सरकारी सिस्टम में रिश्वत और भ्रष्टाचार की जब भी बात होती है, तो आम तौर पर पुरुषों के चेहरे ही सामने आते हैं। महिला अधिकारियों को अक्सर कर्तव्यनिष्ठ, ईमानदार और जवाबदेह माना जाता रहा है, और काफी हद तक उनकी छवि इन मामलों में बेदाग भी रही है। मगर, मध्य
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अब महिला अधिकारी भी रिश्वत, संगठित वसूली, हवाला कारोबारियों से सांठ-गांठ और आय से अधिक संपत्ति जैसे गंभीर भ्रष्टाचार के आरोपों में घिर रही हैं। डीएसपी, सहायक आबकारी आयुक्त, इंजीनियर से लेकर पटवारी और प्राइमरी स्कूल की टीचर तक, कई महिला अधिकारी-कर्मचारी लोकायुक्त और आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) की कार्रवाई की जद में आई हैं।
हर साल कितनी महिला कर्मचारी भ्रष्टाचार के मामलों में पकड़ी जाती है? ईओडब्ल्यू और लोकायुक्त ऐसा कोई रिकॉर्ड नहीं रखते, लेकिन भास्कर ने लोकायुक्त की पिछले 20 सालों की कार्रवाई का एनालिसिस किया तो पाया कि पिछले एक दशक में रिश्वत के मामलों में दोषी करार दिए जाने वाले मामलों में महिलाओं की संख्या तीन गुना हो चुकी है।
आखिर महिलाएं में भी भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी की प्रवृत्ति क्यों बढ़ रही है? भास्कर ने ताजा मामलों का एनालिसिस किया और एक्सपर्ट से बात कर समझा।
5 केस जिसमें महिला कर्मचारियों ने किया भ्रष्टाचार
शराब ठेकेदार से वसूली और आत्महत्या देवास जिले की प्रभारी सहायक आबकारी आयुक्त मंदाकिनी दीक्षित का मामला वसूली और दबाव की उस भयावह तस्वीर को दिखाता है, जिसके कारण एक व्यक्ति ने अपनी जान दे दी। शराब ठेकेदार दिनेश मकवाना ने 8 नवंबर को जहर खाकर आत्महत्या कर ली। मरने से पहले बनाए एक वीडियो में उसने आरोप लगाया कि मंदाकिनी दीक्षित उस पर हर महीने 7.5 लाख रुपए की रिश्वत देने का दबाव बना रही थीं।
दिनेश ने वीडियो में दावा किया कि वह पहले ही 20-22 लाख रुपए दे चुका था, लेकिन लगातार बढ़ती मांग और प्रताड़ना से तंग आकर वह यह कदम उठा रहा है। दिनेश की मौत के बाद, उसकी मां ने भी इन आरोपों को दोहराया और कहा कि अधिकारी और उनका स्टाफ दुकान का स्टॉक रोककर पैसे के लिए दबाव बनाते थे। इसके बाद कुछ ऑडियो और वीडियो भी सामने आए, जिनसे इन आरोपों को बल मिला।
हालांकि, मंदाकिनी दीक्षित ने इन सभी आरोपों को खारिज करते हुए खुद को ‘ब्लैकमेलिंग का शिकार’ बताया। उन्होंने देवास एसपी को एक लिखित शिकायत देकर दावा किया कि दिनेश का परिवार उनसे दो करोड़ रुपए की मांग कर रहा था और पैसे न देने पर वीडियो वायरल करने की धमकी दे रहा था।
इस हाई-प्रोफाइल मामले ने जब तूल पकड़ा तो मुख्यमंत्री के निर्देश पर 6 दिसंबर को मंदाकिनी दीक्षित को निलंबित कर दिया गया। फिलहाल मामले की जांच चल रही है।

एसडीओपी ने हवाला कारोबारी को दिया 50-50 का ऑफर सिवनी में हुआ यह मामला पुलिस की संगठित लूट का एक क्लासिक उदाहरण है। एसडीओपी पूजा पांडेय और बंडोल थाने के टीआई अर्पित भैरम को सूचना मिली कि नागपुर जा रही एक क्रेटा कार में हवाला के 3 करोड़ रुपए हैं। टीम ने गाड़ी को रोका, रुपए जब्त कर अपनी गाड़ी में रखे और कारोबारी को बिना किसी कार्रवाई के जाने दिया।
उन्हें लगा कि हवाला का पैसा होने के कारण कोई शिकायत नहीं करेगा, लेकिन उनका यह दांव उल्टा पड़ गया। व्यापारी अगले ही दिन थाने पहुंच गया। मामला खुलता देख एसडीओपी पूजा पांडेय ने उसे 50-50 का ऑफर दिया-डेढ़ करोड़ पुलिस रखेगी और डेढ़ करोड़ उसे वापस मिलेंगे। लेकिन जब व्यापारी को उसके हिस्से के पैसे लौटाए गए, तो उसमें से भी 45 लाख रुपए कम थे।
इस धोखाधड़ी से बौखलाए व्यापारी ने हंगामा कर दिया और मामला मीडिया तक पहुंच गया। इस घटना ने पूरे पुलिस विभाग को शर्मसार कर दिया। आईजी ने टीआई समेत 9 पुलिसकर्मियों को निलंबित किया और अगले ही दिन डीजीपी ने एसडीओपी पूजा पांडेय को भी सस्पेंड कर दिया। जांच में पुलिस के पास से 1.45 करोड़ रुपए बरामद हुए।
पूजा पांडेय समेत 11 पुलिसकर्मियों पर डकैती, अवैध हिरासत, अपहरण और आपराधिक षड्यंत्र जैसी गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया गया।

