कोलकाता. इंग्लैंड के खिलाफ दूसरे टेस्ट की जीत के हीरो आकाश दीप के क्रिकेटर बनने में उनकी बहन अखंड ज्योति का बड़ा योगदान रहा है, जो खुद अब कोलोन कैंसर के तीसरे स्टेज से जूझ रही हैं. आकाश दीप ने इस मैच में 10 विकेट झटके और भारत को जीत दिलाई. भारत ने इस जीत के बाद सीरीज में 1-1 से बराबरी कर ली है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि आकाश दीप ने 2015 में छह महीने के अंतराल में पिता रामजी सिंह और बड़े भाई को खो दिया था. तब उनके क्रिकेट करियर पर संकट छा गया था. निराशा के उन दिनों में अखंड ज्योति ने अपने सबसे छोटे भाई के सपने को पूरा करने के लिए लगातार प्रेरित किया. तब उनकी बहन ने कहा था, ‘इसी फील्ड में आगे बढ़ो.’
बहन अखंड ज्योति के उस भरोसे से अब तक आकाश दीप ने लंबा सफर तय किया है. आकाश दीप ने रविवार को मैच के बाद अपने प्रदर्शन को बहन को समर्पित किया. अखंड ज्योति 14 मई को कोलन कैंसर की सर्जरी करवाने के बाद अब कीमोथेरेपी पर हैं. ज्योति के पति नितेश कुमार सिंह सेना से रिटायर्ड हैं और अब बैंक में काम कर रहे हैं. उन्होंने बताया, ‘यह पूरे परिवार के लिए गर्व की बात है. पिता की मृत्यु के बाद आकाश दिल्ली में क्लब क्रिकेट खेल रहे थे, लेकिन उन्हें वह सफलता नहीं मिल रही थी . यह ज्योति ही थीं जिन्होंने उनसे कहा, ‘इसे गंभीरता से लो. अगर जरूरत पड़े तो कहीं और जाओ और इस सपने को पूरा करो.’
नितेश कुमार सिंह ने कहा, ‘हमारे पास जो था, उसी से हम गुजर-बसर करते रहे. आकाश हमेशा अपनी उम्र से कहीं ज्यादा परिपक्व था.’ उन्होंने कहा कि ज्योति, आकाश दीप से 10 साल बड़ी है. पिता तथा भाई की मौत के बाद आकाश का अपनी बहन के साथ रिश्ता और भी गहरा हो गया. नितेश ने कहा, ‘वे सब कुछ साझा करते हैं. बात चाहे कोई फैसला लेने की हो, चुटकुले हो या भरोसा बढ़ाने की बात हो. वे हमेशा एक-दूसरे को आगे बढ़ाने में मदद करते हैं.’
कीमोथेरेपी के दौरान भी अखंड ज्योति ने सुनिश्चित किया कि उसका भाई खेल पर ध्यान केंद्रित रखे. इंग्लैंड दौरे से पहले, परिवार आकाश को छोड़ने के लिए हवाई अड्डे गया, जहां उसकी बहन ने उससे कहा कि वह उसके स्वास्थ्य के बारे में चिंता न करे और देश के लिए अच्छा खेलने पर ध्यान केंद्रित करे. ज्योति हर दिन अपने भाई से बात करती है.
नितेश कुमार सिंह ने कहा, ‘मैच खत्म होने के तुरंत बाद, आकाश दीप का फोन आया और उन्होंने उससे वीडियो कॉल पर बात की. हम कल रात लगभग दो बजे सोए.’ नितेश ने कहा कि जब भी आकाश विकेट लेता है तो ज्योति को बहुत खुशी होती है और परिवार इतनी जोर से ताली बजाता है और खुशी मनाता है कि उनके पड़ोसी भी पूछते हैं कि क्या हुआ है.’ उन्होंने कहा, ‘मां जी ( आकाश की मां लदुमा देवी) भी उसकी (ज्योति) देखभाल के लिए मेरे साथ हैं. वह बहुत भावुक हो गई है.’ आकाश दीप के जीजा ने कहा अगर वह (आकाश दीप) इसी तरह प्रदर्शन करता रहा, तो इससे उसे मानसिक रूप से ठीक होने में मदद मिलेगी और इलाज अधिक प्रभावी होगा. उस पर कीमोथेरेपी का अच्छा असर हो रहा है और अब पहले से बहुत बेहतर है.’
आकाश दीप ने अपनी बहन के साथ अपने पैतृक गांव और जिले को भी खुशी मनाने का मौका दिया. उन्होंने अपने चचेरे भाई बैभव कुमार के साथ सासाराम में आकाश बैभव क्रिकेट अकादमी की स्थापना की. इस अकादमी में अभी 200 से अधिक खिलाड़ी प्रशिक्षण लेते है.’ बैभव ने कहा, ‘इतने सारे संघर्षों को देखने के बाद, आकाश हमेशा समाज को कुछ वापस देना चाहता था.’ उन्होंने कहा, ‘हमारी अकादमी में सभी सुविधाएं ( बॉलिंग मशीन, फ्लडलाइट्स, नेट) हैं. हम बहुत कम कीमत पर यह सुविधाएं मुहैया कराते है ताकि मध्यम और निम्न आय वाले परिवारों के बच्चों को भी अपने सपने को साकार करने का मौका मिले.’ उनके गांव बद्दी में मैच के बाद से जश्न जारी है. बैभव ने कहा, ‘हम नाच रहे हैं, मिठाइयां बांट रहे हैं. यह यहां बहुत से लोगों को प्रेरित करेगा.’