गुना के चांचौड़ा इलाके में पार्वती कालीसिंध चंबल परियोजना में बनने वाले डैम में डूब में आने वाले ग्रामीणों ने बुधवार को बीनागंज में रैली निकाली। ग्रामीणों का कहना है कि शासन, प्रशासन यह स्पष्ट नहीं आकर रहा है कि कितने गांव डूब में आयेंगे और कितने गां
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मध्यप्रदेश से गुजरने वाली पार्वती-कालीसिंध-चंबल (पीकेसी) को जोड़ने वाले प्रोजेक्ट की शुरुआत दिसंबर महीने में हुई। जयपुर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में एमपी, राजस्थान और केंद्रीय जलशक्ति मंत्रालय के बीच त्रिस्तरीय एग्रीमेंट (एमओयू) हुआ।
पीकेसी परियोजना से एमपी में चंबल से लेकर मालवा तक के 3150 गांवों की 6 लाख 13 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई हो सकेगी। एमपी के 11 जिलों- गुना, शिवपुरी, सीहोर, देवास, राजगढ़, उज्जैन, आगर-मालवा, इंदौर, शाजापुर, मंदसौर और मुरैना में पीने का पानी मिलेगा।
पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजना की अनुमानित लागत 72 हजार करोड़ रुपए है। परियोजना से बनने वाले बांधों और जलाशयों की कुल जल भराव क्षमता 1908.83 घन मीटर होगी। 172 मिलियन घन मीटर पानी, ग्रामीणों के लिए पीने और उद्योगों के लिए रिजर्व रहेगा।
रैली में शामिल ग्रामीण।
21 बांध और बैराज बनाए जाएंगे पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजना में मध्य प्रदेश से शुरू होने वाली पार्वती, कूनो, कालीसिंध, चंबल, शिप्रा और सहायक नदियों के पानी का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल किया जाएगा। कुल 21 बांध और बैराज बनाए जाएंगे।
श्रीमंत माधवराव सिंधिया सिंचाई कॉम्पलेक्स में 4 बांध (कटीला, सोनपुर, पावा और धनवाड़ी), 2 बैराज (श्यामपुर, नैनागढ़), कुम्भराज कॉम्पलेक्स में 2 बांध (कुम्भराज-1 और कुम्भराज-2), रणजीत सागर, लखुंदर बैराज और ऊपरी चंबल कछार में 7 बांध (सोनचिरी, रामवासा, बचेरा, पदुनिया, सेवरखेडी, चितावद, सीकरी सुल्तानपुरा) बनेंगे।
इसके अलावा गांधी सागर बांध की अपस्ट्रीम में चंबल, क्षिप्रा और गंभीर नदियों पर छोटे-छोटे बांधों का निर्माण भी प्रस्तावित है।
5 साल में पूरा होगा काम केंद्र सरकार के सहयोग से बनने वाली इस परियोजना का काम अगले 5 साल में पूरा कर लिया जाएगा। 75 हजार करोड़ के खर्च में से 90% केंद्र जबकि 10% एमपी और राजस्थान सरकार देंगी। इसमें बैलेंसिंग रिजर्वायर का निर्माण प्रस्तावित है।
इसके साथ ही परियोजना में मध्य प्रदेश, राजस्थान के बीच मौजूदा चंबल दाईं मुख्य नहर (CRMC) और मध्य प्रदेश क्षेत्र में CRMC सिस्टम के अंतिम छोर तक मॉडर्नाइजेशन और रीन्यूअल के लिए प्रावधान किया गया है।
बड़े बांध का विरोध इस योजना के तहत जिले की चांचौड़ा विधानसभा में कुंभराज 1 और कुंभराज 2 बांध बनाए जाएंगे। यह कंपोजिट डैम 9220 मीटर का होगा। इसका जल फैलाव क्षेत्र 8867 हैक्टेयर होगा। इसमें लगभग 17 गांव प्रभावित होंगे।
पिछले कई दिनों से इस क्षेत्र के किसान यह जानकारी छह रहे हैं कि प्रशासन स्पष्ट करे कि कितने गांव इससे प्रभावित होंगे। कितने गांव डूब में आयेंगे। साथ ही उनकी यह भी मांग थी कि बड़े डैम की जगह छोटे छोटे डैम बनाए जाएं।
कई दिनों से सोशल मीडिया पर इसे लेकर माहौल भी बनाया जा रहा था। मंगलवार को प्रशासन ने बीनागंज में ग्रामीणों को बुलाया भी था और उनसे बात की।

रैली में कई गांवों के लोग शामिल हुए।
बीनागंज में निकाली रैली बुधवार को इलाके के ग्रामीणों ने बीनागंज में रैली निकाली। बड़ी संख्या में ग्रामीण इस रैली में पहुंचे। पूर्व विधायक ममता मीणा भी इस रैली को संबोधित करते पहुंचीं। उन्होंने कहा कि जब वह विधायक थीं, तब उन्होंने दो बांधों का प्रस्ताव रखा था।
हम सब चाहते हैं कि किसान को खेतों में सिंचाई के लिए पानी मिले, हर किसान यही चाहता है लेकिन 80 गांव डुबाने का क्या औचित्य है। ऐसा सुना है कि 80 गांव डूब में आ रहे हैं। इतना बड़ा बांध बनाने की क्या जरूरत है।
इस मामले में चांचौड़ा SDM रवि मालवीय ने कहा कि
ग्रामीणों की मुख्य रूप से दो मांगें हैं। पहली यह कि ऐसे सर्वे किया जाए कि कम से कम इलाका डूब क्षेत्र में आए। वहीं दूसरी डिमांड है कि बड़े बांध की जगह छोटे छोटे स्टॉप दम बना दिए जाएं। इन्हीं मांगों को लेकर उन्होंने रैली भी निकाले थी और अपनी मांगें सामने रखी हैं।


रैली को संबोधित करतीं पूर्व विधायक ममता मीणा।