भोपाल में मैन्युवल होगा मेट्रो टिकट कलेक्शन सिस्टम: जैसे ट्रेन में सफर करते हैं, वैसे मेट्रो में भी; फेयर कलेक्शन का काम नई कंपनी को मिलेगा – Bhopal News

भोपाल में मैन्युवल होगा मेट्रो टिकट कलेक्शन सिस्टम:  जैसे ट्रेन में सफर करते हैं, वैसे मेट्रो में भी; फेयर कलेक्शन का काम नई कंपनी को मिलेगा – Bhopal News


भोपाल में अक्टूबर से आम लोगों के लिए चलने वाली मेट्रो का टिकट सिस्टम ऑनलाइन न होकर मैन्युवल ही रहेगा। जैसे आप ट्रेन में टिकट लेकर सफर करते हैं, वैसे ही मेट्रो में भी कर सकेंगे। इंदौर में अभी यही सिस्टम है।

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भोपाल और इंदौर मेट्रो में ऑटोमैटिक फेयर कलेक्शन सिस्टम लगाने वाली तुर्किए की कंपनी ‘असिस गार्ड’ से काम छिनने और नई कंपनी के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू किए जाने से यह स्थिति बनेगी।

असिस गार्ड को लेकर पिछले 4 महीने से मामला सुर्खियों में था। आखिरकार अगस्त में असिस गार्ड का टेंडर कैंसिल कर दिया गया। नई कंपनी के लिए टेंडर भी कॉल किए हैं। इस पूरी प्रक्रिया में दो से तीन महीने का वक्त लग सकता है। दूसरी ओर, मेट्रो का कमर्शियल रन अक्टूबर में किए जाने का निर्णय लिया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मेट्रो को हरी झंडी दिखाने के लिए भोपाल आएंगे।

मैन्युवल टिकट ही एक मात्र ऑप्शन अफसरों ने बताया कि 31 मई को पीएम मोदी इंदौर मेट्रो का वर्चुअली तरीके से कमर्शियल रन को हरी झंडी दिखा चुके हैं। असिस गार्ड कंपनी इंदौर में स्टेशनों पर भी सिस्टम लगा रही थी, लेकिन विवाद के बाद इंदौर में मैन्युवल टिकट ही ऑप्शन बचा था। पिछले साढ़े 3 महीने से इंदौर में ट्रेन जैसा ही सिस्टम है। इसमें मेट्रो के कर्मचारी ही तैनात किए गए हैं।

यही ऑप्शन अब भोपाल मेट्रो के लिए भी बचा है। दरअसल, ‘असिस गार्ड’ के जिम्मे ही सबसे महत्वपूर्ण ऑटोमैटिक फेयर कलेक्शन यानी किराया लेने की पूरी प्रक्रिया का सिस्टम तैयार करने का काम था। जिसमें कार्ड के जरिए किराया लेने के बाद ही गेट खुलना भी शामिल हैं। यह कंपनी सिस्टम का पूरा मेंटेनेंस भी करती।

अब अनुबंध खत्म होने पर नई कंपनी काम करेगी, लेकिन उसे टेंडर और फिर अन्य प्रक्रिया से गुजरने में समय लगेगा। इसलिए मेट्रो कॉरपोरेशन भोपाल में भी मैन्युवली टिकट सिस्टम ही लागू कर सकता है। अफसरों के अनुसार, मैन्युवली सिस्टम के लिए अमला तैनात करेंगे। इसका प्लान तैयार कर रहे हैं।

भोपाल में मेट्रो का जब कमर्शियल रन होगा, यानी यह आम लोगों के लिए दौड़ने लगेगी, तब उसकी अधिकतम स्पीड 60 किमी प्रतिघंटा तक रहेगी।

मंत्री विजयवर्गीय के इस ट्विट के बाद मामला सुर्खियों में आया… 19 मई को शाम 6.58 बजे डॉ. मोहन सरकार के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने ‘X’ पर एक पोस्ट लिखी थी। जिसमें उन्होंने कहा था कि राष्ट्र सर्वोपरि…भारत विरोधी मानसिकता का कोई स्थान नहीं। हमारे लिए राष्ट्रधर्म सर्वोपरि है। जो भी भारत की संप्रभुता के विरुद्ध खड़ा होगा, वह चाहे कोई भी क्यों न हो, उसके साथ किसी भी प्रकार की सहानुभूति या सहयोग असहनीय है।

