इंदौर के इंडेक्स मेडिकल कॉलेज में हाईटेक फर्जीवाड़ा: बाॅयोमैट्रिक अटेंडेंस में AI की मदद से फर्जी थम्ब इम्प्रेशन का किया यूज, रेगुलर बता दी फैकल्टीज की उपस्थिति – Indore News

इंदौर के इंडेक्स मेडिकल कॉलेज में हाईटेक फर्जीवाड़ा:  बाॅयोमैट्रिक अटेंडेंस में AI की मदद से फर्जी थम्ब इम्प्रेशन का किया यूज, रेगुलर बता दी फैकल्टीज की उपस्थिति – Indore News


रिश्वत लेकर मेडिकल कॉलेजों को मान्यता दिलाने के मामले में सीबीआई ने इंदौर के इंडेक्स मेडिकल कॉलेज के चेयरमैन सुरेश भदौरिया और यूजीसी के पूर्व चेयरमैन व देवी अहिल्या विवि के पूर्व कुलपति डीपी सिंह को आरोपी बनाया है। जांच में अब कई गड़बड़ियां सामने आई है

.

पता चला है कि फर्जी तरीके से कॉलेजों को मान्यता दिलाने और रिन्यू कराने में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का मिसयूज किया गया है। दरअसल, मान्यता के पैरामीटर्स पूरा करने के लिए फैकल्टीज की नियमित उपस्थिति जरूरी है। ऐसे में इंस्पेक्शन के पूर्व फर्जी तरीके से फैकल्टीज दर्शाई गई।

इसके लिए बायोमेट्रिक अटेंडेंस लगाने के लिए एआई से फर्जी थंब इम्प्रेशन तैयार किए गए। इसके बाद फैकल्टीज की नियमित उपस्थिति दिखाई गई। सीबीआई की जांच में यह बिंदु प्रमुखता से है। इसमें भदौरिया की लिप्तता के सूत्र मिले हैं।

सीबीआई की जांच में इंडेक्स मेडिकल कॉलेज में कई गड़बड़ियां सामने आई हैं।

कब इंस्पेक्शन होगा, सूचना पहले ही मिल जाती थी जांच में पता चला है कि सुरेश भदौरिया के भारत सरकार के एक बड़े अधिकारी से गहरे संबंध हैं। उनके जरिए उन्हें इंस्पेक्शन कब होने वाला है, इसकी जानकारी मिल जाती थी। ऐसे में फर्जीवाड़ा की तैयारी पहले ही कर ली जाती थी। कॉलेजों में फर्जी फैकल्टीज, फर्जी मरीजों को रिकॉर्ड पर दर्शाने जैसी गड़बड़ियां भी हुई हैं।

डीपी सिंह ​​​​​​के डायरेक्टर रहते ​यूजीसी में भी भ्रष्टाचार भदौरिया पर आरोप है कि वे कॉलेजों के चेयरमैन और डायरेक्टर से तगड़ी राशि लेकर अनुकूल मान्यता दिलवाते थे। फिर भले ही पैरामीटर्स पूरे नहीं हो। केस में लिप्त देवी अहिल्या विवि के पूर्व कुलपति डीपी सिंह पर भी सीबीआई ने शिकंजा कसा है। डीपी सिंह सागर और बनारस यूनिवर्सिटी के भी वाइस चांसलर रह चुके हैं। साथ ही नेशनल असेसमेंट एंड एक्रिडेशन काउंसिल के डायरेक्टर भी रहे हैं।

डीपी सिंह 2018 से 2021 के बीच यूजीसी के चेयरमैन रहे। उप्र सरकार में एजुकेशन एडवाइजर रहे। सूत्र मिले हैं कि उनके डायरेक्टर रहते यूजीसी में भी भ्रष्टाचार हुआ जिसका सीधा फायदा कॉलेजों को मिला।

इंस्पेक्शन की तारीख के लिए तगड़ी राशि का लेन-देन रावतपुरा इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च के चेयरमैन और स्वयंभू संत रविशंकर महाराज उर्फ ‘रावतपुरा सरकार’ को भी इंस्पेक्शन की तारीख और अधिकारियों की जानकारी अपने खास सोर्स के माध्यम से पहले ही पता चल जाती थी। इससे फर्जीवाड़ा आसान होता गया। हालांकि इंस्पेक्शन की तारीख के लिए तगड़ी राशि के लेन-देन होते थे।

इस लेन-देन का रूप अलग होता था। यानी किसी भी बड़े धार्मिक और सोशल काम के माध्यम से किया जाता था। हवाला की राशि भी जांच के घेरे में है। पता चला है कि रावतपुरा सरकार और भदौरिया के बीच मजबूत लिंक थी।

इसमें मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (MCI), राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) के कुछ कथित लोगों, कॉलेजों और एजेंटों की मिलीभगत रहती थी। इंस्पेक्शन के दौरान प्रॉक्सी फैकल्टीज और पेशेंट्स की मौजूदगी दिखाई जाती थी।

यह खबर भी पढ़ें.. हनुमान मंदिर से यूनिवर्सिटी तक रावतपुरा सरकार का रहस्यमय सफर

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने हाल ही में छत्तीसगढ़ के श्री रावतपुरा सरकार मेडिकल कॉलेज (SRIMSR) के पक्ष में रिपोर्ट बनाने के मामले में 3 डॉक्टर्स समेत 6 लोगों को गिरफ्तार किया है। इन लोगों पर कॉलेज प्रबंधन से 55 लाख रुपए की रिश्वत लेने का आरोप हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें…



Source link