गड़बड़ी मिलने पर जिला पंचायत सीईओ ने कार्रवाई की है।
बैतूल जिले की जनपद पंचायत में आदिवासी छात्रावासों के बिजली बिलों में लगभग 40 लाख रुपए का घोटाला सामने आया है। मध्य प्रदेश विद्युत वितरण कंपनी (MPEB) के नाम से बने बिलों की राशि निजी खातों में ट्रांसफर की गई थी। इस मामले में शुक्रवार को प्रशासन ने तीन
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जनपद पंचायत बैतूल की सीईओ शिवानी राय ने हाल ही में छात्रावासों के बिजली बिलों के भुगतान रिकॉर्ड की जांच की। जांच के दौरान, उन्होंने पाया कि MPEB को किए गए भुगतान के खाते के नंबर वास्तविक खाते से मेल नहीं खा रहे थे।
संदिग्ध भुगतान की जानकारी मिलने पर उन्होंने यह बात जिला पंचायत बैतूल के सीईओ अक्षत जैन को बताई। जिला पंचायत सीईओ ने जनपद सीईओ और ट्रेजरी ऑफिसर से जांच करवाई, जिसमें खुलासा हुआ कि लगभग 40 लाख रुपए के बिल MPEB के नाम पर थे, लेकिन भुगतान के समय खाता नंबर बदलकर चार अलग-अलग निजी व्यक्तियों के खातों में राशि जमा कर दी गई।
कंप्यूटर ऑपरेटर ने गलती स्वीकार की प्राथमिक जांच में, जनपद के कंप्यूटर ऑपरेटर ने स्वीकार किया कि खाते के नंबर में बदलाव उसी ने किया था। यह धोखाधड़ी पिछले दो वर्षों से जारी थी, जिसमें जनजातीय विभाग के तीन कर्मचारी, जो जनपद में संलग्न थे, शामिल पाए गए।
जांच में दोषी पाए गए कर्मचारियों में चपरासी क्षत्रपाल मस्कोले, सहायक ग्रेड-3 नितेन्द्र पांडे और सहायक ग्रेड-2 वर्षा कमाविसदार शामिल हैं। इन तीनों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। यह पूरा घोटाला बैतूल ब्लॉक के आदिवासी छात्रावासों के बिजली बिलों से संबंधित है, जिनका भुगतान जनजातीय विभाग द्वारा किया जाना था।
पहले ढाई करोड़ का घोटाला सामने आ चुका गौरतलब है कि जिले में इससे पहले जे.एच. कॉलेज में छात्रवृत्ति वितरण में करीब ढाई करोड़ रुपए का घोटाला उजागर हुआ था। उस मामले में भी ट्राइबल विभाग के कर्मचारी शामिल पाए गए थे। फरार दो आरोपी हाल ही में पुलिस के हत्थे चढ़े हैं।