किसानों के सच्चे दोस्त होते हैं ये सांप, इन्हें मार दिया तो फसल का नुकसान तय, जानिए ऐसा क्यों

किसानों के सच्चे दोस्त होते हैं ये सांप, इन्हें मार दिया तो फसल का नुकसान तय, जानिए ऐसा क्यों


जब भी ‘सांप’ शब्द आता है, हमारे ज़ेहन में एक ही तस्वीर उभरती है डर और ज़हर! लेकिन क्या आप जानते हैं कि कुछ सांप किसानों के सबसे बड़े रक्षक होते हैं? खासकर मध्यप्रदेश के खेतों में पाए जाने वाले सांप, जिनमें से ज़्यादातर बिलकुल भी जहरीले नहीं होते, किसानों की फसलों को चूहों और कीटों से बचाते हैं. यही कारण है कि विशेषज्ञ इन्हें प्राकृतिक कीटनाशक तक मानते हैं.

सांपों के बिना खेतों में बढ़ सकता है नुकसान
किसानों के खेतों में सबसे बड़ा खतरा होते हैं चूहे और कीट-पतंगे, जो बीज खाते हैं, जड़ें नष्ट करते हैं और भंडारित अनाज को भी खराब करते हैं. सांप, खासकर धामन (Rat Snake), इन चूहों को तेजी से खत्म करते हैं. एक सांप औसतन एक रात में 2–4 चूहों को खत्म कर देता है.

हर सांप नहीं होता जहरीला
भारत में पाए जाने वाले 270 में से केवल 50 प्रजातियां ही जहरीली होती हैं. खेतों में आमतौर पर पाए जाने वाले सांप जैसे धामन, रेसिंग स्नेक और पाइथन बिल्कुल हानिरहित होते हैं और केवल कीड़े-मकोड़े, चूहे, गिरगिट जैसे जीवों का शिकार करते हैं.

एक्सपर्ट क्या कहते हैं?
वन्यजीव और कृषि विशेषज्ञ बताते हैं कि खेतों में सांपों की मौजूदगी प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी है. बायो-कंट्रोल सिस्टम के तहत कई देशों में खेतों में जानबूझकर सांपों को छोड़ा जाता है ताकि रासायनिक कीटनाशकों की जरूरत न पड़े.

जैविक खेती के लिए वरदान हैं ये सांप
सांप न केवल बिना खर्च के कीट नियंत्रण करते हैं, बल्कि खेत की उर्वरता भी बनाए रखते हैं. ना दवाइयों की जरूरत, ना केमिकल सिर्फ एक प्राकृतिक प्रणाली जो खेती को दीर्घकालिक रूप से स्वस्थ बनाए रखती है.

सांप दिखे तो मारें नहीं, वन विभाग को सूचित करें
जानकारी के अभाव में किसान इन मित्र सांपों को भी मार देते हैं. एक्सपर्ट्स की सलाह है कि अगर कोई सांप खेत में दिखे खासकर अगर वह जहरीला लग रहा हो तो तुरंत वन विभाग या स्नेक रेस्क्यू टीम को सूचित करें.

खेती में प्रकृति की भूमिका सबसे अहम है और सांप इस संतुलन का जरूरी हिस्सा हैं. अगर किसान इन मित्र प्रजातियों को बचाएंगे, तो फसलें सुरक्षित रहेंगी, और पर्यावरण भी. यही है सच्चा जैविक समाधान, और यही है प्राकृतिक खेती की शक्ति.

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