हालांकि अशोक शर्मा ने तिहाड़ा के दावों का पुरजोर खंडन करते हुए कहा कि पूर्व सचिव ‘गलत तकनीकी बातों’ से सभी को भ्रमित कर रहे हैं.
तिहाड़ा ने अपने पत्र में एक निर्वाचन सदस्य प्रवीण अरोड़ा द्वारा दर्ज की गई शिकायत का भी उल्लेख किया है. तिहाड़ा ने पत्र में लिखा:
हमारे एक सम्मानित सदस्य प्रवीण कुमार अरोड़ा (एलएम000878) ने दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ और संपूर्ण शीर्ष परिषद को अशोक शर्मा के कार्यकाल की सीमाओं के संबंध में पत्र लिखा था और संघ से माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेशों और डीडीसीए के संविधान दस्तावेजों के अनुसार उचित कार्रवाई शुरू करने का अनुरोध किया था. हमारे सम्मानित संगठन के पूर्व सचिव के रूप में मैं आपके कार्यालय से आग्रह करता हूं कि आप इसका संज्ञान लें और बिना किसी और देरी के उचित और तत्काल कार्रवाई करें। इस संबंध में मेरा पत्र आपकी तत्काल और आवश्यक कार्रवाई के लिए संलग्न है.
अपने कार्यकाल के दौरान विवादों में भी रहे तिहाड़ा ने उदाहरण के तौर पर रोजर बिन्नी को बीसीसीआई अध्यक्ष पद से हटाए जाने और उत्तराखंड क्रिकेट संघ के माहिम वर्मा के ब्रेक पर जाने का हवाला दिया.
उन्होंने कहा, ‘तो लोढ़ा संविधान के अनुसार भी मैं पात्र हूं. तिहाड़ा ने मेरे निदेशक के कार्यकाल को मेरे सचिव पद के साथ जोड़ दिया है. अगर सब कुछ गिना जाए तो आईपीएल अध्यक्ष और अब उपाध्यक्ष होने के अलावा कई समितियों में कई साल बिताने वाले राजीव शुक्ला अब भी पद पर कैसे बने हुए हैं?’