बालाघाट रेप-डबल मर्डर केस: फांसी की सजा पाए गिरधारी सोनवाने को हाईकोर्ट ने किया बरी

बालाघाट रेप-डबल मर्डर केस: फांसी की सजा पाए गिरधारी सोनवाने को हाईकोर्ट ने किया बरी


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Balaghat Double Murder-Case : मध्यप्रदेश हाईकोर्ट, जबलपुर ने बालाघाट जिले के बहुचर्चित डबल मर्डर और रेप केस में चौंकाने वाला फैसला सुनाया है. इसमें फांसी की सजा पाए आरोपी गिरधारी सोनवाने को बरी कर दिया है.

बालाघाट रेप-डबल मर्डर केस: फांसी की सजा पाए गिरधारी सोनवाने को HC  ने किया बरीमध्‍य प्रदेश हाई कोर्ट ने पुराना फैसला पलट दिया.
जबलपुर. मध्यप्रदेश न्यायपालिका ने अहम फैसला सुनाते हुए बालाघाट जिले के बहुचर्चित डबल मर्डर और रेप केस में फांसी की सजा पाए आरोपी गिरधारी सोनवाने को बरी कर दिया है. जबलपुर हाईकोर्ट ने शुक्रवार को दिए फैसले में कहा कि पुलिस की जांच गलत और अविश्वसनीय थी. अदालत ने मामले में संज्ञान लेते हुए कहा कि एक निर्दोष व्यक्ति को तीन साल से अधिक समय तक जेल में रखना न्याय के मूल सिद्धांतों का उल्लंघन है.

दरअसल, 4 अप्रैल 2022 को बालाघाट जिले के तिरोड़ी थाना क्षेत्र स्थित ग्राम चिटकादेवरी के नहर में दो मासूम बहनों के शव मिले थे. बच्चियों की उम्र क्रमशः तीन साल और पांच साल 11 माह थी. पुलिस जांच के अनुसार बच्चियों के साथ दुष्कर्म कर उनकी हत्या कर दी गई थी. इस सनसनीखेज मामले ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था. मृतक बच्चियों के पिता ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि परिवार रिश्तेदारी में गया हुआ था और इसी दौरान यह वारदात हुई.

सोनवाने को फांसी की सजा सुनाई थी
विशेष न्यायाधीश कविता इवनाती की अदालत ने इस मामले को विरल से विरलतम की श्रेणी में रखते हुए आरोपी गिरधारी सोनवाने को दोषी माना. अदालत ने अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत 23 गवाहों के बयानों और पुलिस जांच रिपोर्ट के आधार पर सोनवाने को फांसी की सजा सुनाई थी. अभियोजन ने दावा किया था कि सोनवाने का बच्चियों के परिवार से पुराना विवाद था और शक था कि परिवार जादू-टोना करता है. इस वजह से उसने बच्चियों को बहला-फुसलाकर जंगल में ले जाकर रेप और हत्या कर शव नहर में फेंक दिए.

हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
गिरधारी सोनवाने ने इस फैसले को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में अपील दायर की. जबलपुर हाईकोर्ट ने सुनवाई में पाया कि पुलिस जांच में गंभीर खामियां थीं. गवाहों के बयानों में विसंगतियां थीं और आरोपी को दोषी ठहराने के लिए पर्याप्त साक्ष्य मौजूद नहीं थे. अदालत ने बालाघाट पुलिस को फटकार लगाते हुए कहा कि बिना ठोस सबूत किसी को दोषी ठहराना न्याय प्रणाली की मूल भावना के खिलाफ है.

3 साल 6 महीने तक जेल में बेगुनाही झेली
हाईकोर्ट ने न केवल फांसी की सजा रद्द कर आरोपी को बरी किया बल्कि यह भी आदेश दिया कि आरोपी को 3 साल 6 महीने तक जेल में बेगुनाही झेलने के बदले 1 लाख रुपये मुआवजा दिया जाए. यह राशि जांच अधिकारियों से वसूली जाएगी. अदालत का यह फैसला न्यायिक इतिहास में अनोखा माना जा रहा है, क्योंकि इसमें पुलिस अधिकारियों को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया गया है.

Sumit verma

सुमित वर्मा, News18 में 4 सालों से एसोसिएट एडीटर पद पर कार्यरत हैं. बीते 3 दशकों से सक्रिय पत्रकारिता में अपनी अलग पहचान रखते हैं. देश के नामचीन मीडिया संस्‍थानों में सजग जिम्‍मेदार पदों पर काम करने का अनुभव. प…और पढ़ें

सुमित वर्मा, News18 में 4 सालों से एसोसिएट एडीटर पद पर कार्यरत हैं. बीते 3 दशकों से सक्रिय पत्रकारिता में अपनी अलग पहचान रखते हैं. देश के नामचीन मीडिया संस्‍थानों में सजग जिम्‍मेदार पदों पर काम करने का अनुभव. प… और पढ़ें

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