Narmda Parikrama: कब से शुरू होगी नर्मदा परिक्रमा? दुनिया की इकलौती नदी… जिसकी होती है पूर्ण परिक्रमा, जानें सब

Narmda Parikrama: कब से शुरू होगी नर्मदा परिक्रमा? दुनिया की इकलौती नदी… जिसकी होती है पूर्ण परिक्रमा, जानें सब


Khargone News: मध्य प्रदेश की जीवनदायिनी मां नर्मदा देश की इकलौती ऐसी नदी है, जिनकी पूर्ण परिक्रमा की जाती है. श्रद्धालु इसे केवल नदी नहीं, बल्कि मां का स्वरूप मानते हैं. हर साल लाखों भक्त नर्मदा तटों के किनारे परिक्रमा करते हैं. वर्षा ऋतु में चार महीने परिक्रमा बंद रहती है, लेकिन अब देव उठनी एकादशी के साथ फिर से इसकी शुरुआत होने जा रही है. वैसे तो पूरे वर्ष नर्मदा परिक्रमा की जा सकती है.

लेकिन, देव उठनी एकादशी से देव शयनी एकादशी तक ही परिक्रमा होती है. वर्षा ऋतु के चार महीने परिक्रमा नहीं होती. इस साल 1 नवंबर 2025 को देव उठनी एकादशी है. इसी दिन चातुर्मास समाप्त होगा और परिक्रमा वासी फिर से अपनी यात्रा शुरू करेंगे. साधु-संत वहीं से परिक्रमा आगे बढ़ाएंगे, जहां वर्षा से पहले रुके थे. वहीं, लाखों नए श्रद्धालु भी इसी दिन ओंकारेश्वर या अमरकंटक से नर्मदा परिक्रमा की शुरुआत करेंगे.

3500 किमी का सफर
बता दें कि नर्मदा नदी की कुल लंबाई करीब 1312 किमी है, लेकिन परिक्रमा के दौरान यात्रियों को दोनों तटों से होते हुए करीब 3500 किमी का सफर तय करना पड़ता है. इनमें लगभग 2000 किमी का मार्ग मध्य प्रदेश में पड़ता है. वहीं, नर्मदा परिक्रमा के 3 स्वरूप माने गए हैं. जो इस प्रकार हैं.

पूर्ण परिक्रमा: लगभग 3 साल 3 महीने 13 दिन में पूरी होती है. साधु-संत इसे पैदल करते हैं. इस दौरान वे तीन बार चातुर्मास करते हैं.
सामान्य परिक्रमा: 90 से 180 दिन में पैदल यात्रा पूरी हो जाती है. ज़्यादातर लोग यही परिक्रमा करते है. इसमें परिक्रमा वासी प्रति दिन 20 से 40 किलो मीटर की दूरी पैदल तय करते हुए आगे बढ़ता है.
संक्षिप्त परिक्रमा: कार, बस या बाइक से कुछ ही दिनों में पूरी की जा सकती है. यह परिक्रमा वे लोग करते है जो चलने में सक्षम नहीं है या समय का अभाव है. ऐसे लोग 15 से 20 दिन में ही यात्रा पूरी कर लेते है.

परिक्रमा की शुरुआत कहां से करें?
धार्मिक परंपराओं के अनुसार नर्मदा परिक्रमा हमेशा दक्षिण दिशा से प्रारम्भ होती है. यानी परिक्रमा मार्ग पर चलते नर्मदा हमारे दाहिने (सीधे) हाथ की और होना चाहिए. इसका उद्गम स्थल अमरकंटक है, लेकिन अधिकतर लोग ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग से परिक्रमा शुरू करते हैं. पंडित पंकज मेहता बताते है कि, शास्त्रों में कहा गया है कि नर्मदा परिक्रमा पूर्ण करने के बाद ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग पर जल अर्पण करना आवश्यक है, तभी परिक्रमा पूर्ण मानी जाती है. इसलिए अधिकतर श्रद्धालु अपनी परिक्रमा यहीं से प्रारंभ करते हैं ताकि अंत में फिर से ओंकारेश्वर लौट सकें.

नर्मदा परिक्रमा मार्ग
दक्षिण तट से यात्रा प्रारंभ करने पर अमरकंटक, डिंडोरी, जबलपुर, नरसिंहपुर, करेली,  होशंगाबाद (नर्मदापुरम), हंडिया, ओंकारेश्वर, तेली भटियाण, नावड़ातोड़ी, खलघाट, बड़वानी, शहादा, राजपिपला, अंकलेश्वर, हंसोड़, विमलेश्वर. फिर यहां से तट परिवर्तन के बाद भरूच, छापेश्वर से गुजरात होते हुए मध्य प्रदेश में इंदौर, मांडू, महेश्वर, मंडलेश्वर, बड़वाह, नेमावर, बुधनी, बोरास, बरमान घाट, भेड़ाघाट, जबलपुर, ग्वारीघाट, मंडला, चौरा माल, कपिल धारा से अमरकंटक.



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