भोपाल गैस त्रासदी पीड़ितों के लिए क्यों खुली संभावना ट्रस्ट क्लिनिक? 37000 का हो चुका इलाज, फिर भी जख्म ताजे

भोपाल गैस त्रासदी पीड़ितों के लिए क्यों खुली संभावना ट्रस्ट क्लिनिक? 37000 का हो चुका इलाज, फिर भी जख्म ताजे


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Bhopal Gas Tragedy: भोपाल गैस त्रासदी के 41 साल बाद भी संभावना ट्रस्ट क्लिनिक में हजारों पीड़ित इलाज चल रहा है. अब तक 37000 से ज्यादा गैस पीड़ितों का इलाज हो चुका है. ये क्लिनिक क्यों खोलनी पड़ी, जानें खास वजह…

Bhpal News: 2-3 दिसंबर 1984 की रात मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में रह रहे, जिस शख्स पर गुजरी मानों उस पर गमों का पहाड़ टूट पड़ा. भोपाल गैस त्रासदी को इस साल 3 दिसंबर को 41 साल पूरे हो जाएंगे. ऐसे में आज भी यहां पीड़ितों के जख्म अब तक भर नहीं सके हैं. भोपाल के संभावना ट्रस्ट क्लिनिक में आज भी हजारों पीड़ित अपना इलाज करवाने के लिए पहुंचते हैं. लोकल 18 के माध्यम से जानिए सलाहकार का इस मामले में क्या कहना है.

लोकल 18 से बात करते हुए संभावना ट्रस्ट क्लीनिक के सलाहकार सतीनाथ षडंगी ने बताया, साल 1995 में इस ट्रस्ट की शुरुआत हुई थी. गैस हादसे के 10 साल बीत चुके थे और इन 10 सालों में कई सारे अस्पताल भोपाल में बने. उस वक्त हम लोगों ने अस्पतालों का जब अध्ययन करना शुरू किया कि कैसी और कौन सी बीमारियों के लिए दवाइयां यहां दी जा रही हैं. अध्ययन में हमें यह मालूम हुआ कि करीब 40% से अधिक दवाई ऐसी थी जो गैर जरूरी और नुकसानदेह हैं.

सतीनाथ षडंगी बताते हैं कि गैस रिसाव के बाद लोगों को तरह-तरह की दर्द निवारक दवाई दी जा रही थी, जिसमें स्टेरॉयड का सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जा रहा था. यह देखने के बाद हमें यह समझ में आया कि जिन पीड़ितों का इलाज हो रहा था. वह सबसे ज्यादा गैस की समस्या से ग्रस्त थे. इसमें मुख्य रूप से कई इलाज ऐसे थे जो गैस पीड़ितों की समस्याओं को और ज्यादा बढ़ा रहे थे. इसमें सबसे मुख्य उनके गुर्दों पर सबसे ज्यादा असर देखने को मिल रहा था.

गुर्दा रोग के सबसे ज्यादा मरीज
सतीनाथ बताते हैं कि देश में आज गुर्दे के रोग से सफर करने वाले मरीज सबसे ज्यादा भोपाल में हैं. इन्हीं सब बातों को ध्यान में रखते हुए काफी सारे विशेषज्ञों की सलाह लेने के बाद हमें लगा कि आधुनिक चिकित्सा के साथ हमें आयुर्वेद, पंचकर्म और योग को समेकित करते हुए विधि गैस पीड़ितों को दिलाई जाए तो यह उनके लिए एक बेहतर इलाज के रूप में साबित हो सकता है. हमें करीब 29 साल गैस पीड़ितों के लिए काम करते हुए हो गया. अब तक 37,000 से ज्यादा गैस पीड़ितों का इलाज किया है.

स्वतंत्र तंत्र से लेकर दिल के मरीज सबसे ज्यादा
सतीनाथ बताते हैं कि उस दौर में सबसे ज्यादा मरीज स्वतंत्र तंत्र से पीड़ित मरीज मिल रहे थे. साथ ही अलग-अलग तरह के छोटे व बड़े जोड़ों के दर्द से पीड़ित और दिल की समस्या से पीड़ित मरीजों की संख्या भी बहुत ज्यादा देखी जा रही थी. इसके अलावा थायराइड से संबंधित मरीज भी बड़ी संख्या में देखने को मिले. वहीं स्त्री रोगों में पीसीओडी जैसी समस्याएं बड़ी संख्या में देखी गई.

वर्तमान में संभावना ट्रस्ट क्लीनिक से अब तक 26,229 गैस पीड़ितों ने अपना इलाज करवाया है. साथ ही 8,061 प्रदूषित भूजल पीड़ित, 1,632 गैस पीड़ित/प्रदूषित भूजल पीड़ित, 1,638 अपीड़ित और 115 गैस पीड़ित माता-पिता की संतान ने इलाज करवाया है. इसके अलावा रोजाना करीब 76 मरीज यहां पर इलाज के लिए पहुंच रहे हैं.

Rishi mishra

एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें

एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म… और पढ़ें

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