23 सितंबर को दिन और रात होंगे बराबर! उज्जैन में प्रत्यक्ष देख सकेंगे खगोलीय घटना, ये बात तो बहुत खास

23 सितंबर को दिन और रात होंगे बराबर! उज्जैन में प्रत्यक्ष देख सकेंगे खगोलीय घटना, ये बात तो बहुत खास


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Ujjain News: उज्जैन की जीवाजीराव वेधशाला के अधीक्षक के मुताबिक, इस साल 23 सितंबर को दिन और रात बराबर होंगे. कल सूर्य विषुवत रेखा पर लंबवत होगा, जिससे शरद ऋतु का आगाज होगा.

धार्मिक नगरी उज्जैन कालगणना की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है. खगोलशास्त्रियों का मानना है कि उज्जैन नगरी पृथ्वी और आकाश की सापेक्षता में ठीक मध्य में स्थित है. कालगणना के लिए इसकी यह स्थिति सदा ही उपयोगी रही है.

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लगभग चौथी शताब्दी ईसा पूर्व से उज्जैन को भारत की ‘ग्रीनविच’ के रूप में भी जाना जाता था. यहां लगे प्राचीन यंत्रों के माध्यम से ग्रहों की चाल, सूर्य और चंद्रग्रहण और सूर्य की चाल से समय की गणना की जाती है. विशिष्ट भौगोलिक स्थिति के कारण ही महाकाल की नगरी को कालगणना का केंद्र बिंदु कहा जाता है.

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उज्जैन की जीवाजीराव वेधशाला के अधीक्षक डॉ. राजेंद्र गुप्त से लोकल 18 की टीम को बताया कि आखिर दिन व रात बराबर क्यों होते हैं? उन्होंने बताया, सूर्य दक्षिणी गोलार्ध और सायन तुला राशि में प्रवेश करेगा. सूर्य की क्रांति शून्य अंश 12 कला दक्षिण होगी. सायन तुला राशि में सूर्य की स्थिति शून्य अंश 29 कला 47 विकला पर होगी. 24 सितंबर से उत्तरी गोलार्ध में दिन छोटे और रातें बड़ी होने लगेंगी.

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यह सिलसिला 22 दिसंबर तक चलेगा. इस दौरान सूर्य की किरणों की तीव्रता उत्तरी गोलार्ध में कम होती जाएगी, जिससे ठंड बढ़ती जाएगी.

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महाकाल कि नगरी में यह वैधशाला काफ़ी पुरानी है. इस शासकीय जीवाजी वेधशाला में कई ऐसे यन्त्र हैं, जिनके मध्यम से खगोलीय घटना देखने को मिलती है. अगर इस दिन रात वाली घटना की बात करें तो इस खगोलीय घटना को शंकु यंत्र और नाड़ीवलय यंत्र से देखा जा सकेगा.

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यह पूरी घटना 23 सितंबर को देखने को मिलेगी, जिसमे उज्जैन की वैधशाला मे शंकु की छाया पूरे दिन सीधी रेखा पर चलती दिखाई देगी. नाड़ीवलय यंत्र पर 23 सितंबर को किसी गोल भाग पर धूप नहीं होगी.

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24 सितंबर से अगले 6 महीने तक यंत्र के दक्षिणी गोल पर धूप रहेगी. इस तरह सूर्य का गोलार्ध परिवर्तन प्रत्यक्ष रूप से देखा जा सकेगा. अगर इस प्राचीन शासकीय वेधशाला की बात करें तो इसका निर्माण भी बहुत समए पहले हुआ है.

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इस वेधशाला को जयपुर के महाराजा जयसिंह ने 300 साल पहले 1733 ईस्वी में बनवाया था. जैसा कि भारत के खगोलशास्त्री तथा भूगोलवेत्ता यह मानते आए हैं कि देशांतर रेखा उज्जैन से होकर गुजरती है. यहां के प्रेक्षाग्रह का भी विशेष महत्व रहा है.

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23 सितंबर को दिन और रात होंगे बराबर! उज्जैन में प्रत्यक्ष देख सकेंगे ये घटना



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