Agriculture Tips. अगर आप किसान हैं और आपने मटर की बोवनी की है तो हम आपको कुछ ऐसे टिप्स बताने जा रहे हैं जिससे आपके मटर उत्पादन में बढ़ोतरी देखने को मिलेगी. दरअसल, मटर बोवनी के बाद मटर की सिंचाई, खाद डालना और निराई-गुड़ाई एक महत्वपूर्ण काम होता है.
किसान वैद्यनाथ पाल बताते हैं कि लगभग 25 दिन पहले मटर की बोवनी कर दी थी. ठंड भी पड़ने लगी है, ऐसे समय में मटर फसल में पहली सिंचाई कर लेनी चाहिए. हालांकि, हमारे यहां काली मिट्टी है तो ज्यादा सिंचाई की जरूरत नहीं पड़ती है. काली मिट्टी की विशेषता होती है कि वह कई दिनों तक पानी अवशोषित करके रखती है.
पहली सिंचाई से फायदा
किसान बताते हैं कि मटर में पहली सिंचाई से फायदा यह होता है कि जो पौधे अच्छे से वृद्धि नहीं कर पा रहे हैं, वह पौधे तेजी से वृद्धि करते हैं और जल्दी इसमें फूल आने शुरू हो जाते हैं. साथ ही मटर के पौधे में पाला लगने की संभावना भी कम हो जाती है.
एक्सपर्ट ने बताया सिंचाई का सही तरीका
वहीं छतरपुर नौगांव कृषि विज्ञान केंद्र में पदस्थ डॉक्टर कमलेश अहिरवार बताते हैं कि मटर बुवाई के बाद खेत की हल्की सिंचाई बहुत लाभदायक होती है. इससे बीज जल्दी फूटते हैं और जड़ें मिट्टी में अच्छी तरह फैलती हैं. अगर खेत में पाला पड़ने की संभावना हो, तो हल्की सिंचाई करने से पौधे पाले से सुरक्षित रहते हैं.
उन्होंने यह भी कहा कि मटर की फसल को हमेशा नमी की जरूरत होती है, लेकिन पानी का जमाव नहीं होना चाहिए. पानी रुकने से जड़ गलन और फफूंद रोग बढ़ जाते हैं. इसलिए खेत में जल-निकास व्यवस्था अच्छी होनी चाहिए.
डॉ कमलेश आगे बताते हैं कि सिंचाई के साथ ही पहली निराई-गुड़ाई बुवाई के 20 से 25 दिन बाद कर लेनी चाहिए. इससे खरपतवार नियंत्रण में रहते हैं और पौधों को पर्याप्त पोषण मिलता है. उन्होंने यह भी बताया कि मटर की फसल को मजबूत तना और अधिक फूल चाहिए होता है, इसलिए खेत में जैविक खाद या गोबर की खाद का उपयोग जरूर करें.
उन्होंने आगे सलाह देते हुए बतलाया कि यदि किसान चाहें तो 2% DAP घोल या 1% यूरिया का पत्तों पर छिड़काव कर सकते हैं. इससे फसल हरी-भरी रहती है और फली बनने की क्षमता बढ़ती है. हालांकि अत्यधिक नाइट्रोजन का प्रयोग नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे पौधे ज्यादा पत्तेदार हो जाते हैं और फलियां कम लगती हैं.