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अभिमन्यु ईश्वरन नाम का ये बल्लेबाज पिछले 4 साल से अपनी बारी का इंतजार कर रहा था वो टीम के ट्रैवल करता था नेट्स पर मेहनत करता था और मैदान पर पसीना भी बहाता रहा इस उम्मीद के साथ की शायद कभी टीम मैनेजमेंट का मन बदल जाए . मन तो बदला पर खिलाने के लिए नहीं टीम से बाहर करने के लिए क्योंकि वेस्टइंडीज के खिलाफ 2 टेस्ट मैचों के लिए जो टीम चुनी गई उसमें अभिमन्यु ईश्वरन का नाम नहीं है.
अभिमन्यू ईश्वरन नाम का ये बल्लेबाज पिछले 4 साल से अपनी बारी का इंतजार कर रहा था वो टीम के ट्रैवल करता था नेट्स पर मेहनत करता था और मैदान पर पसीना भी बहाता रहा इस उम्मीद के साथ की शायद कभी टीम मैनेजमेंट का मन बदल जाए . मन तो बदला पर खिलाने के लिए नहीं टीम से बाहर करने के लिए क्योंकि वेस्टइंडीज के खिलाफ 2 टेस्ट मैचों के लिए जो टीम चुनी गई उसमें अभिमन्यु ईश्वरन का नाम नहीं है.
ऑस्ट्रेलिया A के खिलाफ दूसरे मैच में जब अभिमन्यू को प्लेइंग ऐलेवन में शामिल नहीं गया तो संकेत तभी मिल गए थे कि बंगाल के इस ओपनर को अब आगे कंसीडर नहीं किया जाएगा और अब जब टीम सामने आई तो वहीं हुआ. 2021 से लगातार टीम इंडिया के टेस्ट टीम का हिस्सा रहे ईश्वरन को अंत में टीम से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया. हैरानी की बात तो ये है कि इस बल्लेबाज को बिना खिलाए टीम से बाहर कर दिया गया. अभिमन्यु ईश्वरन के भारतीय टीम में शामिल होने के बाद से, यशस्वी जायसवाल, देवदत्त पडिक्कल, रजत पाटीदार, साई सुदर्शन, ईशान किशन, ध्रुव जुरेल, मुकेश कुमार, सरफराज खान, और अंशुल कम्बोज जैसे कम से कम 16 खिलाड़ियों ने भारत के लिए टेस्ट डेब्यू किया है. अभिमन्यू ईश्वरन को 2021 में पहली बार टेस्ट टीम में शामिल किया गया था.
साल से टीम के साथ टूरिस्ट बनकर घूमने वाले अभिमन्यू के लिए टेस्ट खेलना अब एक सपना बन कर ना रह जाए इस बात का डर है. ईश्नवरन के नाम पर फर्स्ट क्लास क्रिकेट में 27 शतक दर्ज हैं और 7,841 रन भी वह बना चुके हैं. 31 फिफ्टी भी उनके बल्ले से निकली है. घरेलू क्रिकेट को लेकर कुछ समय पहले बड़ी बहस छिड़ी थी. हर किसी ने डोमेस्टिक क्रिकेट को महत्व देने की बात कही थी. खुद टीम इंडिया के हेड कोच गौतम गंभीर कहते हैं कि घरेलू क्रिकेट में दमदार प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी मौके के हकदार हैं. मगर सच्चाई तो कुछ और ही है. कोच साहब ड्रेसिंग रूम में बैठकर अभिमन्यू के साथ ही इंसाफ नहीं कर पा रहे हैं. भारतीय क्रिकेट में बलि चढ़ाना कोई नई बात नहीं है पर बिना खिलाए किसी को हाशिए पर डाल देना कई तरह के सवाल जररू खड़े करता है.