बचपन से मैथ्स था पसंद, इंजीनियरिंग की लेकिन फिर चुना सिविल सेवा का रास्ता, जानें छतरपुर कलेक्टर पार्थ जैसवाल की कहानी 

बचपन से मैथ्स था पसंद, इंजीनियरिंग की लेकिन फिर चुना सिविल सेवा का रास्ता, जानें छतरपुर कलेक्टर पार्थ जैसवाल की कहानी 


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Chhatarpur DM Parth Jaiswal Success Story. हाल ही में म.प्र. पर्यटन बोर्ड द्वारा भोपाल में अयोजित ग्रामीण रंग-पर्यटन संग कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव द्वारा छतरपुर कलेक्टर पार्थ जैसवाल को अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है. जानते हैं छतरपुर कलेक्टर पार्थ जैसवाल की प्रेरणादायक कहानी .

मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले के कलेक्टर पार्थ जैसवाल, जो राजस्थान के एक छोटे से शहर बांदीकुई से आते हैं. इनकी स्कूली शिक्षा अलवर और जयपुर से हुई है. इन्होंने 2013 में IIT दिल्ली से कंप्यूटर साइंस में इंजीनियरिंग पूरी की. इनके पिता एक केमिस्ट के रूप में काम करते हैं और माँ एक गृहिणी हैं.

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भले ही इनका बचपन मध्यमवर्गीय परिवार में बीता है लेकिन सपने इनके बड़े थे. बचपन से ही इनके घर में सिविल सेवा के लिए अनुकूल माहौल रहा है.  माता-पिता ने हमेशा स्नातक पूरा करने के बाद करियर में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया.

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पार्थ जो गणित के होनहार छात्र रहे हैं. इन्हें बचपन से गणित विषय से लगाव रहा है. गणित विषय में रुचि होने से इन्होंने इंजीनियरिंग को चुना. लेकिन लाखों की नौकरी छोड़ यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी में जुट गए और पहले ही प्रयास में ऑल इंडिया 299 रैंक पाई.

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साथ ही इंडियन फॉरेस्ट सर्विस में ऑल इंडिया 5 वीं रैंक मिली. उन्हें मध्य प्रदेश कैडर अलॉट हुआ. पार्थ ने यूपीएससी सिविल सर्विसेज परीक्षा में वैकल्पिक विषय के तौर पर गणित विषय को चुना था. क्योंकि गणित विषय बचपन से ही उनका पसंदीदा विषय रहा है.

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पार्थ का व्यक्तित्व केवल किताबों और देश के तक सीमित नहीं है. वे उत्साही खेल प्रेमी हैं और मानते हैं कि स्वस्थ जीवन के लिए खेल जरूरी है. स्क्वैश और वॉलीबॉल उनके पसंदीदा खेल हैं. साथ ही हर मंगलवार को जनसुनवाई भी सुनते हैं. आईएएस बनने के बाद पार्थ ने ग्रामीण, विकास, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों को अपनी प्राथमिकता बनाया.

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वे समय-समय पर सरकारी स्कूलों में पढ़ाने भी पहुंच जाते हैं. बता दें, छतरपुर जिले में सबसे बड़ी लाइब्रेरी बनने से कलेक्टर पार्थ जैसवाल बेहद खुश हैं. उनका मानना है कि इस लाइब्रेरी से हजारों बच्चों को पढ़ने का मौका मिलेगा.

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छतरपुर कलेक्टर से पहले वे श्योपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी में जिला पंचायत सीईओ रह चुके हैं. उन्होंने आईएएस बनने के बाद सबसे पहले असिस्टेंट कलेक्टर बालाघाट ज्वाइन किया था. वे उमरिया और शाहजहांपुर जिले में एसडीओ के पद पर भी कार्यरत रहे हैं.

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हाल ही में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उन्हें पुरस्कार से सम्मानित किया है. म.प्र. पर्यटन बोर्ड द्वारा भोपाल में अयोजित ग्रामीण रंग-पर्यटन संग कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ यादव द्वारा छतरपुर कलेक्टर पार्थ जैसवाल को अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है.यह पुरस्कार ग्रामीण पर्यटन परियोजना के सफल क्रियान्वयन के लिए किए गए उत्कर्ष कार्य, समर्पित समर्थन और सक्रिय भागीदारी के लिए दिया जाता है.

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बचपन से मैथ्स था पसंद, इंजीनियरिंग की लेकिन फिर चुना सिविल सेवा का रास्ता



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