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Rare Stone Exported from Brazil: वर्ल्ड की सबसे ऊंची 51 इंच की स्फटिक पत्थर से निर्मित प्रतिमा विराजमान की जा रही इसके साथ ही इसी दुर्लभ पत्थर से बनी 1008 जैन प्रतिमा सहस्त्र कूट जिनालय में विराजमान की जा रही, इस तरह का स्तंभ भारत में कहीं नहीं है .
अनुज गौतम, सागर: पत्थरों की दुनिया में स्फटिक पत्थर को सबसे दुर्लभ माना गया है, एक तरह से यह पत्थर पारदर्शी रंगहीन और निर्मल होता है. जिसकी कीमत सोने चांदी मणियों के जैसे बेसकीमती होती है. इस दुर्लभ पत्थर की 33 इंच की प्रतिमा सागर में स्थापित है और यह गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज है. लेकिन अब यह रिकॉर्ड भी टूटने जा रहा है. क्योंकि सागर के मंगलगिरी क्षेत्र में एक और 51 इंच की मुनि सुब्रत नाथ भगवान की प्रतिमा विराजमान की जा रही है. यह विश्व की पहली ऐसी स्फटिक प्रतिमा होगी जिसकी ऊंचाई साढ़े चार इंच से अधिक होगी, इसके लिए कमेटी गिनीज बुक में रिकॉर्ड दर्ज करवाने अप्लाई करने की तैयारी कर रही है.
दरअसल, सागर के जैन मंगलगिरी तीर्थ क्षेत्र कमेटी के अध्यक्ष जयकुमार जैन का कहना है कि यह क्षेत्र अपने आप में हर दिन नए आयाम गढ़ रहा है. यहां वर्ल्ड की सबसे ऊंची 51 इंच की प्रतिमा विराजमान की जा रही है. इसके साथ ही इसी दुर्लभ पत्थर से बनी 1008 जैन प्रतिमा सहस्त्र कूट जिनालय में विराजमान की जा रही, इस तरह का स्तंभ भारत में कहीं नहीं है और ना इतनी ऊंची प्रतिमा है. इस प्रतिष्ठित करने के लिए पंचकल्याणक गजरथ महोत्सव चल रहा है.
कमेटी के सदस्य प्रमोद जैन बारदाना ने बताया इस प्रतिमा को जयपुर में 2 साल की मेहनत से कारीगरों ने तराशा है लेकिन इस पत्थर को ब्राजील से मंगवाया गया था. 10 15 साल से हम लोग इस तरह की प्रतिमा को बनवाना चाह रहे थे और कई जगह कारीगरों को इसकी सूचना दे रखी थी और उनके संपर्क में थे. जैसे ही हम लोगों को इस पत्थर के बारे में जानकारी मिली तो जैन मुनि श्री आदित्य सागर महाराज के पास पहुंचे उन्हें इस पत्थर के बारे में बताया फिर इस पत्थर की लैब से जांच करवाई जब सब कुछ सही हुआ तो मुनि की प्रेरणा से इसे ब्राजील से जयपुर लाया गया और यहां सुमेर जी की फैक्ट्री में 2 साल तक काम चला.
यह दुर्लभ पत्थर माना जाता है इसको ब्राजील से मंगवाया है और इतना बड़ा पत्थर मिलना भी दुर्लभ है. यह निर्दोष पत्थर है इसमें कोई दाग धब्बे नहीं है. जैन समाज की समृद्ध परंपरा में इस पत्थर को अत्यंत पवित्र ऊर्जावान और दिव्यता का प्रतीक माना गया है और खास बात यह है कि इतना बड़ा और अकाल स्फटिक से निर्मित प्रतिमा स्वरूप अब तक किसी भी तीर्थ में प्रतिष्ठित नहीं हुआ है. मंगलगिरी में प्राण प्रतिष्ठा होने के बाद धार्मिक विरासत के लिए भी यह अनूठा गौरव है, इस पत्थर को जब तराशा जाता है तो केवल हीरा इसकी कटिंग कर सकता है और किसी चीज से कटिंग नहीं हो पाती है.
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Shweta Singh, currently working with News18MPCG (Digital), has been crafting impactful stories in digital journalism for more than two years. From hyperlocal issues to politics, crime, astrology, and lifestyle,…और पढ़ें