पाइन बाग की वीरानगी और खामोशी को ताप्ती की लहरों की आवाज तोड़ रही है। ये वही पाइन बाग है, जहां 394 साल पहले मुमताज का शव 6 माह रखा गया था। यहां भले ही मुमताज का शव नहीं है, लेकिन इसे आज भी उनकी कब्र ही माना जाता है। दूसरे किनारे पर वह शाही किला है, ज
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बुरहानपुर से लगभग लगे घोसीवाड़ा, बलवाड़ टेकरी गांव के बाद पाइन बाग है। 17 जून 1631 में मुमताज की शाही किले में मौत हुई थी। इसके बाद पाइन बाग में उनके शव को दफनाया गया था। इतिहासकार मोहम्मद नौशाद बताते हैं बुरहानपुर से मुमताज का शव उनका बेटा शाहशुजा आगरा ले गया था।
मुमताज की आखिरी संतान गौहर आरा की परवरिश शाहजहां की बहू बेगम बिलकिश जहां ने की। इतिहासकार कमरूद्दीन फलक के अनुसार आगरा में ताजमहल जिस जमीन पर बना है, वह आमेर के राजा जयसिंह की जमीन थी। उस जमीन के बदले उन्हें बुरहानपुर में जमीन दी गई। यहां आज उनके नाम से ही जयसिंह पुरा गांव बसा है।