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Shani Amavasya kab hai: भाद्रपद अमावस्या 2025 की तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि जानें। इस दिन पितृ तर्पण, स्नान-दान और भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व है.
ज्योतिषियों की मानें तो भाद्रपद अमावस्या का विशेष महत्व होता है. इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने और पितरों का तर्पण करने से साधक को अक्षय फल की प्राप्ति होगी. इसके साथ ही पितरों का आशीर्वाद भी प्राप्त होगा. आइए जानते है पंडित आंनद भारद्वाज से शुभ मुहूर्त एवं तिथि…
इस साल भाद्रपद अमावस्या की तिथि 22 अगस्त की सुबह 11 बजकर 55 मिनट के लगभग से शुरू हो रही है. इसका समापन 23 अगस्त की सुबह 11 बजकर 35 मिनट के लगभग पर हो जाएगा. ऐसे में 23 अगस्त को ही अमावस्या मनाई जाएगी. शनिवार के दिन पड़ने के चलते इसे शनिचरी अमावस्या भी कहते हैं.
कब और कैसे करें पितरों का तर्पण
हर एक पूजा-पाठ का नियम रहता है. पितरों का तर्पण करने के लिए सबसे सही समय प्रात:काल का होता है. सूर्योदय के समय आपको स्नान ध्यान के बाद पितरों को तर्पण देने चाहिए. पितृ तर्पण के लिए आपको सफेद पुष्प, काले तिल और कुश का उपयोग करना चाहिए. पितरों का तर्पण दक्षिण दिशा में मुख करके किया जाता है. तर्पण के दौरान पितरों का ध्यान करना चाहिए. उनसे सुख-समृद्धि की कामना करनी चाहिए. इस दिन दान का भी विशेष महत्व बताया गया है. इस दिन किया हुआ दान-पुण्य करने से पितृ देव प्रसन्न होते हैं.
भूलकर भी ना करें यह कार्य
इस दिन मांस, मदिरा और तामसिक भोजन का सेवन वर्जित है. साथ ही किसी भी प्रकार के झूठ, क्रोध, छल या कपट से बचना चाहिए. पितरों के दिन होने से इस तिथि पर किसी भी शुभ कार्य जैसे विवाह या मांगलिक कार्यों का आयोजन नहीं करना चाहिए. पशु-पक्षियों को कष्ट पहुंचाना और पेड़-पौधों को काटना अशुभ माना जाता है.
Dallu Slathia is a seasoned digital journalist with over 6 years of experience, currently leading editorial efforts across Madhya Pradesh and Chhattisgarh. She specializes in crafting compelling stories across …और पढ़ें
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