टीचर की मर्जी के बगैर नहीं गुजरता रेत का डंपर सागर जिले के बीना के एक छोटे से गांव किर्रोद के सरकारी स्कूल में गणित पढ़ाने वाली प्रतिभा राय की कहानी किसी फिल्म की पटकथा से कम नहीं है। बच्चों को पढ़ाने की आड़ में वह 23 जिलों में रेत के अवैध कारोबार का एक विशाल साम्राज्य चला रही थीं। भास्कर की इनवेस्टीगेशन में यह खुलासा हुआ कि उनकी मर्जी के बिना रेत का एक डंपर भी इलाके से नहीं गुजर सकता था।
वह खुद को एक निजी खनन कंपनी से जुड़ा बताती थीं और खनिज नाकों से लेकर अवैध खदानों तक, सब कुछ उनके नियंत्रण में था। उनकी इस समानांतर सरकार में खनिज विभाग के अधिकारी और पुलिस भी शामिल थे, जिससे सरकारी खजाने को करोड़ों का चूना लग रहा था। इस खुलासे के बाद शिक्षा विभाग अब उन पर कार्रवाई की तैयारी कर रहा है।

संविदा इंजीनियर की ‘शाही जिंदगी’ मध्य प्रदेश पुलिस हाउसिंग कॉरपोरेशन में महज 30,000 रुपए महीने के वेतन पर काम करने वाली संविदा असिस्टेंट इंजीनियर हेमा मीणा का मामला भ्रष्टाचार से अर्जित की गई अकूत संपत्ति का प्रतीक बन गया। मई 2023 में जब लोकायुक्त ने भोपाल और रायसेन स्थित उनके ठिकानों पर छापा मारा, तो जांच अधिकारी भी दंग रह गए। हेमा मीणा 7 करोड़ रुपए से अधिक की बेनामी संपत्ति की मालकिन निकलीं।
उनकी संपत्ति में एक आलीशान बंगला, 20 लग्जरी कारें, और कई विदेशी नस्ल के कुत्ते शामिल थे। उनके घर में 30 लाख रुपए का एक LED टीवी लगा था। फॉर्म हाउस पर 50 से ज्यादा महंगे कुत्ते मिले, जिनकी रोटियां बनाने के लिए ढाई लाख रुपए की मशीन लगाई गई थी। यह संपत्ति उनकी ज्ञात आय के स्रोतों से कई सौ गुना अधिक थी। इस खुलासे के बाद सरकार ने उनकी संविदा सेवा समाप्त कर दी।

सीमांकन का रेट था 2 हजार रुपए प्रति एकड़ भोपाल में लोकायुक्त पुलिस ने पटवारी सुप्रिया जैन को एक किसान से जमीन के सीमांकन के बदले में 10 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए पकड़ा था। हुजूर तहसील के पटवारी हलका नंबर 40 में पदस्थ सुप्रिया जैन ने जमीन के सीमांकन के बदले प्रति एकड़ 36000 रुपए की मांग की थी। मुबारकपुर के रहने वाले मोहम्मद असलम ने अपनी 18 एकड़ जमीन के सीमांकन के लिए आवेदन दिया था।
जिसका सीमांकन करने के बदले प्रति एकड़ 2 हजार रुपए के हिसाब से 36 हजार रुपए मांगे गए थे। किसान ने पटवारी की शिकायत लोकायुक्त एसपी दुर्गेश कुमार राठौर से की थी। लोकायुक्त की टीम ने पटवारी को 14 मई को उसके निवास हिमांशु टावर लालघाटी के पार्किंग एरिया में पहली किस्त 10 हजार रुपए लेते हुए ट्रैप कर लिया।

एक्सपर्ट बोले- ट्रेनिंग और नैतिक मूल्यों की शिक्षा में कमी
भोपाल लोकायुक्त के एसपी डीके राठौर कहते हैं, कि हमारे लिए सभी भ्रष्ट अधिकारी एक जैसे हैं। शिकायत मिलने पर हम कार्रवाई करते हैं, फिर चाहे वह महिला अधिकारी हों या पुरुष। हमारे लिए उनकी पहचान सिर्फ भ्रष्ट अधिकारी के तौर पर ही होती है। वहीं इस बढ़ती प्रवृत्ति पर लोकायुक्त के एक रिटायर्ड अफसर नवीन अवस्थी कहते हैं, कि बीते कुछ सालों में सरकारी पदों पर महिला आरक्षण बढ़ा है।
जिससे अब विभिन्न विभागों में महिला अधिकारियों की भागीदारी भी बढ़ रही है। इसलिए भ्रष्टाचार जैसे मामलों में उनका नाम देखा जाना अप्रत्याशित नहीं है। महिलाओं को नैतिक तौर पर अधिक जिम्मेदार देखा जाता है, इसलिए उनका भ्रष्टाचार में शामिल होना समाज को ज्यादा चौंकाता है। अगर नए अफसरों में ऐसे मामले देखे जा रहे हैं, तो कहीं न कहीं उनकी ट्रेनिंग और नैतिक मूल्यों की शिक्षा में कमी है।
वे मानते हैं कि यह मुद्दा महिला या पुरुष का नहीं, बल्कि सिस्टम में फैले भ्रष्टाचार का है।
