क्या है किना की कहानी?
बचपन में जहां वह छोटे-छोटे खिलौने और साधारण मूर्तियां बनाते थे, वहीं समय के साथ उनके हाथों की निपुणता बढ़ती गई. पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा भव्यता के साथ मनाई जाती है और वहां के कलाकारों की बारीकी पूरी दुनिया में मशहूर है. किना ने इसी परंपरा को मेहनत से सीखा और इसे ही अपना जीवन बना लिया.
आज हालात यह हैं कि जो बच्चा पढ़ाई में फेल हो गया था, वही अब हजारों दिलों में अपनी कला से राज कर रहा है. उनकी मूर्तियों के चेहरे की भाव-भंगिमा, आंखों की चमक और सजावट इतनी जीवंत होती है कि देखने वाले दंग रह जाते हैं.
किना पाल सिर्फ कला ही नहीं, बल्कि संदेश भी दे रहे हैं कि प्लास्टिक और केमिकल रंगों से दूरी बनाओ और पर्यावरण बचाओ. वे रासायनिक रंगों के बजाय प्राकृतिक और इको-फ्रेंडली रंगों का इस्तेमाल करते हैं, ताकि विसर्जन के बाद नदियों और तालाबों को प्रदूषण से बचाया जा सके.
लोगों की भीड़ उनके काम को देखने के लिए उमड़ रही है. बच्चे, बुजुर्ग, महिलाएं सब उनकी कला को देखकर चकित रह जाते हैं. यह जीता-जागता सबूत है कि इंसान डिग्री से नहीं, बल्कि हुनर और मेहनत से मुकाम हासिल करता है. किना का मानना है कि ईश्वर ने हर इंसान को एक खास हुनर दिया है. पढ़ाई जरूरी है, लेकिन अगर उसमें मन न लगे तो हिम्मत हारने के बजाय अपने हुनर को पहचानना चाहिए.