Agriculture Tips: पूर्व राष्ट्रपति से मिली प्रेरणा…बंजर जमीन को किसान ने बना दिया नोट छापने की मशीन!

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Agriculture Success Story: कुछ नया करने की ठान लें, मेहनत और हिम्मत से काम लें तो बंजर जमीन को भी उपजाऊ बनाया जा सकता है. इस बात को साबित कर दिखाया है खंडवा के इस किसान ने, आइए जानते हैं इनकी कहानी.

कुछ लोग परिस्थितियों से हार मान लेते हैं, जबकि कुछ लोग उन्हीं परिस्थितियों में अवसर ढूंढ लेते हैं. खंडवा जिले के खिड़गांव गांव के किसान अंजलेश व्यास ने भी अपनी जिद, मेहनत और प्रेरणा के बल पर बंजर जमीन को हरा-भरा बना दिया. उनकी यह कहानी आज हजारों किसानों के लिए उम्मीद की किरण है.
अंजलेश व्यास बताते हैं कि उनके पास कुल सोलह एकड़ जमीन थी, जो सालों से पथरीली और बंजर पड़ी थी. खेती लायक मिट्टी न होने के कारण परिवार को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था. इसी बीच उन्होंने दूरदर्शन पर पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का एक इंटरव्यू देखा. कलाम साहब ने प्राकृतिक खेती और पॉलीहाउस जैसे प्रयोगों पर चर्चा की थी. उसी इंटरव्यू से उन्हें गहरी प्रेरणा मिली और उन्होंने ठान लिया कि चाहे कितनी भी कठिनाई क्यों न आए, इस जमीन को उपजाऊ बनाना ही है.

परिवार का मिला पूरा सहयोग
परिवार का सहयोग भी इस सफर में अहम रहा. पिता और माता ने अपनी नौकरियां छोड़कर खेती को प्राथमिकता दी. सीमित संसाधनों और पैसों की कमी के बावजूद अंजलेश ने जमीन को सुधारने का काम शुरू किया. उन्होंने पथरीली जमीन को गड्ढे करवाकर भुरभुरी बनाई ताकि पौधों की जड़ें आसानी से बढ़ सकें. धीरे-धीरे इसमें हरियाली लौट आई.
आज उनकी सोलह एकड़ जमीन पर सुबूल के पेड़, हल्दी और विभिन्न सब्जियों की खेती हो रही है. सब्जियों से उन्हें रोज़ाना की आय मिलती है, वहीं हल्दी से वार्षिक आमदनी होती है. सुबूल के पेड़ उनके लिए दीर्घकालिक निवेश की तरह काम कर रहे हैं.
अंजलेश का मानना है कि खेती भी एक प्रकार का निवेश है, जिसमें जुनून और निरंतरता बहुत ज़रूरी है. वह कहते हैं कि किसान को हमेशा प्रकृति के साथ तालमेल बनाकर चलना चाहिए. जलवायु परिवर्तन से फसलें प्रभावित होती हैं, लेकिन अगर किसान खेत की मेड़ों पर नीम, आम, जामुन जैसे पेड़ लगाए तो न केवल पर्यावरण का संतुलन बना रहेगा, बल्कि किसानों को अतिरिक्त लाभ भी मिलेगा.
भविष्य को लेकर उनकी चाहत है कि खंडवा जिले की पहचान रही नेपा मिल दोबारा शुरू हो, जिससे किसानों, व्यापारियों और सरकार सभी को फायदा होगा और जिले का नाम फिर से रोशन होगा.
अंजलेश व्यास का यह संघर्ष बताता है कि अगर मेहनत और सकारात्मक सोच हो तो बंजर जमीन भी सोना उगल सकती है. उनकी कहानी सिर्फ एक किसान की नहीं, बल्कि उन सभी लोगों के लिए संदेश है जो कठिनाइयों के बावजूद हार मानने के बजाय नई राह बनाने का साहस रखते हैं.

shweta singh

Shweta Singh, currently working with News18MPCG (Digital), has been crafting impactful stories in digital journalism for more than two years. From hyperlocal issues to politics, crime, astrology, and lifestyle,…और पढ़ें

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