उज्जैन का चलता-फिरता गोल्डनमैन, सोना पहन दूर से ही चमकते हैं रोशन, जानिए किससे मिली प्रेरणा

उज्जैन का चलता-फिरता गोल्डनमैन, सोना पहन दूर से ही चमकते हैं रोशन, जानिए किससे मिली प्रेरणा


Ujjain Golden Man: सोशल मिडिया का जैसे-जैसे चलन बढ़ते जा रहा है. वैसे ही उज्जैन का रोशन यादव नाम का शख्स के फॉलोवर्स बढ़ते हुए नजर आ रहे है. उज्जैन का यह शख्स की सोने के गहनों को लेकर दीवानगी इस कदर है कि वह एक किलो से ज्यादा जेवर पहनते हैं. इसी शौक के कारण लोग उन्हें गोल्डमैन के नाम से जानते हैं. वे 40 से ज्यादा बार ब्लड डोनेट कर चुके हैं. वह ब्लड बैंक भी चलाते हैं. इसके अलावा, होटल पर टोकन सिस्टम से गरीबों को खाना भी खिलवाते हैं.

दरअसल, उमहाकाल की नगरी उज्जैन में रहने वाले रोशन यादव के सोशल मीडिया पर लाखों फॉलोवर्स, करोड़ों व्यू हैं. सोशल मीडिया रील में एक सामाजिक संदेश भी देते हैं. इनके पहनावे से बच्चे, युवा खूब आकर्षित होते हैं. जहां से निकलते हैं, सेल्फी लेने वालों की भीड़ लग जाती है. इसके अलावा समाज सेवा में भी गोल्डन मैन की रुचि है. खुद का ब्लड बैंक बनाया और बीते 25 सालों से जरूरतमंदों की मदद कर रहे हैं.

परिवार में सबको देखा फिर लगा शौक 
उज्जैन के रोशन यादव प्रॉपर्टी, खेती किसानी के साथ दूध का बिजनेस करते हैं. रोशन बताते हैं, सोना पहनने का शौक परिवार को है, लेकिन मैंने सोना तब से पहनना शुरू किया, जब सोने की कीमत 5 हज़ार से 10 हजार रुपए तोला थी, तभी से मैं धीरे-धीरे जेवरात बनवाने लगा. वर्तमान में करीब सात गुना दाम बढ़ गए, लेकिन मैंने सोना खरीदना नहीं छोड़ा. मैं सोने को इन्वेस्टमेंट के रूप में देखता हूं, इसलिए जब जी होता है, खरीद लेता हूं.

रोजाना डेढ़ किलो पहनकर निकलते हैं बाजार 
रोशन बताते हैं, गहनों में 350 ग्राम का ब्रेसलेट, 5 अंगूठी, चार चेन, 200 ग्राम की लॉकेट, कान की बाली शामिल हैं. महाकाल की कृपा से कोई डर नहीं लगता है. सोना सिर्फ रतलाम से खरीदता हूं. दीपावली के बाद गोवर्धन पूजन के दिन परिवार करीब 10 किलो सोना पहनकर रखता है.

परिवार में इतने लोग है शामिल 
रोशन यादव ने बताया कि शाम 5 बजे के बाद का समय लोगों के लिए होता है. शहर के इंदौर गेट पर लोगों से मिलता हूं. मेरे पिता शहर के शासकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज में प्रोफेसर रहे हैं. जिनका नाम गुलाब चंद यादव है और आज 87 उम्र है. माता इमरत बाई हैं. 1 भाई है और दो बच्चे हैं. बेटी वकील और बेटे ने हाल ही में इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की है.

कहा से मिली सोना पहनने की प्रेरणा 
उज्जैन के गोल्डन मैन रोशन यादव का कहना है कि 1-1 घंटे मुख्यमंत्री मोहन यादव के पिता पूनमचंद यादव के साथ खेत पर जाने के दौरान बैठना होता था. उनका आशीर्वाद मिलता था. उन्हीं से मुझे सोने में इन्वेस्ट करने की प्रेरणा मिली, वो अक्सर कहते थे इन्वेस्ट करना है. पैसे को सोना यानी गोल्ड और जमीन में इंवेस्ट करो. मेरा जमीन में इन्वेस्ट करने का शौक तो नहीं रहा, लेकिन गोल्ड में किया.

रोजाना कराते हैं कई को भोजन 
रोशन यादव लोगों की मदद करने में भी पीछे नहीं हैं. किसी की जेब कट जाए, तो उसे घर तक पहुंचाते हैं. किसी के पास रोजगार नहीं हो, तो उसकी भी मदद कर देते हैं. भूखे को खाना खिलाने के लिए होटल पर टोकन सिस्टम चालू करवा रखा है. जहां रोशन यादव के टोकन से खाना फ्री मिल जाता है, जिसका भुगतान वह बाद में करते हैं. हाल में 200 पौधे भी कार में रखकर बांटे थे. पंचकोशी यात्रा में लोगों को जूते-चप्पल भी बांटे थे.



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