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रविचंद्रन अश्विन को इंटरनेशनल लीग टी20 में किसी खिलाड़ी ने नहीं खरीदा. ऐसे में यह सवाल उठना लाजमी है कि अश्विन जैसे बड़े कदम वाले खिलाड़ी को यूएई की इस छोटी सी लीग में क्यों नजरअंदाज किया गया.
नई दिल्ली. इंटरनेशनल लीग टी20 के ऑक्शन में जब भारत के अनुभवी स्पिन गेंदबाज रविचंद्रन अश्विन को किसी ने नहीं खरीदा तो हर कोई हैरान रह गया. इंटरनेशनल लीग टी20 यूएई क्रिकेट बोर्ड से मान्यता प्राप्त लीग है, जिसकी शुरुआत साल 2022 में हुई थी. अश्विन एक चतुर और चालाक स्पिन गेंदबाज हैं, जिन्होंने आईपीएल में विरोधी टीमों को कई बार मुश्किल में डाला है. ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि आखिरी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट और आईपीएल से संन्यास ले चुके अश्विन को इस लीग में क्यों किसी फ्रेंचाइजी ने खरीदने में दिलचस्पी नहीं दिखाई. चलिए इसे जानते हैं.
अश्विन ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 700 से ज्यादा विकेट अपने नाम किए हैं और टेस्ट में भारत की सबसे बड़ी ताकत साबित हुए हैं. अश्विन की गेंदबाजी का असली जलवा टेस्ट और वनडे जैसे लंबे फॉर्मेट में देखने को मिलता है. वे बल्लेबाजों को पढ़कर उन्हें आउट करने की कला रखते हैं. लेकिन टी20 जैसे तेज-तर्रार फॉर्मेट में बल्लेबाज रिस्क लेने से नहीं हिचकिचाते. अश्विन के पास भले ही कई तरह की वेरिएशन हों, लेकिन पिछले कुछ सालों में उनका स्ट्राइक रेट और इकॉनमी इस छोटे फॉर्मेट में उतनी प्रभावी नहीं रही, जितनी अन्य स्पिनरों की है.
विदेशी लीग्स में सीमित अनुभव
अश्विन ने आईपीएल में लंबा और सफल करियर जरूर खेला है, लेकिन विदेशी टी20 लीग्स में उनका अनुभव बेहद सीमित है. इंटरनेशनल लीग टी20 भले ही आईपीएल के मुकाबले कहीं स्टैंड ना करता हो लेकिन प्रतियोगिताओं में फ्रेंचाइजी ऐसे खिलाड़ियों को तरजीह देती हैं जो स्थानीय माहौल और अलग-अलग कंडीशंस में तुरंत एडजस्ट कर सकें. शायद यह एक वजह हो सकती है, जिसके कारण अश्विन में फ्रेंचाइजीज ने दिलचस्पी नहीं दिखाई. फ्रेंचाइजियों ने रिस्क लेने से बचना ही बेहतर समझा.
उम्र और टीम बैलेंस
अश्विन अब 38 की उम्र पार कर चुके हैं. ऐसे में टी20 जैसी तेज गति वाली लीग में टीमें अक्सर युवा और फुर्तीले खिलाड़ियों को प्राथमिकता देती हैं, जो लंबे समय तक स्क्वॉड को मजबूती दे सकें. फ्रेंचाइजियों को लगता है कि अश्विन जैसे अनुभवी खिलाड़ी पर भारी रकम खर्च करने से बेहतर है कि वे किसी ऐसे गेंदबाज को चुनें, जो आने वाले वर्षों तक टीम का हिस्सा रह सके.
पत्रकारिता में 14 साल से भी लंबे वक्त से सक्रिय हूं. साल 2010 में दैनिक भास्कर अखबार से करियर की शुरुआत करने के बाद नई दुनिया, दैनिक जागरण और पंजाब केसरी में एक रिपोर्टर के तौर पर काम किया. इस दौरान क्राइम और…और पढ़ें
पत्रकारिता में 14 साल से भी लंबे वक्त से सक्रिय हूं. साल 2010 में दैनिक भास्कर अखबार से करियर की शुरुआत करने के बाद नई दुनिया, दैनिक जागरण और पंजाब केसरी में एक रिपोर्टर के तौर पर काम किया. इस दौरान क्राइम और… और पढ़ें