बच्चेदानी की जगह ट्यूब में बढ़ रहा बच्चा: मॉडल खुशबू की मौत की यही वजह, स्मोकिंग करने वाली युवतियों में ऐसा होने का ज्यादा खतरा – Madhya Pradesh News

बच्चेदानी की जगह ट्यूब में बढ़ रहा बच्चा:  मॉडल खुशबू की मौत की यही वजह, स्मोकिंग करने वाली युवतियों में ऐसा होने का ज्यादा खतरा – Madhya Pradesh News


22 साल की सोनाली (बदला हुआ नाम) अस्पताल की सीढ़ियां उतर रही थी कि अचानक उसे कमजोरी महसूस हुई और वह चक्कर खाकर गिर पड़ी। डॉक्टरों की एक टीम तुरंत उसे उठाकर इमरजेंसी में ले गई। शुरुआती जांच के बाद जब उसका प्रेग्नेंसी टेस्ट किया गया तो एक चौंकाने वाली स

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सोनाली गर्भवती तो थी, लेकिन उसका बच्चा गर्भाशय की जगह फैलोपियन ट्यूब (अंडाशय को गर्भाशय से जोड़ने वाली एक पतली नली) में विकसित हो रहा था। यह एक मेडिकल इमरजेंसी थी, जिसे ‘एक्टोपिक प्रेग्नेंसी’ कहते हैं। डॉक्टरों ने बताया कि अगर उसे वक्त पर इलाज नहीं मिलता तो अगले आधे घंटे में उसकी जान जा सकती थी।

यह सिर्फ एक मामला नहीं है, बल्कि प्रदेश की हर 200 गर्भवती महिलाओं में से एक को इस कंडीशन का सामना करना पड़ता है। ऑल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (AIIMS) की रिपोर्ट के मुताबिक 3 से 4 फीसदी महिलाओं की मौत एक्टोपिक प्रेग्नेंसी से होती है। हाल ही में भोपाल की 27 वर्षीय मॉडल खुशबू अहिरवार की अचानक हुई मौत ने इस ‘साइलेंट किलर’ पर एक बार फिर सबका ध्यान खींचा है।

शुरुआती जांच में पता चला कि मॉडल की मौत की वजह भी एक्टोपिक प्रेग्नेंसी ही थी। एक्टोपिक प्रेग्नेंसी क्यों होती है? इसके प्रमुख कारण क्या हैं और इससे बचाव कैसे संभव है? इन सवालों के जवाब जानने के लिए दैनिक भास्कर ने स्त्री रोग विशेषज्ञ प्रिया भावे चित्तावर और रीवा मेडिकल कॉलेज की गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. बीनू कुशवाह से बात की।

तीन केस स्टडी: कैसे समय पर इलाज ने बचाई जान तीन अलग-अलग केस स्टडी के जरिए समझिए, फैलोपियन ट्यूब फटने से महिलाओं पर क्या असर पड़ता है और समय पर इलाज न मिले तो क्या हो सकता है।

केस 1: पार्टनर भागा, डॉक्टरों ने बचाई जान भोपाल में रहने वाली मिजोरम की 22 साल की एक युवती गर्भवती थी। वह गर्भपात कराने के इरादे से डॉक्टरों के पास गई, लेकिन नियमों का हवाला देते हुए डॉक्टरों ने ऑपरेशन से मना कर दिया। इसी दौरान युवती का नाइजीरियाई पार्टनर, जो भोपाल में ही पढ़ाई कर रहा था, स्थिति की गंभीरता का पता चलते ही उसे छोड़कर भाग गया।

इधर हताश युवती जैसे ही अस्पताल से बाहर जाने के लिए मुड़ी, वह अचानक बेहोश होकर गिर पड़ी। यह देखकर डॉक्टर तुरंत समझ गए कि मामला सामान्य नहीं है। उन्होंने बिना देर किए उसकी सोनोग्राफी करवई। जांच में पता चला कि युवती का भ्रूण गर्भाशय में नहीं, बल्कि फैलोपियन ट्यूब में विकसित हो रहा था।

यह एक क्लासिक एक्टोपिक प्रेग्नेंसी का मामला था और ट्यूब फटने के कगार पर थी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए डॉक्टरों ने तुरंत सर्जरी का फैसला किया।

