IND vs SA: टीम इंडिया के कोच गौतम गंभीर की स्ट्रेटजी इन दिनों सवालों के घेरे में है. सबसे बड़ा सवाल है कि ‘ऑलराउंडर-फर्स्ट ब्लूप्रिंट’ जो एक समय भारतीय टीम के लिए सबसे बड़ा ‘चीट कोड’ माना जाता था अब क्यों घरेलू मैदानों पर ही टीम इंडिया के गले की फांस बन गया है. हालिया प्रदर्शन ने इस रणनीति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिसने भारत को 2010 के बाद पहली बार साउथ अफ्रीका के सामने घरेलू टेस्ट हारने पर मजबूर कर दिया.
ईडन गार्डन्स में 8 बल्लेबाज नहीं बचा पाए लाज
ईडन गार्डन्स में साउथ अफ्रीका के खिलाफ टीम इंडिया को 30 रन से हार का सामना करना पड़ा. इस टेस्ट मैच में 8 बल्लेबाज टीम इंडिया की लाज नहीं बचा पाए और टीम की सच्चाई को उजागर हो गई. 2023 की शुरुआत तक रवींद्र जडेजा, रविचंद्रन अश्विन और अक्षर पटेल के रूप में तीन स्पिन ऑलराउंडर्स की मौजूदगी में निचले क्रम ने कई मैच बचाए थे, लेकिन अब यही अप्रोच एक ‘रणनीतिक ब्लाइंड स्पॉट’ बन गई है. हम आपको समझाते हैं कि 6 घरेलू टेस्ट में 4 घर की हार के पैटर्न की पहचान क्या है.
न्यूजीलैंड ने किया व्हाइटवॉश
अक्टूबर 2024 से नवंबर 2025 तक, भारतीय टीम ने घर पर खेले गए छह टेस्ट मैचों में से चार गंवा दिए हैं. इसमें न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ 0-3 से वाइटवॉश और हाल ही में कोलकाता में साउथ अफ़्रीका से हार शामिल है. पिछले 11 सालों में घर पर सिर्फ चार टेस्ट हारने वाली टीम के लिए यह हार का सिलसिला चिंताजनक है. यह हार निचले क्रम की बल्लेबाजी की कमजोरी की वजह से नहीं है, बल्कि टॉप-ऑर्डर के बार-बार फेल होने के कारण है. बेंगलुरु में 46 रन पर आउट होना, मुंबई में टर्निंग ट्रैक पर 147 का पीछा करते हुए 121 पर ढेर होना और कोलकाता में वॉशिंगटन सुंदर को नंबर तीन पर उतारने जैसे अजीबोगरीब प्रयोग इस बात का प्रमाण हैं कि टीम बल्लेबाजी को मजबूत करने के बजाय उसे और ज्यादा खींचने पर फोकस किया जा रहा है.
कहां है कमी?
प्लेइंग-XI में ऑल-राउंडर ओवरलोड की रणनीति ने टीम में तीन बड़ी कमजोरियां पैदा कर दी हैं. सबसे पहील वीकनेस है कि स्पेशलिस्ट को बाहर रखना. साउथ अफ्रीका के खिलाफ भारत ने चार स्पेशलिस्ट बल्लेबाजों, एक विकेटकीपर-बल्लेबाज और चार बॉलिंग ऑलराउंडर्स को उतारा. सीम मूवमेंट वाली पिच पर सिर्फ दो फ्रंटलाइन सीमर रखना एक बड़ी गलती थी. वॉशिंगटन सुंदर को नंबर तीन पर बल्लेबाजी कराना दिखाता है कि टीम खुद तय नहीं कर पा रही है कि वह फ्रंटलाइन बल्लेबाज हैं या पांचवें गेंदबाज.
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पिच की तैयारी
पिच की तैयारी भी एक वीकनेस है. ऑलराउंडर्स पर अत्यधिक भरोसा करने के कारण, टीम प्रबंधन लगातार ऐसी पिचें तैयार करवा रहा है जो तेज टर्न दें. लेकिन अब विरोधी टीमें भी ऐसे पिचों पर 150 के स्कोर को डिफेंड करने लायक मान रही हैं. कभी मुकाबले का फायदा देने वाला ऑलराउंडर टेम्पलेट अब एक टैक्टिकल कमी में बदल गया है. जब निचले क्रम की इंश्योरेंस पॉलिसी काम नहीं करती है, तो भारत की कमजोरी सामने आ जाती है. टीम को अब यह तय करना होगा कि क्या वे बुनियादी और विशेषज्ञता पर लौटते हैं या इसी ‘ओवरलोड स्ट्रैटेजी’ के साथ प्रयोग जारी रखते हैं.