बालाघाट के ऐसे ‘दानवीर’, जिन्हें अंग्रेज भी करते थे सलाम, जानिए कौन थे दीवान बहादुर मुलना

बालाघाट के ऐसे ‘दानवीर’, जिन्हें अंग्रेज भी करते थे सलाम, जानिए कौन थे दीवान बहादुर मुलना


Last Updated:

Who is Diwan Bahadur Mulna: बालाघाट के ‘दानवीर’ दीवान बहादुर मानेकजी मुलना वो शख्स थे, जिन्होंने अपने शहर के विकास के लिए जमीन, कॉलेज और प्लांट तक दान कर दिए. अंग्रेजों ने भी उन्हें उनकी निस्वार्थ सेवा के लिए ‘दीवान बहादुर’ की उपाधि से नवाज़ा था.

Balaghat News: हर शहर में एक ऐसा शख्स होता है, जो जनहित में ऐसे काम करता है कि आने वाली कई पीढ़ियां उन्हें याद करती हैं. ऐसे ही एक शख्स बालाघाट में भी हैं, जिन्होंने विकास में अहम योगदान दिया है. उन्होंने शिक्षा, खेल और शहर के विकास में बेहद अहम योगदान दिया है. ऐसे में यहां कि जनता भी उन्हें बड़े ही सम्मान के साथ याद करती है. हम बात कर रहे हैं दीवान बहादुर मानेकजी मेरवानजी मुलना की. उन्होंने अपनी संपत्ति का एक बड़ा हिस्सा बालाघाट के विकास के लिए दान कर दिया. जानिए उनकी पूरी कहानी…

दीवान बहादुर मुलना को एक दानी के रूप में जाना जाता है. उन्होंने अपनी संपत्ति का एक बड़ा हिस्सा दान दिया था. बालाघाट में उन्होंने पॉलिटेक्निक कॉलेज की जमीन और बिल्डिंग भी दान दी. वहीं, बालाघाट का एकमात्र मुलना खेल परिसर, फिल्टर प्लांट, नगरपालिका का दफ्तर सहित कई एकड़ जमीन भी जिले के विकास के लिए दान में दे दी. इसलिए उन्हें बालाघाट का दानवीर भी कहा जाता है.  उन्होंने जरूरतमंद पारसियों को शैक्षिक और चिकित्सा सहायता के लिए एनपीपी को 3.70 लाख रुपये दिए.

अंग्रेज भी करते थे सलाम
दीवान बहादुर मुलना को उनकी निस्वार्थ सार्वजनिक सेवा के लिए उन्हें ओबीई की उपाधि से सम्मानित किया गया. इसके बाद उन्होंने दूसरे विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश सरकार की मदद भी थी. तब से ही अंग्रेजों ने उन्हें ‘दीवान बहादुर’ की उपाधि से सम्मानित किया था. ऐसे में कहा जा सकता है कि अंग्रेज भी उन्हें सलाम करते थे.

बॉम्बे जन्मभूमि और बालाघाट कर्मभूमि
मानेकजी मेहरवानजी मुलान ओबीई का जन्म 25 अक्टूबर 1868-02 जुलाई 1957 को  बॉम्बे में हुआ था.  उन्होंने अपनी शिक्षा नागपुर के मॉरिस कॉलेज से पूरी की, जहां उन्होंने कानून की पढ़ाई की. उनकी प्रैक्टिस उन्हें बालाघाट ले गयी. उन्होंने लंदन की प्रिवी काउंसिल में चंदनलाल भाऊ नामक बालाघाट के एक प्रमुख जमींदार के लिए सफलतापूर्वक मुकदमा लड़ने और जीतने के बाद अपनी पहचान बनाई .

इसके बाद जमींदार ने उन्हें जमीन उपहार में दी और उनसे बालाघाट में बसने और वहीं अपनी प्रैक्टिस जारी रखने का आग्रह किया. वे बालाघाट में कई महत्वपूर्ण पदों पर रहे और सभी शैक्षिक, चिकित्सा, सहकारी और ग्राम उत्थान कार्यों से जुड़े रहे.

Dallu Slathia

Dallu Slathia is a seasoned digital journalist with over 7 years of experience, currently leading editorial efforts across Madhya Pradesh and Chhattisgarh. She specializes in crafting compelling stories across …और पढ़ें

Dallu Slathia is a seasoned digital journalist with over 7 years of experience, currently leading editorial efforts across Madhya Pradesh and Chhattisgarh. She specializes in crafting compelling stories across … और पढ़ें

न्यूज़18 हिंदी को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।
homemadhya-pradesh

ऐसे ‘दानवीर’ जिन्हें अंग्रेज भी करते थे सलाम, जानिए कौन थे दीवान बहादुर मुलना?



Source link