केस 2: 26 मिनट की सर्जरी ने दिया नया जीवन भोपाल की 32 साल की एक महिला, जो पहले से एक बच्चे की मां थीं, दोबारा गर्भवती हुईं। कुछ दिनों से वह गंभीर कमजोरी महसूस कर रही थीं और उन्हें लगातार चक्कर आ रहे थे। जब वह डॉक्टर के पास पहुंचीं तो उनकी हालत बेहद नाजुक थी। उनकी पल्स तेजी से गिर रही थी। शरीर में खून की कमी के कारण त्वचा पूरी तरह पीली पड़ चुकी थी।

स्थिति को देखते ही डॉक्टरों ने तुरंत सोनोग्राफी कराई, जिसमें पता चला कि यह एक एक्टोपिक प्रेग्नेंसी है और महिला का भ्रूण गर्भाशय के बजाय फैलोपियन ट्यूब में विकसित हो रहा है, जो किसी भी पल फट सकती थी। डॉक्टरों के अनुसार, उन्होंने बिना किसी फॉर्मैलिटीज या पेपर वर्क में समय गंवाए, तुरंत इमरजेंसी ऑपरेशन शुरू कर दिया।

मात्र 26 मिनट में पूरी प्रक्रिया पूरी करते हुए फैलोपियन ट्यूब निकाल दी गई और महिला की जान बचा ली गई। डॉक्टरों का कहना है कि अगर 15-20 मिनट की और देर हो जाती तो तेज इंटरनल ब्लीडिंग के कारण उसे बचाना लगभग नामुमकिन हो जाता।

केस 3: जानकारी ने बचाई जान भोपाल की 26 साल की एक महिला को यह पता भी नहीं था कि वह गर्भवती हैं। उन्होंने सिर्फ अपने पीरियड मिस किए थे, लेकिन कुछ दिनों से उन्हें कमजोरी और लगातार चक्कर आने की शिकायत थी। डॉक्टर के पास जाने से पहले उन्होंने इसके बारे में स्टडी की। वहां उन्हें एक्टोपिक प्रेग्नेंसी के बारे में जानकारी मिली। उन्हें शक हुआ कि यह कोई सामान्य स्थिति नहीं है।

इसके बाद उन्होंने तुरंत अपने माता-पिता को अपनी स्थिति बताई और अस्पताल पहुंचीं। अस्पताल में प्रेग्नेंसी टेस्ट पॉजिटिव आया, लेकिन जब सोनोग्राफी की गई तो पाया गया कि यह एक्टोपिक प्रेग्नेंसी का मामला है। उनकी फैलोपियन ट्यूब भ्रूण के विकास के कारण तेजी से फैल रही थी और किसी भी समय फट सकती थी।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए डॉक्टरों ने बिना देर किए तुरंत सर्जरी की और प्रभावित फैलोपियन ट्यूब को निकाल दिया। समय रहते सही जानकारी और इलाज मिलने से महिला की जान बच गई।

फैलोपियन ट्यूब कैसे काम करती है? डॉ. प्रिया ने इसके काम करने की प्रक्रिया को चार चरणों में समझाया

  • अंडे को पकड़ना: हर महीने जब अंडाशय से एक अंडा रिलीज होता है (जिसे ओव्यूलेशन कहते हैं), तब ट्यूब के सिरे पर मौजूद उंगलियों जैसी संरचना, जिसे ‘फिम्ब्रिया’ कहते हैं, हलकी लहर जैसी गति से हिलती है और अंडे को अपनी ओर खींचकर ट्यूब के अंदर ले आती है।
  • अंडे को आगे बढ़ाना: ट्यूब की अंदरूनी दीवारों पर छोटे-छोटे बालों जैसे स्ट्रक्चर होते हैं, जिन्हें ‘सिलिया’ (Cilia) कहते हैं। ये सिलिया अंडे को धीरे-धीरे ट्यूब के अंदर गर्भाशय की ओर धकेलते हैं।
  • गर्भ का ठहरना (निषेचन): जब शुक्राणु महिला के शरीर में प्रवेश करता है तो वह गर्भाशय से होते हुए फैलोपियन ट्यूब तक पहुंचता है। अंडे और शुक्राणु का मिलन इसी ट्यूब के मध्य हिस्से, ‘एम्पुला’ में होता है। यहीं से गर्भधारण की प्रक्रिया शुरू होती है।
  • भ्रूण को गर्भाशय तक पहुंचाना: निषेचन के बाद बनने वाला भ्रूण (Zygote) 3–5 दिनों तक धीरे-धीरे फैलोपियन ट्यूब के अंदर आगे बढ़ता है। सिलिया और ट्यूब की हलकी मांसपेशीय सिकुड़न भ्रूण को गर्भाशय तक पहुंचाती है। गर्भाशय में पहुंचकर भ्रूण दीवार से चिपक जाता है और वहीं अगले 9 महीनों तक विकसित होता है।

