9 साल से मुआवजे के लिए भटक रहा पिता: सिंगरौली में कहा- नसबंदी फेल होने से चौथी संतान का लाभ नहीं मिला – Singrauli News

9 साल से मुआवजे के लिए भटक रहा पिता:  सिंगरौली में कहा- नसबंदी फेल होने से चौथी संतान का लाभ नहीं मिला – Singrauli News



संतोष कुमार शाह ने आज फिर से कलेक्टर कार्यालय में शिकायत की है।

सिंगरौली के चांचर निवासी संतोष कुमार शाह को नसबंदी फेल होने का लाभ पाने के लिए 9 साल से दर-दर भटकना पड़ रहा है। संतोष ने अपनी पत्नी रामपति शाह की नसबंदी 30 जनवरी 2016 को करवाई थी। नसबंदी के समय उनकी तीन संताने थीं- एक लड़का और दो लड़कियां।

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नसबंदी के 11 महीने बाद उनकी पत्नी फिर से गर्भवती हो गई। इसके बाद उन्होंने एक बेटी को जन्म दिया। तब से संतोष लगातार अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं। उन्होंने पहले मुख्य चिकित्सा और स्वास्थ्य अधिकारी के पास शिकायत की। इसके बाद कई बार जिला कलेक्ट्रेट में भी गुहार लगाई।

आज फिर से कलेक्टर से की शिकायत

आज मंगलवार को फिर वह कलेक्टर कार्यालय पहुंचे। उन्होंने मांग की है कि उन्हें न सिर्फ नसबंदी फेल होने का मुआवजा दिया जाए, बल्कि बेटी की शिक्षा के लिए नि:शुल्क सुविधा भी प्रदान की जाए।

नियमों के अनुसार, नसबंदी फेल होने पर पीड़ित जिला स्वास्थ्य कार्यालय से संपर्क कर सकता है। वह कानूनी सहायता ले सकता है। चिकित्सक की लापरवाही साबित होने पर अदालत में याचिका दायर कर सकता है। साथ ही परिवार नियोजन बीमा योजना के तहत मुआवजे के लिए आवेदन कर सकता है।

सीएमओ बोले- मुझे मामले की जानकारी नहीं है

हैरानी की बात यह है कि जब इस मामले में जिले के मुख्य चिकित्सा और स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) पुष्पराज सिंह से बात की गई, तो उन्होंने दैनिक भास्कर को बताया कि उन्हें इस मामले की कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा, “आप कल सुबह 11 बजे ऑफिस आइए, मैं पूछकर बताता हूं।”

नसबंदी फेन होने पर मुआवजा मिलता है

दरअसल, मध्य प्रदेश में यह नियम है कि यदि किसी व्यक्ति की नसबंदी विफल होती है, तो उसे ₹30,000 का आर्थिक मुआवजा दिया जाता है। हालांकि यह राशि अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग हो सकती है।

एक मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने नसबंदी फेल होने पर ₹2 लाख तक का मुआवजा देने का आदेश भी दिया है। लेकिन सिंगरौली का यह मामला इसलिए भी अलग और चिंताजनक हो जाता है, क्योंकि एक ओर जहां जिले के CMHO को नियम की जानकारी नहीं है, वहीं दूसरी ओर एक व्यक्ति पिछले 9 वर्षों से न्याय और मुआवजे के लिए भटक रहा है।



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