बालाघाट में अखंड सौभाग्य का महापर्व करवा चौथ शुक्रवार को पारंपरिक श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। सुहागन महिलाओं ने अपने पति की लंबी आयु के लिए निर्जला व्रत रखा है, जिसे वे रात को चंद्रमा के दर्शन, जल का अर्घ्य और पति के हाथों पानी पीकर खोल
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यह पर्व वैसे तो सभी समाज की महिलाएं रखती हैं, जिसमें भगवान शिव, माता पार्वती, कार्तिकेय और भगवान गणेश सहित चंद्रमा की पूजा-अर्चना की जाती है। लेकिन बालाघाट जिले का पंजाबी और सिंधी समाज इस पूजन को सामूहिक रूप से मनाता है।
पंजाबी और सिंधी समाज की सुहागन महिलाएं सामूहिक रूप से माता करवा की कथा का वाचन कर विशेष आराधना करती हैं। शहर में दो स्थानों गांधी परिवार के बाड़े और नए श्रीराम मंदिर में सामूहिक करवा पूजन का आयोजन किया गया है।
सरगी से लेकर अर्घ्य तक की परंपरा
पंजाबी समाज की महिला राज गांधी ने पूजन की परंपराओं के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि उनके समाज में करवा चौथ का व्रत परंपरा के अनुसार होता है।
- सरगी: घर की बुजुर्ग महिला व्रत रखने वाली महिलाओं को सरगी का सगुन करती है। व्रत रखने वाली महिलाएं सुबह 5 बजे तक तारों की छांव में सरगी में फेनी, मिष्ठान, नारियल का प्रसाद और भोजन लेती हैं, जिसके बाद निर्जला व्रत शुरू होता है।
- पूजन और भेंट: शाम को पूजा करने के बाद, जिस थाली से पूजा की जाती है, उसमें बुजुर्गों को भेंट देने के लिए सगुन रखा जाता है।
- व्रत खोलना: रात को चांद दिखने पर महिलाएं चांद को पहला अर्घ्य देती हैं, बुजुर्गों को भेंट देती हैं। इसके बाद चांद का विधिवत पूजन कर और अर्घ्य देकर, छलनी में चांद को देखकर और पति के हाथों पानी पीकर अपना निर्जला व्रत खोलती हैं।
चांद दिखने में हो सकती है देरी
जहां दोपहर तक मौसम खुला था, वहीं शाम ढलते ही बालाघाट के आसमान में काले बादल छा गए हैं और वर्तमान में रिमझिम बारिश हो रही है। इस बदले मौसम के कारण, व्रत रखने वाली महिलाओं को चाँद दिखने में समय लग सकता है, जिससे उनके व्रत खोलने का इंतजार थोड़ा लंबा हो सकता है।