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Wheat Farming Tips: गेहूं बुवाई का सीजन चल रहा है. कई जगह गेहूं के पौधे निकल भी आएं हैं. ऐसे में कृषि विशेषज्ञ ने बताया कि सिंचाई और बीज उपचार से उत्पादन बढ़ता है. फसल रोगमुक्त रहती है. इसलिए इस विधि को जरूर जानें…
Wheat Farming: मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र में इस समय रबी की मुख्य फसल गेहूं खेतों में लहलहाने लगी है. ज्यादातर किसानों ने 25 से 30 दिन पहले बुवाई कर दी थी, हालांकि देर से बुवाई करने वाले किसान अब भी खेती में जुटे हैं. बुवाई करने के बाद फसल में सिंचाई की जरूरत पड़ती है. ऐसे में हर किसान को यह मालूम होना चाहिए कि सिंचाई कब करें और कितनी बार करनी चाहिए. पहली सिंचाई, ही फसल की जड़ों को मजबूत बनाती है और आगे बेहतर उत्पादन में अहम भूमिका निभाती है.
गेहूं में पहली सिंचाई कब करें?
कृषि विशेषज्ञ डॉ. आरपी परोहा ने लोकल 18 को बताया कि गेहूं की फसल में सिंचाई समझदारी से करनी चाहिए, क्योंकि ज्यादा पानी फसल के लिए नुकसानदायक हो सकता है. उन्होंने बताया कि बुवाई के 21 दिनों बाद पहली सिंचाई कर देना चाहिए, लेकिन अगर खेत में पहले से नमी हो और मौसम ठंडा हो तो किसान इसे 25 दिन पर भी कर सकते हैं. खासकर दोमट मिट्टी वाले खेतों में हल्की सिंचाई ही पर्याप्त रहती है.
गेहूं में दूसरी सिंचाई कब करें?
दूसरी सिंचाई 45-50 दिन के बीच, तीसरी 55-60 दिनों में, चौथी 75-80 दिन पर और जरूरत पड़ने पर अंतिम सिंचाई 110 दिनों बाद करनी चाहिए, आरपी परोहा ने कहा पहले अगर गर्मी अचानक बढ़ जाए तो फसल पर टर्मिनल हिट का खतरा बढ़ जाता है. ऐसे में गेहूं के दाने सिकुड़ जाते हैं और उत्पादन पर सीधा असर पड़ता है.
बुवाई के पहले ये काम बहुत जरूरी
डॉ. परोहा ने कहा, अधिक उपज के लिए सिंचाई के साथ उन्नत किस्म का बीज भी जरूरी हैं. प्रति एकड़ लगभग 10 किलो बीज पर्याप्त माना जाता है. बुवाई से पहले बीज उपचार करना बेहद जरूरी है, जिससे अंकुरण बेहतर होता है और पौधे शुरुआती रोगों से सुरक्षित रहते. विशेषज्ञ का दावा है, अगर किसान इसी विधि से सिंचाई करेगा तो उसे गेहूं की खेती में नुकसान नहीं होगा.
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एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें