Last Updated:
क्रिकेट को हमेशा से खेलभावना और सज्जनता का प्रतीक माना गया है लेकिन जब खिलाड़ी मैदान पर बंदूक चलाने की नकल करें, तो यह खेल से ज्यादा हिंसा और कट्टरता का प्रतीक बन जाता है. भारत-पाकिस्तान मैच पहले ही तनाव और भावनाओं से भरे होते हैं. ऐसे में बंदूक जैसे प्रतीकों का इस्तेमाल कहीं न कहीं आग में घी डालने जैसा है.
क्रिकेट को हमेशा से खेलभावना और सज्जनता का प्रतीक माना गया है लेकिन जब खिलाड़ी मैदान पर बंदूक चलाने की नकल करें, तो यह खेल से ज्यादा हिंसा और कट्टरता का प्रतीक बन जाता है. भारत-पाकिस्तान मैच पहले ही तनाव और भावनाओं से भरे होते हैं. ऐसे में बंदूक जैसे प्रतीकों का इस्तेमाल कहीं न कहीं आग में घी डालने जैसा है.
पाकिस्तान को करारी हार मिलने के बाद अब एक और झटका लग सकता है . भारत के खिलाफ दो अच्छा प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी साहिबजादा फरहान और हैरिस रउफ पर आईसीसी कड़ा एक्शन ले सकती है. सूत्रों के अनुसार मैच रेफरी ने भारतीय टीम से कहा है कि इस मुद्दे पर वो अपना पक्ष रखे वहीं दोनों वीडियो के और एंगल इकठ्ठा किए जा रहे है. हुआ यूं कि बल्लेबाज़ों से मार खाने के बाद हैरिस रउफ ने हद ही कर दी. वह मैदान में अजीबोगरीब हरकत करने लगे. उन्हें अपने हाथ से जेट डाउन सिग्नल का इशारा करते हुए पाया गया. उसके बाद तो भारतीय क्रिकेट प्रेमियों ने उन्हें और निशाना बनाना शुरू कर दिया और उनका खूब मजाक उड़ाया. साहिबज़ादा फरहान फिफ्टी जड़ने के बाद उन्होंने जो किया, वह समझ से परे था. फरहान अपने बल्ले को गन की तरह उठाकर भारतीय फैंस की तरफ स्टैंड में गोली चलाने का इशारा करने लगे जो किसी को पसंद नहीं आया.
आईसीसी का कोड ऑफ कंडक्ट साफ कहता है कि कोई भी जश्न ऐसा नहीं होना चाहिए जो विपक्षी टीम या दर्शकों को भड़काए. राजनीतिक, धार्मिक या हिंसक संदेश देने वाली हरकतों पर रोक है और अगर कोई खिलाड़ी खेल की “स्पिरिट” के खिलाफ जाता है, तो उस पर जुर्माना, सस्पेंशन या चेतावनी दी जा सकती है. मतलब साफ है क्रिकेट का जश्न बल्ले से होना चाहिए, बंदूक से नहीं. जिस तरह से हैंडशेक विवाद को पाकिस्तान ने मुद्दा बनाया उससे कहीं बड़ा मुददा साहिबजादा फरहान और हैरिस रउफ का है क्योंकि दोनों के इशारे उकसाने वाले थे.