कौवा है पितरों का दूत, लेकिन अगर ना दिखे तो श्राद्ध कैसे करें? जानिए शास्त्रों में बताई गई ये खास विधि

कौवा है पितरों का दूत, लेकिन अगर ना दिखे तो श्राद्ध कैसे करें? जानिए शास्त्रों में बताई गई ये खास विधि


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Pitru Paksha: श्राद्ध पक्ष में पितरों को प्रसन्न करने और उनका आशीर्वाद पाने के लिए तरह-तरह के उपाय किए जाते हैं. और इन सब में जरूरी होता है, श्राद्ध पक्ष में पितरों को भोजन अर्पित करने के लिए कौवे को भोग लगाना,…और पढ़ें

उज्जैन. हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का बहुत महत्व माना जाता है. यह पर्व अपने दिवंगत पूर्वजों को याद करने और उनको श्रद्धांजलि देने का एक खास अवसर होता है. पितृपक्ष का यह पर्व भाद्रपद पूर्णिमा से लेकर आश्विन कृष्ण पक्ष अमावस्या तक 16 दिनों तक चलता है. इस दौरान, लोग अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध करते हैं. श्राद्ध कर्म में पितरों का तर्पण, पिंडदान और अन्य धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं. पितृ पक्ष में कौवे को भोजन कराना बहुत महत्वपूर्ण और सबसे जरूरी कार्य माना जाता है, लेकिन अगर भोज के लिए कौआ ना मिले तो क्या करें? आइए जानते हैं उज्जैन के आचार्य आनंद भारद्वाज से.

क्यों कौआ को माना जाता है पितृको का प्रतीक?
मान्यताओं के अनुसार कौवा यम के प्रतीक के रूप में जाना जाता है. पितृ पक्ष के दौरान कौवे का होना पितरों के आस पास होने का संकेत माना जाता है. कहते हैं श्राद्ध के दौरान इसको ग्रास न दें, तो पूर्वज भूखे लौट जाते हैं. इसलिए सभी लोग पितृ पक्ष मे कौआ को भोजन कराने के लिए ढूंढते हैं.

श्राद्ध भोजन के लिए कौवे न मिले तो क्या करें
शास्त्रों में वर्णित है कि कौआ एक मात्र ऐसा पक्षी है, जो पितृ-दूत कहलाता है, लेकिन शहरों में कौवे विलुप्त होते जा रहे हैं. ऐसे में अगर आप श्राद्ध का भोजन कौवों को नहीं करा पा रहे हैं तो, कौवे के नाम का भोग गाय या कुत्ते को खिला सकते हैं, क्योंकि पितरों का भोजन गाय, कुत्ते, कौवे, चींटी और देवताओं को खिलाया जाता है, इसे पंचबलि भोग कहते हैं.

पंचबलि का महत्व और सही तरीका
श्राद्ध में पंचबलि भोग का बहुत बड़ा महत्व है. क्योंकि पितरों का भोजन गाय, कुत्ते, कौवे, चींटी और देवताओं को खिलाया जाता है. इसे पंचबलि भोग कहते हैं. यह केवल एक धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि पितरों के प्रति श्रद्धा और सम्मान का प्रतीक है. ऐसी मान्यता है कि इन पांचों को भोजन कराने से पितरों को भोजन प्राप्त होता है और वे तृप्त होते हैं. लेकिन इन सभी में कौवे का स्थान सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है.

Anuj Singh

Anuj Singh serves as a Content Writer for News18MPCG (Digital), bringing over Two Years of expertise in digital journalism. His writing focuses on hyperlocal issues, Political, crime, Astrology. He has worked a…और पढ़ें

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कौवा है पितरों का दूत, लेकिन अगर ना दिखे तो श्राद्ध कैसे करें? जानिए

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है. किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है. ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है. बताई गई किसी भी बात का Local-18 व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है.



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