सरकारी डॉक्टर के निजी क्लीनिक से लिखा गया था सिरप: डॉक्टर बोले-10 साल से लिख रहा हूं; सिवनी, बैतूल और बालाघाट में सप्लाई की आशंका – Madhya Pradesh News

सरकारी डॉक्टर के निजी क्लीनिक से लिखा गया था सिरप:  डॉक्टर बोले-10 साल से लिख रहा हूं; सिवनी, बैतूल और बालाघाट में सप्लाई की आशंका – Madhya Pradesh News


मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में 7 बच्चों की किडनी फेल होने के मामले में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। जिन दो कफ-सिरप, कोल्ड्रिफ (Coldrif) और नेक्सा डीएस (Nexa DS) को प्रशासन ने बैन किया है उन्हें प्राइवेट प्रैक्टिस करने वाले सरकारी डॉक्टरों ने भी अपने

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भास्कर की पड़ताल में ये भी पता चला कि ये आम दवाएं नहीं थीं जो हर मेडिकल स्टोर पर उपलब्ध हों। इन दवाओं को शहर के चुनिंदा और बड़े शिशु रोग विशेषज्ञ ही लिख रहे थे और यह सिरप उन्हीं के प्राइवेट क्लीनिक के आसपास स्थित गिने-चुने मेडिकल स्टोर्स पर बहुतायत में सप्लाई की जा रही थी।

मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने इन दोनों कफ-सिरप का प्रोडक्शन रुकवाने के लिए तमिलनाडु और हिमाचल प्रदेश की सरकारों को पत्र लिखा है, जहां ये दवाएं बनती हैं। फिलहाल, इन दवाओं के 13 सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं और प्रशासन अब यह पता लगाने में जुटा है कि इस संदिग्ध दवा की सप्लाई और कहां-कहां हुई है?

एक सिरप 20 साल पुरानी, दूसरी डेढ़ साल पहले आई

  • कोल्ड्रिफ: यह एक 20 साल पुरानी कंपनी है और यह कफ सिरप भी लंबे समय से बाजार में है। इसकी रिटेल कीमत 89 रुपए है।
  • नेक्सा डीएस: यह सिरप लगभग डेढ़ साल पहले ही बाजार में आया है। इसकी रिटेल कीमत 75 रुपए है।

डॉक्टरों और मेडिकल स्टोर्स का गठजोड़ छिंदवाड़ा में जिन 7 बच्चों की मौत हुई है वो सभी परासिया ब्लॉक के रहने वाले हैं। भास्कर की पड़ताल में सामने आया कि परासिया ब्लॉक के दो प्रमुख शिशु रोग विशेषज्ञों, डॉ. प्रवीण सोनी और डॉ. अमन सिद्दीकी का नाम सामने आया है, जिनके पर्चों पर कोल्ड्रिफ सिरप लिखा पाया गया है।

विशेष रूप से, डॉ. सोनी के परिवार के सदस्य ही उनके मेडिकल स्टोर का संचालन करते हैं, जहां यह दवा आसानी से उपलब्ध थी।

डॉ. प्रवीण सोनी ने उमरेठ के हितांश के लिए कोल्डरिफ सिरप लिखा था। हितांश की मौत हो चुकी है।

डॉ. प्रवीण सोनी ने उमरेठ के हितांश के लिए कोल्डरिफ सिरप लिखा था। हितांश की मौत हो चुकी है।

स्टॉकिस्ट बोले- रिपोर्ट से पता चलेगा सिरप से किडनी फेल हुई या नहीं छिंदवाड़ा में कोल्ड्रिफ के तीन और नेक्सा का एक स्टॉकिस्ट है। इनमें से एक, न्यू अपना फार्मा के स्टॉकिस्ट राजेश सोनी ने बताया, ‘ड्रग इंस्पेक्टर ने मेरे गोदाम से 170 बोतलें जब्त की हैं। हमने रिटेल मार्केट में बिक्री रोकने के लिए सभी स्टोर्स को पत्र लिखकर दवा वापस मंगवाई है।’

