल का
राजधानी में करीब 100 से अधिक अस्पतालों में 5000 कोविड मरीजों का इलाज चल रहा है। इनमें 60 फीसदी से अधिक मरीजों को डॉक्टर खुद रेमडेसिविर इंजेक्शन लगवाने के लिए दे रहे हैं। रोजाना 5 हजार इंजेक्शन की जरूरत शहर को है, लेकिन अभी करीब 2 हजार इंजेक्शन ही आ रहे हैं। इनकी भी सूची सार्वजनिक नहीं हो रही है। बार-बार वितरण व्यवस्था भी बदल रही है। पहले जिला प्रशासन की तरफ से एक अधिकारी को नियुक्त किया था, जो सिफारिश करते तो इंजेक्शन मिल जाता था। इसके लिए सेकंड स्टॉप स्थित मालवीय भवन, फिर सात नंबर स्टॉप पर एक स्कूल तय किया गया। जानकारी के अभाव में अब भी लोग यहां पहुंच रहे हैं।
मेडिकल स्टोर्स पर लगीं मरीजों की कतारें।
उलझन… रेमडेसिविर के बाद tociliZumab इंजेक्शन की डिमांड है। इसके लिए भोपाल में दो तरह के फार्मेट चलन में है। एक फार्मेट स्वास्थ्य विभाग ने 28 अप्रैल को जारी किया था। इसमें पेशेंट का नाम, बीमारी, उम्र, जिला और पता लिखकर देना है।
(सीधी बात; अविनाश लवानिया, कलेक्टर भोपाल)
रेमडेसिविर इंजेक्शन को लेकर क्या व्यवस्था है?
जहां मरीज भर्ती है, उस अस्पताल की तरफ से फार्मेट भरकर शासन को भेजा जाएगा। इसके बाद सीधे अस्पताल को सप्लाई होगा।
कोई ऐसा नहीं करता है?
तो यह गलत है, क्योंकि अब मरीज को इंजेक्शन के लिए भटकने की जरूरत नहीं है।
इंजेक्शन वितरण की सूची को लेकर भ्रम है।
हम लिस्ट बनाते हैं। मैं इसे पब्लिक डोमेन में शेयर करने के लिए कहूंगा।