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- Couldn’t Even Give Up The Stretcher After Death, The Hospital Management Took His Corpse To Ambulance, His Father Said, If He Had Got Oxygen, Today, His Son Would Be Alive.
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मुरैनाएक मिनट पहले
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हाथ ठेले पर कल्लू की लाश रखकर एम्बूलेंस तक ले जाते उसके परिजन
- जिला अस्पताल में बदइंतजामी चरम पर, मर रहे मरीज, न ऑक्सीजन, न खाना और मरने के बाद स्ट्रेचर तक नहीं
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मुरैना। कल्लू को उसके पिता रविवार की रात जिला अस्पताल में लेकर आए। वह सख्त बीमार था। उसे आक्सीजन की जरूरत थी। लेकिन डॉक्टर उसे ऑक्सीजन नहीं दे सके, जिससे तड़प-तड़प कर उसकी मौत हो गई। सुबह, परिजन अपने बेटे को देखकर फफक-फफक कर रो पड़े। अस्पताल वाले बोले लाश ले जाओ। लाश एम्बूलेंस तक ले जाने के िलए अस्पताल में स्ट्रेचर तक नहीं था। मजबूरन कल्लू के पिता ने एक हाथ ठेले वाले को बुलाया, उससे कहा कि उसके बेटे की लाश को एम्बूलेंस तक ले जाना है। ठेले वाला आया, ठेला मेडीकल वार्ड में ले गया, वहां उसके परिजनों ने कल्लू की लाश को ठेले पर रखा। तब कहीं जाकर लाश एम्बूलेंस तक जा सकी। यह दिल-दहलाने वाला, बदइंतजामी का जीता-जागता नजारा सोमवार को जिला अस्पताल में देखा गया। जिसने भी देखा अस्पताल प्रबंधन को जमकर कोसा।
कल्लू पुत्र रामबहादुर, उम्र 27 वर्ष, निवासी देवी सिंह का पुरा, को रात में जिला अस्पताल लाया गया था। उसकी हालत गंभीर थी। उसे मेडीकल वार्ड में भर्ती किया गया था। उसे ऑक्सीजन की सख्त जरूरत थी। लेकिन उसे क्या मालूम था कि यहां कोविड वालों को ऑक्सीजन नहीं मिल रही है, तो उसे कहां से मिलती। उसके माता-पिता ने डॉक्टरों से ऑक्सीजन देने की बहुत मिन्नतें की लेकिन, उनका दिल नहीं पसीजा, ऑक्सीजन के अभाव में कल्लू काफी देर तक तड़पता रहा। बाद में शांत हो गया। डॉक्टरों ने उसके पिता से कहा कि उनका बेटा, अब इस दुनियां में नहीं है। सुबह हुई, उसके पिता रामबहादुर अपने बेटे की लाश एम्बूलेंस तक ले जाने के लिए स्ट्रेचर तलाशते घूमे, लेकिन उन्हें पूरे अस्पताल में स्ट्रेचर नहीं मिला। अन्त में वे व उनका दूसरा पुत्र अस्पताल के पास में ही मौजूद नेहरू पार्क गए। वहां से एक ठेलेवाले को लेकर आ गए। ठेले को मेडीकल वार्ड में ले जाया गया। वहां कल्लू की लाश को उस पर रखा और एम्बुलेंस तक ले गए।
खाना तक नहीं मिल रहा कोविड वार्ड में
अस्पताल के कोिवड वार्ड में भर्ती मरीज विनोद शर्मा ने बताया कि उन्हें कल से खाना नहीं मिला है। जब, कि अन्य वार्डों में कई लोगों के लिए स्पेशल थाली बनकर आ रही है। अगर कोई मरीज यह कहता है क उसे खाना नहीं मिला है, तो उससे कहा जाता है िक घर से बर्तन लेकर आओ।
वार्ड के अन्दर हाथ ठेले पर कल्लू की लाश ले जाते परिजन
ऑक्सीजन प्लान्ट, फिर भी नहीं ऑक्सीजन
अस्पताल के ठीक पीछे ऑक्सीजन प्लान्ट लगा है, लेकिन उसके बावजूद अस्पताल में लोग बिना ऑक्सीजन के मर रहे हैं। सरकार मरीजों के खाने के लिए पूरा बजट दे रही है, उसके बावजूूद मरीजों को खाना नहीं मिल रहा है। इस बदइंतजामी व लापरवाही ने मरीजों का जीवन नारकीय बना दिया है।
रात से मरीजों को कम मिल रही थी ऑक्सीजन
रात से ही मरीजों को ऑक्सीजन कम मिल रही थी। ऑक्सीजन का फ्लो कम होने पर मरीजों में अफरा-तफरी मच गई। सुबह आरएमओ डॉ. धर्मेन्द्र गुप्ता, ठेकेदार को लेकर इसकी जांच करने पहुंचे तथा ऑक्सीजन की नलियों को चेक किया।
कम सिलेण्डर भरने पर मर रहे मरीज
मरीजों के परिजन ऑक्सीजन प्लान्ट पर जब खाली सिलेण्डर लेकर पहुंचते हैं, तो उन्हें बहुत कम भरा जाता है। कारण,उनके पास सिलेण्डर में मौजूद ऑक्सीजन नापने की मशीन नहीं है। परिजन समझते हैं कि सिलेण्डर पूरा भरा है, जबकि उसमें बहुत कम ऑक्सीजन होती है। लिहाजा रात में सिलेण्डर खाली हो जाता है, जिससे मरीज की मौत हो जाती है।
ठेकेदार के साथ ऑक्सीजन चेक करते डॉ. धर्मेन्द्र गुप्ता( आरएमओ)
ऑक्सीजन नहीं दी डॉक्टरों ने
कल्लू मेडीकल वार्ड में भर्ती था। उसे ऑक्सीजन की सख्त जरूरत थी। कल्लू का स्वयं मेरे पास फोन आया था। उसने कहा था कि मुझे ऑक्सीजन की बहुत जरूरत है, मेरा ऑक्सीजन लेवल 70 तक नीचे गिर गया है, लेकिन नहीं मिल रही है। इस पर मैने उससे कहा कि, वो अपने किसी परिजन को मेडीकाल वार्ड की प्रभारी के पास भेजे। वहां उससे वह एक फार्म भरवाएंंगी तो उसका सिलेण्डर भर जाएगा। बाद में कल्लू का फोन आया था, कि उन्होंने फार्म भरने से इंकार कर दिया है। बाद में पता चला कि कल्लू की मौत हो गई। अगर जिला अस्पताल प्रबंधन उसे ऑक्सीजन उपलब्ध करा देता तो उस 27 वर्ष के नवयुवक की जान बच सकती थी।
अरुण परमार, समासेवी व भाजपा नेता
कहते हैं सीएमएचओ….
अगर कल्लू के परिजनों को ऑक्सीजन नहीं मिली थी, तो वे सिविल सर्जन या मुझसे बात करते। ऑक्सीजन पर्याप्त है। मेरी जानकारी में यह मामला नहीं है, मैं मामले की जानकारी लेकर कार्यवाही करूंगा। जहां तक खाना का सवाल है, मैं दिखवाता हूं कि किस मरीज को खाना नहीं मिल रहा है।
डॉ. एडी शर्मा, सीएमएचओ, मुरैना