कांवड़ यात्रा कब से शुरू, कितने हैं सोमवार? उज्जैन के आचार्य से जानें हर जवाब

कांवड़ यात्रा कब से शुरू, कितने हैं सोमवार? उज्जैन के आचार्य से जानें हर जवाब


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Ujjain News: इस साल कांवड़ यात्रा (Kawad Yatra 2025) 11 जुलाई से शुरू होगी. यात्रा 13 दिनों की रहेगी. सावन माह में कांवड़ यात्रा का विशेष महत्व है. भोलेनाथ के भक्तों के लिए यह एक महत्वपूर्ण धार्मिक यात्रा मानी …और पढ़ें

उज्जैन. हिंदू धर्म में सावन का महीना बहुत ही खास महत्व रखता है. इस महीने को भगवान शिव की आराधना का महीना माना जाता है. खासकर शिवभक्तों के लिए यह समय बेहद शुभ होता है. मान्यता है कि सावन में भोलेनाथ की पूजा-अर्चना करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है. कुंवारी कन्याएं भी मनचाहे वर की प्राप्ति के लिए इस महीने सोमवार का व्रत करती हैं. ऐसे में कई लोग भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए कई जतन करते हैं, जिसमें कांवड़ यात्रा भी शामिल है. यह पवित्र यात्राओं में से एक है. आइए जानते हैं उज्जैन के आचार्य आनंद भारद्वाज से कि इस बार सावन में कांवड़ यात्रा कब से शुरू हो रही है.

आचार्य आनंद भारद्वाज ने लोकल 18 से बात करते हुए कहा कि भगवान शिव की पवित्र यात्रा, जिसे कांवड़ यात्रा कहा जाता है, की शुरुआत सावन माह के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा ति​थि से होती है. इस साल 2025 में कांवड़ यात्रा 11 जुलाई दिन शुक्रवार से शुरू होगी. सावन मास में चार सोमवार पड़ेंगे. कांवड़ यात्रा सावन मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू होकर कृष्ण चतुर्दशी तक यानी सावन शिवरात्रि तक चलती है. इस साल की कांवड़ यात्रा 13 दिनों की रहेगी. कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को शिवरात्रि होती है, तो इसलिए कृष्ण पक्ष को भगवान शिव के जलाभिषेक के लिए अच्छा माना जाता है. वैसे तो आप पूरे सावन माह में शिवलिंग का जलाभिषेक करके पुण्य लाभ अर्जित कर सकते हैं.

कांवड़ यात्रा का विशेष महत्व
उन्होंने कहा कि सावन के माह में कांवड़ यात्रा का विशेष महत्व होता है. कांवड़ यात्रा को भगवान शिव के भक्तों के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक यात्रा माना जाता है. भक्त पवित्र नदियों से जल भरकर शिव मंदिरों के शिवलिंग पर चढ़ाते हैं. इस यात्रा की शुरूआत सावन माह की शुरूआत के साथ ही हो जाती है. यात्रा के दौरान भोलेनाथ के भक्त नंगे पैर पैदल चलकर तीर्थ स्थान पर कांवड़ लेकर जाते हैं और कांवड़ में पवित्र जल भरकर लाते हैं.

क्यों की जाती है कांवड़ यात्रा?
कांवड़ यात्रा क्यों की जाती है, इस बारे में बताते हुए आचार्य आनंद भारद्वाज ने कहा कि मान्यता है कि जब समुद्र मंथन के दौरान विषपान करने से भगवान शिव का कंठ नीला पड़ गया था, तब उसके प्रभाव को कम करने के लिए शिवलिंग पर जलाभिषेक किया गया. इसी तरह शिवलिंग पर जलाभिषेक से प्रसन्न होकर भोलेनाथ भक्‍तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं.

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है. किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है. ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है. बताई गई किसी भी बात का Local-18 व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है.



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