इस बार फसल अच्छी हुई है। फसल बेचकर सब ठीक हो जाएगा। बेटी का भी अच्छा रिश्ता कर दूंगा। लेकिन बारिश ने उनकी आखिरी उम्मीद भी डुबो दी। फसल बर्बाद हुई तो वो टूट गए। चार-पांच दिन से उदास रहने लगे। 31 अक्टूबर को भी खेत पर जाने की बोलकर चले गए और फिर कभी वाप
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ये कहना है सुसाइड करने वाले किसान मुकेश गुर्जर की पत्नी लक्ष्मी गुर्जर का। मुरैना के बानमौर तहसील के टीकरी गांव में किसान मुकेश ने कर्ज के चलते खेत के पास पेड़ से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी।
31 अक्टूबर को सुबह घर से खेत पर जाने की बात कहकर निकले 39 वर्षीय मुकेश गुर्जर शाम तक घर नहीं लौटे। 1 नवंबर की रात कुछ लोगों ने मुकेश अपने खेत से दो खेत दूर एक पेड़ पर फांसी के फंदे से लटका हुआ देखा। ग्रामीणों ने परिजनों और पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने मर्ग कायम कर मामला जांच में लिया और 2 नवंबर को शाम चार बजे उनका अंतिम संस्कार किया गया।
1 नवंबर की रात लोगों ने मुकेश की बॉडी को पेड़ ले लटके हुए देखा।
दो लाख की जमीन ठेके पर लेकर खेती करता था
मुकेश के पिता रामनाथ गुर्जर के हिस्से में साढ़े चार बीघा जमीन थी। तीन भाइयों में बंटवारे के बाद मुकेश के हिस्से में केवल डेढ़ बीघा जमीन आई। खेती के अलावा मुकेश को कोई दूसरा काम नहीं आता था, इसलिए वे हर साल चाचा और रिश्तेदारों से 10 बीघा जमीन ठेके पर लेकर खेती करता था। इस जमीन के एवज में उसे प्रति बीघा 20 हजार रुपए सालाना के हिसाब से कुल 2 लाख रुपए चुकाने थे। इस साल अतिवर्षा के कारण 10 बीघा में बोई धान की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई, जिस कारण जमीन मालिकों को दो लाख रुपए देने की चिंता उसे सताने लगी। फसल और कर्ज दोनों के दबाव में आकर उसने आत्महत्या कर लिया।

मुकेश की 4-5 बीघे की फसल बारिश में बर्बाद हो गई थी।
तीन महीने पहले दो लाख की भैंस मर गई थी
अगस्त महीने में मुकेश की लगभग दो लाख रुपए कीमत की भैंस बीमारी के कारण मर गई। भैंस का दूध बेचकर घर का कुछ गुजारा चलता था, इसलिए भैंस की मौत से पारिवारिक आय पर बड़ा असर पड़ा। पत्नी लक्ष्मी और बेटी ज्योति के अनुसार भैंस के मरने के बाद मुकेश डिप्रेशन में आ गए थे, लेकिन फसल अच्छी दिखने की वजह से आशा थी कि कर्ज चुक जाएगा। पत्नी लक्ष्मी बताती है –
मुकेश कहते थे कि फसल बेचकर सब ठीक हो जाएगा। बेटी का भी रिश्ता अच्छी जगह तय करूंगा, लेकिन अतिवर्षा ने यह उम्मीद भी तोड़ दी।

अतिवर्षा के कारण धान की पकी हुई फसल पूरी नष्ट हो गई, जिससे मुकेश की चिंता बढ़ गई। परिजन बताते हैं कि वह चार-पांच दिन से उदास रह रहे थे, घर पर चादर ओढ़कर सोते रहते या खेत जाकर चौपट हुई फसल को देखकर दुखी होते थे। पत्नी-बेटी ने कहा कि वह बार-बार यही बोलते थे कि आखिर जमीन के पैसे कैसे चुकाऊंगा और फसल, बीज-खाद का भी कुछ उधार पड़ा हुआ था जिसे कैसे चुकाएंगे, यह सोचकर चुप्पी छा जाती थी।

किसान की आत्महत्या के बाद परिवार में मातम पसरा हुआ है।
मुकेश अपने पीछे पत्नी लक्ष्मी गुर्जर, 12वीं में पढ़ रही बेटी ज्योति, 10 वीं में पढ़ रहा बेटा सौरभ और 8वीं पढ़ रहा बेटा जयदीप को छोड़ गए हैं। परिवार पर मातम छाया हुआ है और पत्नी-बेटी का रो-रोकर बुरा हाल हैं। पत्नी ने अपने दुख में कहा कि अब हम किसके सहारे जिएंगे। मेरे बच्चों को कौन देखेगा।
पिता बोले- कभी सोचा नहीं था, बेटे की मौत देखनी पड़ेगी
मुकेश के पिता रामनाथ गुर्जर ने कहा कि मुकेश हमेशा शांत रहता था। उसने कर्ज की गंभीरता कभी खुलकर परिवार को नहीं बताई। मुकेश ने ठेके पर जमीन ली थी, लेकिन बारिश से फसल चौपट हो गई, खाद-बीज के लिए भी उसने गांव से उधार लिया था। भैंस की मौत और लगातार आर्थिक नुकसान वह सहन नहीं कर पाया।

एक ही कमरे में पत्नी और बच्चों के साथ रहता था
मुकेश का छोटा भाई बलबीर गुर्जर 2005 में सरपंच रह चुका है। बलबीर के अनुसार मुकेश ने कभी आर्थिक तंगी के बारे में भाइयों से चर्चा नहीं की, जबकि सभी एक ही सम्मिलित मकान में रहते है। अगर मुकेश बता देता तो कुछ मिलकर कुछ हल निकाल लेते। यह सही है पूरे इलाके की फसल बर्बाद हुई है जिसमें मुकेश की हमारी सभी की है, लेकिन उसको इतना बड़ा कदम नहीं उठाना चाहिए था। उसकी पत्नी का बेटी और बेटों का क्या होगा।
चचेरे भाई पटेल गुर्जर ने कहा कि मुकेश की आर्थिक स्थिति शुरू से ठीक नहीं थी। वह मेहनत कर ही अपने परिवार को पालता था। उन्होंने कहा कि रहने के नाम पर भी उसके पास घर बंटवारे में मिला एक ही कमरा है, जिसमें वह पत्नी और बच्चों के साथ रहता था। पटेल ने यह भी कहा कि भैंस के मरने और फसल बर्बाद होने के बाद कोई प्रशासनिक अधिकारी या पटवारी नहीं आया।

पटवारी भी किसान के घर पहुंचे, ग्रामीणों ने सर्वे से इनकार किया
मृतक मुकेश गुर्जर के घर हल्का पटवारी गौरव शर्मा भी पहुंचे। पटवारी के अनुसार वह फसल नुकसान का सर्वे कर चुके हैं। अब कृषि विभाग बताएगा कि कितना नुकसान हुआ। उन्होंने कहा कि हमने गांव-गांव घूमकर फसल सर्वे किया है। हालांकि हर खेत पर जाना संभव नहीं हो पाता है, लेकिन मुकेश का भी सर्वे हुई है। इधर ग्रामीणों ने पटवारी के सामने ही सर्वे होने से मना कर दिया। बताया गया कि सर्वे सही ढंग से हुआ ही नहीं।