फैलोपियन ट्यूब क्यों फट जाती है? रीवा मेडिकल कॉलेज की गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. बीनू कुशवाह ने बताया कि फैलोपियन ट्यूब फटने (Rupture) का सबसे आम कारण एक्टोपिक प्रेग्नेंसी ही है। जब अंडा गर्भाशय तक पहुंचने के बजाय फैलोपियन ट्यूब में ही विकसित होने लगता है तो यह स्थिति बनती है। फैलोपियन ट्यूब बहुत पतली और नाजुक होती है और गर्भाशय की तरह फैल नहीं सकती।

इसलिए जैसे-जैसे भ्रूण बढ़ता है, ट्यूब पर दबाव बढ़ता जाता है। जब यह दबाव ट्यूब की क्षमता से ज्यादा हो जाता है तो वह फट जाती है, जिससे पेट के अंदर तेज ब्लीडिंग होने लगती है। यह एक जानलेवा स्थिति है, जिसमें तत्काल मेडिकल मदद की जरूरत होती है।

एक्टोपिक प्रेग्नेंसी के मुख्य कारण और धूम्रपान का कनेक्शन विशेषज्ञों के अनुसार, एक्टोपिक प्रेग्नेंसी के कई कारण हो सकते हैं, लेकिन चार प्रमुख कारण माने जाते हैं…

  • पेल्विक इंफ्लैमेटरी डिजीज (PID): यह एक बैक्टीरियल संक्रमण है जो प्रजनन अंगों, विशेषकर फैलोपियन ट्यूब में सूजन पैदा कर देता है। सूजन के कारण ट्यूब का रास्ता संकरा या बंद हो सकता है, जिससे अंडा गर्भाशय तक नहीं पहुंच पाता।
  • पिछली एक्टोपिक प्रेग्नेंसी: जिन महिलाओं को एक बार यह समस्या हो चुकी है, उन्हें दोबारा होने का खतरा 10-15% तक बढ़ जाता है।
  • सर्जरी का इतिहास: फैलोपियन ट्यूब या पेट के किसी अन्य हिस्से की सर्जरी के कारण ट्यूब में निशान या क्षति हो सकती है, जो अंडे की गति में बाधा डाल सकती है।
  • धूम्रपान: यह एक बड़ा और रोकथाम योग्य कारण है। सिगरेट का धुआं सीधे तौर पर फैलोपियन ट्यूब के काम को प्रभावित करता है।

स्मोकिंग से एक्टोपिक प्रेग्नेंसी क्यों होती है? डॉ. प्रिया भावे ने विस्तार से बताया कि धूम्रपान इस स्थिति का खतरा कैसे बढ़ाता है

  • सिलिया को नुकसान: सिगरेट में मौजूद निकोटिन और अन्य रसायन ट्यूब के अंदर मौजूद बालों जैसी संरचना ‘सिलिया’ को लकवाग्रस्त या धीमा कर देते हैं। सिलिया का काम अंडे को गर्भाशय की ओर धकेलना होता है। जब वे ठीक से काम नहीं करते तो अंडा समय पर गर्भाशय तक नहीं पहुंच पाता और ट्यूब में ही फंसकर विकसित होने लगता है।
  • मांसपेशियों की गति धीमी होना: धूम्रपान ट्यूब की मांसपेशियों की सामान्य सिकुड़न को भी धीमा कर देता है, जो अंडे को आगे बढ़ाने में मदद करती है।
  • सूजन और ब्लॉकेज: धूम्रपान से ट्यूब की अंदरूनी परत को नुकसान पहुंचता है और सूजन बढ़ सकती है, जिससे ट्यूब संकीर्ण या आंशिक रूप से बंद हो जाती है।
  • हार्मोनल असंतुलन: स्मोकिंग महिलाओं के हार्मोनल संतुलन को भी बिगाड़ सकती है, जिससे ट्यूब का सामान्य कामकाज बाधित होता है।



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