सोनी के अनुसार, सीजन में एक स्टॉकिस्ट हर महीने लगभग 250 सिरप सप्लाई करता है, जिससे महीने में 600 से ज्यादा बोतलों की सप्लाई का अनुमान है। वे सवाल उठाते हैं,’बाजार में अप्रैल 2025 की मैन्युफैक्चरिंग वाले SR 13 बैच की सप्लाई हुई थी। अगर कफ सिरप में समस्या थी तो अप्रैल से अब तक यह बात सामने क्यों नहीं आई?

कलेक्टर ने पाया कि जिन बच्चों की किडनी फेल हुई, उनमें से ज्यादातर ने ये दोनों सिरप ली थीं। इसी आधार पर इसे संदिग्ध मानकर बिक्री रोकी गई है। जब तक जांच रिपोर्ट नहीं आ जाती, यह कहना ठीक नहीं है कि सिरप से ही किडनी फेल हुई।”

डॉक्टर बोले- 10 साल से प्रिस्क्राइब कर रहे मामले में नाम आने पर परासिया सिविल अस्पताल में पदस्थ डॉ. प्रवीण सोनी ने अपनी सफाई दी। डॉ. सोनी परासिया के सबसे प्रमुख शिशु रोग विशेषज्ञों में हैं। सिविल अस्पताल की ड्यूटी के बाद वे प्राइवेट क्लिनिक में मरीज देखते हैं। उन्होंने कहा, ‘इस साल का वायरल पिछले सालों से अलग है। ऐसा लग रहा है कि वायरस म्यूटेट हुआ है।

वे कहते हैं कि लोग सर्दी-खांसी में खुद से दवा ले लेते हैं और हालत बिगड़ने पर हमारे पास आते हैं।’ उन्होंने आगे कहा, ‘मैं 38 साल से प्रैक्टिस कर रहा हूं। एमआर (मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव) आते हैं, दवा बताते हैं और हम रिजल्ट देखकर उसे लिखते हैं।’

सिवनी, बैतूल और बालाघाट में भी सप्लाई की आशंका फॉर्मा सेक्टर से जुड़े सूत्रों ने भास्कर को बताया कि छिंदवाड़ा से लगे पांढुर्णा, सिवनी, बैतूल और बालाघाट के भी कुछ चुनिंदा मेडिकल स्टोर्स में कोल्ड्रिफ और नेक्सा कफ सिरप की सप्लाई की गई है। हालांकि, ड्रग इंस्पेक्टर का कहना है कि यह उनके क्षेत्राधिकार से बाहर का विषय है और उन्होंने इस नेटवर्क की जानकारी अपनी रिपोर्ट में वरिष्ठ अधिकारियों को दे दी है।

छिंदवाड़ा के ड्रग इंस्पेक्टर गौरव शर्मा ने दैनिक भास्कर को बताया, ‘हमने अपनी रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को सौंप दी है। हम रिवर्स पड़ताल कर यह पता लगा रहे हैं कि यह दवा कहां-कहां सप्लाई हुई है।’

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मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा में किडनी फेल होने से 7 बच्चों की मौत हो चुकी है। 7वें बच्चे ने नागपुर में इलाज के दौरान दम तोड़ा। जिन दवाओं से बच्चों को आराम मिलना चाहिए था, वही उनकी जान जाने की वजह बन गईं। जांच में सामने आया कि खांसी की सिरप में व्हीकल इंडस्ट्री में इस्तेमाल होने वाला केमिकल एथिलीन ग्लाइकॉल और डाइएथिलीन ग्लाइकॉल मिला हुआ था। यह वही जहरीला केमिकल है, जिसे गाड़ियों के कूलेंट और एंटी फ्रीज में इस्तेमाल किया जाता है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें



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