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Kadaknath Business: बस थोड़ी मेहनत, सही देखभाल और थोड़े निवेश से आप भी गांव में बैठकर लखपति किसान बन सकते हैं। जैसे पश्चिम चंपारण और मध्य प्रदेश के किसान आज इन नस्लों से अपनी जिंदगी बदल रहे हैं, वैसे ही आप भी बदल सकते हैं अपनी किस्मत मुर्गी पालन से मुनाफे की राह पकड़कर!
आज के समय में खेती-किसानी के साथ-साथ पशुपालन किसानों की आमदनी बढ़ाने का सबसे आसान और भरोसेमंद जरिया बन गया है. खासतौर पर मुर्गी पालन (Poultry Farming) ऐसा व्यवसाय है, जिसे कम लागत में शुरू किया जा सकता है और कुछ ही महीनों में अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है. लेकिन ज्यादातर लोग यह नहीं जानते कि मुर्गी पालन में कौन सी नस्ल सबसे अधिक लाभदायक होती है. इस लेख में हम बात करेंगे ऐसी दो खास नस्लों की वनराजा और कड़कनाथ, जिनका पालन कर किसान कुछ ही महीनों में लखपति बन सकते हैं.
वनराजा मुर्गी को वैज्ञानिक तरीके से विकसित किया गया है. यह नस्ल भारत की जलवायु के लिए पूरी तरह अनुकूल है और गांवों के खुले वातावरण में भी आसानी से पाली जा सकती है. इसकी सबसे बड़ी खासियत है कि यह सिर्फ 60 दिनों में अंडे देने लगती है, जबकि दूसरी नस्लों को तैयार होने में 90 से 100 दिन लगते हैं. वनराजा मुर्गी की प्रतिदिन अंडे देने की क्षमता भी काफी अधिक होती है. एक साल में यह लगभग 150 से 180 अंडे दे देती है. इन अंडों की कीमत भी सामान्य अंडों से अधिक होती है क्योंकि इसमें पोषक तत्व ज्यादा पाए जाते हैं. इसके अलावा वनराजा का मांस भी बहुत स्वादिष्ट और कम चिकना होता है, इसलिए बाजार में इसकी डिमांड हमेशा बनी रहती है. इस नस्ल की एक और खासियत यह है कि बीमारियां इसे बहुत कम होती हैं. इसे पालने के लिए किसी बड़े शेड या खास वातावरण की जरूरत नहीं होती. बस सुबह-शाम दाना-पानी और हल्की देखभाल से यह तेजी से बढ़ती है.
कड़कनाथ: ब्लैक गोल्ड ऑफ इंडिया
अब बात करते हैं दूसरी खास नस्ल कड़कनाथ की, जिसे “ब्लैक गोल्ड” भी कहा जाता है. यह नस्ल मध्य प्रदेश के झाबुआ क्षेत्र की मूल प्रजाति है और इसकी पहचान इसके काले रंग के मांस और उच्च प्रोटीन के कारण होती है. कड़कनाथ मुर्गे का मांस न सिर्फ स्वादिष्ट होता है बल्कि औषधीय गुणों से भरपूर होता है. इसमें कोलेस्ट्रॉल बहुत कम और प्रोटीन अधिक होता है, इसलिए डॉक्टर भी इसे स्वास्थ्य के लिए बेहतर बताते हैं. बाजार में इसका मांस ₹800 से ₹1200 प्रति किलो तक बिकता है, जबकि इसका अंडा ₹25 से ₹40 तक में आसानी से मिल जाता है. एग्रीकल्चर कॉलेज खंडवा के डॉ. रावत बताते हैं कि कड़कनाथ नस्ल का पालन किसानों के लिए सोने पर सुहागा साबित हो रहा है. कॉलेज में इसके पालन की ट्रेनिंग और चुजे दोनों दिए जाते हैं. डॉ. रावत कहते हैं कि यह नस्ल बहुत मजबूत होती है और हमारे यहां कई किसान इसे बड़े स्तर पर पाल रहे हैं. इसकी मांग देश ही नहीं विदेश में भी है.
पालन में कम खर्च, मुनाफा दोगुना
वनराजा और कड़कनाथ दोनों नस्लें ऐसी हैं जिन्हें कम पूंजी में शुरू किया जा सकता है. शुरुआत में 50 से 100 चूजों से भी आप पोल्ट्री फार्मिंग शुरू कर सकते हैं. एक चूजा औसतन ₹50 से ₹80 में मिल जाता है और दो महीनों में अंडे देने लगता है. आपको बस एक साधारण शेड बनाना होता है जिसमें रोशनी, पानी और हवा का उचित इंतजाम हो. हर दिन दो बार दाना और साफ पानी देने से ये तेजी से बढ़ती हैं. अगर किसान सही तरीके से देखभाल करें, तो सिर्फ 4 से 6 महीनों में ही ₹1 लाख तक की कमाई संभव है.
सरकार की मदद और प्रशिक्षण
मुर्गी पालन को बढ़ावा देने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें कई योजनाएं चला रही हैं. इसके तहत किसानों को सब्सिडी, प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता दी जाती है. एग्रीकल्चर कॉलेज, कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) और ग्रामीण आजीविका मिशन जैसे संस्थान समय-समय पर ट्रेनिंग प्रोग्राम भी आयोजित करते हैं, जिनसे किसान आधुनिक तरीके से मुर्गी पालन सीख सकते हैं.
Shweta Singh, currently working with News18MPCG (Digital), has been crafting impactful stories in digital journalism for more than two years. From hyperlocal issues to politics, crime, astrology, and lifestyle,…और पढ़ें
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