MP Politics: ग्वालियर में भाजपा के दो प्रमुख गुटों के बीच कोल्ड वॉर जारी है. केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और विधानसभा स्पीकर नरेंद्र सिंह तोमर के समर्थकों में सियासी खींचतान तेज हो गई है. इसकी ताजा मिसाल सोमवार को कलेक्ट्रेट में हुई विकास कार्यों की समीक्षा बैठक है, जहां सिंधिया गुट के नेताओं ने हिस्सा लिया, लेकिन तोमर गुट के सांसद भारत सिंह कुशवाहा नदारद रहे.
सिंधिया ने शहर की सड़कों की खराब हालत को भी स्वीकार किया. उन्होंने कहा कि गड्ढों से भरी सड़कों को ठीक करने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए. सड़कों को लाल और पीले रंग में वर्गीकृत करने का सुझाव दिया, जहां लाल रंग वाली सड़कें सबसे ज्यादा क्षतिग्रस्त होंगी. इसके अलावा, सीवर सिस्टम, साफ-सफाई और पेयजल की समस्याओं पर भी विचार-विमर्श हुआ. सिंधिया ने केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का आभार माना, जिनकी मदद से ये प्रोजेक्ट आगे बढ़ रहे हैं.
लेकिन बैठक में सांसद भारत सिंह कुशवाहा की अनुपस्थिति ने सबकी भौंहें चढ़ा दीं. कुशवाहा को तोमर गुट का प्रमुख समर्थक माना जाता है. कुछ दिन पहले ही सांसद ने खुद विकास कार्यों की बैठक बुलाई थी, लेकिन सिंधिया की इस मीटिंग से दूरी ने गुटबाजी की अटकलों को हवा दे दी. राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में सिंधिया का प्रभाव बढ़ रहा है, जिससे तोमर गुट में असहजता है. लोकसभा चुनाव के बाद से सिंधिया ने ग्वालियर के विकास से कुछ दूरी बनाई थी, लेकिन अब उनकी सक्रियता से स्थानीय भाजपा नेताओं में टेंशन बढ़ गई है.
ग्वालियर-चंबल संभाग भाजपा का मजबूत गढ़ रहा है, लेकिन सिंधिया के भाजपा में आने के बाद से तोमर का वर्चस्व कम हुआ है. हाल ही में विजयपुर उपचुनाव और अन्य घटनाओं ने इस जंग को और तेज किया. सिंधिया गुट का दावा है कि विकास कार्यों में उनकी भूमिका अहम है, जबकि तोमर गुट संगठनात्मक मजबूती पर जोर देता है. जिला अध्यक्ष पद और अन्य नियुक्तियों में भी इसी गुटबाजी का असर दिख रहा है.
पार्टी नेताओं का कहना है कि यह कोल्ड वॉर बिहार चुनाव या आगामी संगठन चुनावों तक प्रभावित कर सकती है. सिंधिया ने बैठक में जोर देकर कहा कि ग्वालियर ऐतिहासिक शहर है और इसका विकास क्षेत्र की प्रगति का प्रतीक बनेगा. लेकिन सांसद की गैरमौजूदगी ने सवाल खड़े कर दिए कि क्या यह सिर्फ विकास की बैठक थी या सियासी संदेश? स्थानीय कार्यकर्ता उम्मीद कर रहे हैं कि गुटबाजी न होकर विकास पर फोकस रहे. कुल मिलाकर, ग्वालियर की राजनीति में सिंधिया की वापसी ने नई चर्चाएं शुरू कर दी हैं.