मंत्री विजयवर्गीय ने आगे लिखा- गंभीर तथ्य यह है कि यही कंपनी असिस वर्तमान में भोपाल और इंदौर मेट्रो परियोजनाओं में डिजिटल प्रणाली के कार्य के लिए अनुबंधित है। इस संदर्भ में अधिकारियों को तथ्यों की गहन एवं निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए हैं।

यदि यह पाया जाता है कि कंपनी का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से भारत विरोधी तत्वों से संबंध है या इसके उत्पादों का उपयोग भारत की सुरक्षा के विरुद्ध हुआ है तो कंपनी का अनुबंध समाप्त कर दिया जाएगा। हम राष्ट्र के सम्मान, सुरक्षा और आत्मगौरव के साथ कोई समझौता नहीं करेंगे।

कैबिनेट मंत्री विजयवर्गीय ने बताया था- सूत्रों के अनुसार, ‘असिस गार्ड’ के ड्रोन कथित तौर पर पाकिस्तान द्वारा भारत विरोधी गतिविधियों में इस्तेमाल किए गए थे। अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि कंपनी की भूमिका की गहन जांच की जाए। यदि यह साबित होता है कि कंपनी या उसके उत्पाद भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल हैं, तो उसका अनुबंध तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया जाएगा।

मंत्री विजयवर्गीय के इस बयान के बाद मेट्रो अफसरों ने जांच भी शुरू कर दी थी। इधर, कांग्रेस ने भी प्रदर्शन करते हुए कंपनी का टेंडर तुरंत निरस्त करने की मांग की थी। मेट्रो ऑफिस के बाहर प्रदर्शन भी किए। इधर, जांच का दौर जारी रहा। केंद्र सरकार से हरी झंडी मिलते ही टेंडर को निरस्त करने का निर्णय लिया। फिर नई कंपनी को टेंडर देने की प्रक्रिया शुरू कर दी।

मेट्रो का रोडपैम।

मेट्रो का रोडपैम।

‘असिस’ को ऐसे मिला था काम एमपी मेट्रो कॉर्पोरेशन ने मेट्रो स्टेशनों पर ऑटोमैटिक फेयर कलेक्शन के लिए साल 2024 में इंटरनेशनल टेंडर कॉल किए थे। कुल 3 कंपनियों ने टेंडर भरे थे। इनमें से एक तुर्किये की असिस इलेक्ट्रॉनिक ब्लिसिम सिस्टमेलेरी भी शामिल थी, जबकि दो अन्य कंपनी- एनईसी कॉर्पोरेशन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और शेलिंग फॉस्क ग्लोबल डिजिटल टेक्नोलॉजी थीं।

230 करोड़ रुपए के टेंडर कॉल के मुकाबले तुर्किए की कंपनी ने 186 करोड़ 52 लाख रुपए की राशि टेंडर में दी थी। दूसरे स्थान पर एनईसी कॉर्पोरेशन इंडिया लिमिटेड ने 204.57 करोड़ का प्रस्ताव सौंपा था। इस हिसाब से तुर्किए की कंपनी को टेंडर हासिल हो गया। टेंडर मिलने के बाद कंपनी ने स्टेशनों पर सिस्टम लगाने भी शुरू कर दिए। भोपाल में सुभाष नगर, केंद्रीय स्कूल, डीबी मॉल, एमपी नगर और रानी कमलापति स्टेशन पर गेट्स लगा भी दिए, जबकि डीआरएम तिराहा, अलकापुरी और एम्स में काम शुरू किया था।

इंदौर में भी 5 स्टेशन- गांधीनगर से सुपर कॉरिडोर-3 तक सिस्टम इंस्टॉल किया जा चुका था। भोपाल और इंदौर के पहले फेस के कुल 53 स्टेशनों पर कंपनी काम का ठेका था।



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