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Rakhi Special: भाई-बहन के प्रेम की तो कई मिसालें कायम है. एक ऐसी ही मिसाल कायम की है बुरहानपुर जिले के गीता दत्त नगर में रहने वाली एक बहन ने, उन्होंने अपने भाई के प्राणों की रक्षा की ओर उसे जीवनदान दिया.
गीता दत्त नगर में रहने वाली बहन अर्चना अरुण महाजन के भाई गणेश महाजन की 8 वर्ष पहले तबीयत खराब हुई थी. जब डॉक्टर ने उनका लिवर खराब होना बताया, तो पूरा परिवार दुखी हो गया. जैसे ही बहन अर्चना को यह बात पता चली, तो सबसे पहले अर्चना ने अपना लिवर भाई को देने के लिए अपनी इच्छा जताई. इस काम के लिए उनके पति अरुण महाजन ने भी उनका सहयोग किया. पूरे परिवार का सहयोग मिला। बहन अर्चना का लिवर 4 वर्ष पहले भाई गणेश महाजन को ऑपरेशन कर लगाया गया. आज भाई खेती-किसानी कर रहे हैं.
अर्चना बताती हैं कि जब पिता की मृत्यु हो गई थी, तो बड़ा भाई ही सभी फर्ज निभाता था और मुझे बचपन से ही उससे बहुत लगाव था. जब यह बीमारी की बात सामने आई, तो बड़ा मन दुखी हुआ. लेकिन मैंने उसकी जान बचाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी और मेरा लिवर देकर उसकी जान बचाई है. आज भी हम दोनों बहन-भाई एक-दूसरे से बहुत प्रेम करते हैं. जब लिवर देने की बात आई, तो मेरी पांच बहनें भी तैयार हो गई थीं.
अपना लिवर देकर बचाई भाई की जान
उन्होंने बताया कि 4 साल पहले मेरे भाई गणेश महाजन का लिवर खराब था. मैंने उनको अपना लिवर दिया, जिससे उनकी जान बच गई है. अभी वह स्वस्थ हैं और खेती-किसानी करते हैं. मुंबई के अस्पताल में हमारा ऑपरेशन हुआ था. मैं बचपन से ही उससे बहुत प्रेम करती थी, इसलिए जब ऐसी स्थिति बनी, तो सबसे पहले मैंने अपना लिवर देने की इच्छा जताई और भाई को लिवर भी दिया.
बहन ने दिया भाई को नया जीवन
अर्चना महाजन के पति अरुण्स महाजन ने बताया कि जब हम इंदौर के अस्पताल में गणेश महाजन को लेकर पहुंचे, तब डॉक्टर ने हमें यह समस्या बताई. तब मेरी पत्नी ने लिवर देने की इच्छा जताई. मैंने उसे सहयोग किया. पूरे परिवार की सहमति से पत्नी ने भाई को लिवर देकर उसकी जान बचाई है. अरुण महाजन अभी नेपानगर की सरकारी स्कूल में प्रिंसिपल का दायित्व संभाले हुए हैं. अरुण महाजन कहते हैं कि यह वाक्या समाज को प्रेरणा देती है. हर किसी को एक-दूसरे की मदद करनी चाहिए.