छतरपुर की वो आलू टिक्की, जो महंगाई में भी 20 रुपए में दे रही इको-फ्रेंडली स्वाद, हर किसी का फेवरेट

छतरपुर की वो आलू टिक्की, जो महंगाई में भी 20 रुपए में दे रही इको-फ्रेंडली स्वाद, हर किसी का फेवरेट


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Chhatarpur News: छतरपुर जिले की एक पुरानी दुकान पिछले 28 वर्षों से आलू टिक्की बनाकर लोगों का दिल जीत रही है. राजेंद्र कुशवाहा की खासियत है कि वे अपनी आलू टिक्की छ्योल के पत्तों में परोसते हैं.

हाइलाइट्स

  • छ्योल के पत्ते और राजेंद्र की मेहनत
  • 28 सालों से छ्योल के पत्तों में आलू टिक्की का जादू
  • हर खाने के शौकीन का फेवरेट
Aaloo Tikki. छतरपुर जिले के लोग चटपटा खाने के शौकीन होते हैं. चटपटा बोले तो लोग आलू टिक्की खाना पसंद करते हैं. जिले में ऐसी ही एक पुरानी दुकान है जो पिछले 28 सालों से आलू टिक्की के स्वाद के लिए फेमस है. यहां आलू टिक्की खाने के लिए लोगों की भीड़ लगती है. यह दुकान सिर्फ 4 घंटे के लिए खुलती है. यहां की आलू टिक्की आपको 20 रुपए में खाने को मिल जाती है. जानें इस आलू टिक्की की खासियत…

साल 1997 से बना रहे आलू टिक्की
राजेंद्र कुशवाहा बताते हैं कि पहले मैंने छतरपुर शहर में आलू टिक्की 1997 से बनाना शुरू किया था. छतरपुर जो पहले कोई खास बड़ा शहर नहीं था.  यह भी एक छोटा कस्बा ही था. यहां पर पहले इतनी बिक्री नहीं होती थी लेकिन उस समय महंगाई कम थी तो घर खर्च तो चल जाता था.  धीरे-धीरे जनसंख्या बढ़ी तो शहर बढ़ा. साथ ही शहर का मार्केट भी बढ़ा और इस मार्केट का हमें फायदा हुआ.

राजेंद्र बताते हैं कि शुरुआत में आलू टिक्की, पानी-पुरी, दही-पूरी और सूखी पूरी सब बनाता था.  लेकिन अब पानी-पूरी, दही-पूरी और सूखी पूरी बनाना कम दिया है लेकिन आलू टिक्की आज भी बनाता हूं.  क्योंकि यहां आलू टिक्की खाने के दीवाने आज भी मेरी दुकान पर आते हैं.

राजेंद्र कुशवाहा बताते हैं कि लोग आलू टिक्की तो पूरे छतरपुर में मिलती है लेकिन मेरे यहां आलू टिक्की छ्योल के पत्तों में ही खाना को मिलती है. यहां डिस्पोजल का दोना नहीं होता है बल्कि छ्योल के पत्तों का दोना होता है. यह एक पेड़ होता है जिसे छ्योल या पलाश कहते हैं. इस पेड़ के पत्तों से ही ये दोना बनाया जाता है और यह पत्ते ही आलू टिक्की को खास बना देते हैं.

छ्योल के पत्तों में खिलाते आलू टिक्की 
राजेंद्र कुशवाहा बताते हैं कि मेरे यहां 12 महीने कस्टमर को छ्योल के पत्ते में आलू टिक्की खाने को मिलती हैं. क्योंकि जो लोग यहां आते हैं वह इसी की डिमांड करते हैं और इसलिए वह मेरे पास आते हैं. क्योंकि उनको दूसरी जगह डिस्पोजल में आलू टिक्की खाने को मिलती है तो वहीं मेरे पास आज भी छ्योल के पत्तों में ही उनको आलू टिक्की का स्वाद मिलता है.

आलू टिक्की के स्वाद को ये पत्ता बनाता खास 
राजेंद्र बताते हैं कि अगर मेरे पास छ्योल के पत्तों का दोना नहीं होता है तो कस्टमर लौट जाते हैं. इसलिए 12 महीने ये दोना रखता हूं. भले ही मुझे भोपाल से क्यों न मंगाना पड़े. लेकिन डिस्पोजल में कभी भी आलू टिक्की नहीं खिलाता हूं. 100 रुपए में 1 सैकड़ा छयोल के दोना पत्ता खरीदता हूं. शायद इसलिए लोग मेरी दुकान की आलू टिक्की को खाना आज भी पसंद करते हैं.

20 रुपए में एक दोना आलू टिक्की
राजेंद्र बताते हैं कि भले ही आज महंगाई बढ़ गई हो और छतरपुर शहर में आलू टिक्की 30 रुपए की मिल रही हो लेकिन मेरे यहां आज भी 20 रुपए की आलू टिक्की खाने को मिल जाती है. हालांकि, 30‌ रुपए की आलू टिक्की भी बनाता हूं.

Anuj Singh

Anuj Singh serves as a Content Writer for News18MPCG (Digiatal), bringing over Two Years of expertise in digital journalism. His writing focuses on hyperlocal issues, Political, crime, Astrology. He has worked …और पढ़ें

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छतरपुर की वो आलू टिक्की, जो दे रही इको-फ्रेंडली स्वाद



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