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Damoh Misson Hospital Case: दमोह के मिशन अस्पताल में हुई सात मरीजों की मौत के मामले में मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट आ गई है. इस मामले में आरोपी डॉक्टर फर्जी निकला, जानें माजरा…
प्रतीकात्मक.
हाइलाइट्स
- दमोह मिशन अस्पताल में 7 मरीजों की मौत का मामला
- फर्जी डॉक्टर एन. जॉन केम की पहचान हुई
- मृतकों के परिजनों को ₹10 लाख मुआवजा देने की सिफारिश
रिपोर्ट में अस्पताल में संचालित कैथलैब की अनुमति देने वाले डॉ. दुबे की भूमिका की भी जांच के आदेश दिए गए हैं. साथ ही, आयुष्मान भारत योजना के तहत मरीजों से की गई अवैध वसूली और फर्जी बिलिंग की भी जांच रिपोर्ट में पुष्टि की गई है. आयोग ने दमोह के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) को विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं.
मानवाधिकार आयोग ने मृतकों के परिजनों को ₹10-10 लाख मुआवजा देने की सिफारिश की है, जिसकी वसूली अस्पताल प्रबंधन और आरोपी डॉक्टरों से करने की अनुमति प्रदेश सरकार को दी गई है. इसके अलावा, पुलिस विभाग की लापरवाही को गंभीर मानते हुए डीजीपी को दोषी पुलिसकर्मियों पर विभागीय कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं.
जब तक जांच पूरी नहीं जो जाती…
EOW (आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ) को अस्पताल में विदेशी फंडिंग, सरकारी फंड के दुरुपयोग और आयुष्मान योजना में फर्जीवाड़े की विस्तृत जांच सौंपी गई है. आयोग ने सभी आरोपियों चिकित्सकों, अस्पताल प्रबंधन व मिशन अस्पताल के खिलाफ अलग-अलग FIR दर्ज करने की सिफारिश की है. साथ ही, जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक अस्पताल का लाइसेंस सस्पेंड रखने के निर्देश भी दिए गए हैं.
अस्पताल पर गंभीर आरोप लगे थे. एक कार्डियोलॉजिस्ट जिनका नाम डॉ. एन जोन केम है, इस नाम के फेमस कार्डियोलॉजिस्ट प्रोफेसर लंदन में हैं. शिकायत में कहा गया कि इस शख्स ने ब्रिटेन के फेमस डॉक्टर के नाम के फर्जी दस्तावेज बताकर मिशन अस्पताल में नौकरी कर ली. फिर बिना किसी अनुभव के ऑपरेशन किया और इसी वजह से 7 मौतें हो गईं. मालूम चला कि ये शख्स असल में नरेंद्र विक्रमादित्य यादव है. इसके दस्तावेज में डॉक्टर होने की पुष्टि भी नहीं हुई.