क्या कहता है कृषि एक्सपर्ट?
कृषि सलाहकार सुनील पटेल के अनुसार”इस समय किसानों को सबसे ज्यादा दिक्कत पीला मोजेक वायरस से हो रही है. यह बीमारी खासतौर पर उमस और सफेद मक्खी (whitefly) के कारण तेजी से फैलती है. जैसे ही फसल पर सफेद मच्छर का असर बढ़ता है, वायरस तेजी से फैलता है और पौधे पीले पड़ने लगते हैं.”
बचाव का उपाय क्या है?
सुनील पटेल किसानों को सलाह देते हैं कि इस बीमारी को रोकने के लिए सबसे पहले सफेद मच्छर पर नियंत्रण जरूरी है. इसके लिए किसान ”एसिटामिप्रिड 20% डब्ल्यूएसपी” नामक कीटनाशक का उपयोग करें. इसे 10 ग्राम प्रति पंप के हिसाब से छिड़काव करें.”
किसानों की प्रतिक्रिया
पूरे जिले के कई किसानों का कहना है कि उनकी सोयाबीन की फसल कुछ ही दिनों में पीली पड़ने लगी है. पहले उन्होंने इसे सामान्य माना, लेकिन जब पत्तियां झड़ने लगीं और फसल मुरझाने लगी, तब चिंता बढ़ गई. कई किसान स्थानीय कृषि केंद्रों से दवाइयां ले चुके हैं, जबकि कुछ अभी भी जानकारी के अभाव में इंतजार कर रहे हैं.
किसानों की मांग है कि कृषि विभाग इस समस्या को गंभीरता से ले और हर गांव में जाकर निरीक्षण करे. साथ ही किसानों को फ्री या सब्सिडी पर दवाइयां उपलब्ध कराई जाएं, ताकि फसल को बचाया जा सके. यदि समय रहते कदम नहीं उठाया गया तो निमाड़ क्षेत्र को इस बार भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है.
सोयाबीन किसानों के लिए यह समय सतर्क रहने का है. सही जानकारी, समय पर दवा और उचित देखभाल से फसल को बीमारी से बचाया जा सकता है. कृषि विभाग और स्थानीय प्रशासन को चाहिए कि किसानों के बीच जागरूकता फैलाएं और उन्हें तकनीकी सहायता दें.